Divyanshi Singh ने वायुसेना में बढ़ाया सारण का मान

Update: 2026-06-15 13:18 GMT

Bihar:बिहार के सारण जिले के मढ़ौरा प्रखंड स्थित गोपालपुर गांव की बेटी दिव्यांशी सिंह ने भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर इतिहास रच दिया है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार बल्कि पूरे बिहार में गर्व का माहौल है। हैदराबाद स्थित एयरफोर्स एकेडमी में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान ग्राउंड ड्यूटी शाखा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर उन्हें देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा प्रतिष्ठित ‘प्रेसिडेंट प्लाक’ से सम्मानित किया गया।

एनडीए की पहली महिला ग्राउंड ड्यूटी कैडेट दिव्यांशी सिंह ने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया है। वह भारतीय वायुसेना की ग्राउंड ड्यूटी शाखा में कमीशन पाने वाली पहली एनडीए महिला कैडेट बनी हैं। 2022 में महिलाओं के लिए एनडीए के द्वार खुलने के बाद उन्होंने परीक्षा पास कर नई पीढ़ी की महिलाओं के लिए प्रेरणा स्थापित की।

पुणे से हैदराबाद तक का कठिन प्रशिक्षण एनडीए में चयन के बाद दिव्यांशी ने पुणे में तीन वर्षों का कठोर सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया। 2025 में उन्हें कैडेट क्वार्टर मास्टर सार्जेंट की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद उन्होंने हैदराबाद एयरफोर्स एकेडमी में एक वर्ष का विशेष प्रशिक्षण लिया और 13 जून 2026 को फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में पास आउट हुईं।

पांचवीं पीढ़ी की सैन्य परंपरा दिव्यांशी का परिवार लंबे समय से देशसेवा से जुड़ा रहा है। उनके पिता विनोद कुमार सिंह भारतीय वायुसेना में जूनियर वारंट ऑफिसर हैं। दादा और परदादा बिहार पुलिस में सेवा दे चुके हैं, जबकि परिवार की चौथी पीढ़ी भी पुलिस सेवा से जुड़ी रही है। दिव्यांशी इस परिवार की पांचवीं पीढ़ी हैं जिन्होंने वर्दी पहनकर देशसेवा को चुना है।

शिक्षा और पारिवारिक पृष्ठभूमि दिव्यांशी की प्रारंभिक शिक्षा नागपुर, दिल्ली और आदमपुर के केंद्रीय विद्यालयों में हुई। उनका परिवार वर्तमान में दिल्ली में रहता है। उनकी माता अनीता देवी गृहिणी हैं। छोटे भाई मनोयोग सिंह सूर्यांश आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं।

सारण में खुशी की लहर दिव्यांशी की सफलता के बाद सारण जिले में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें बधाई दी है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी उपलब्धि क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

बेटियों के लिए प्रेरणा गांव से निकलकर भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनने तक का उनका सफर मेहनत, अनुशासन और लगन का उदाहरण है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सही दिशा और मेहनत से बेटियां किसी भी ऊंचाई को हासिल कर सकती हैं।

Tags:    

Similar News