सुपौल में स्कूल समय में सोते मिले दो शिक्षक निलंबित, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने पर विभाग ने की कार्रवाई

Update: 2026-07-29 10:57 GMT

बिहार: सुपौल जिले में सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। त्रिवेणीगंज प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय खोरिया में स्कूल समय के दौरान कक्षा में सोते पाए गए दो विशिष्ट शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। जिला शिक्षा विभाग ने जांच में मामला सही पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की है। निलंबित किए गए शिक्षकों में दिनेश कुमार मंडल और देवेंद्र सरदार शामिल हैं। दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय खोरिया में कुछ दिन पहले ऐसी स्थिति सामने आई थी, जहां बच्चों को पढ़ाई कराने के बजाय शिक्षक कक्षा में सोते हुए पाए गए थे। इस मामले को लेकर शिकायत और खबर सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने इसे गंभीरता से लिया। इसके बाद त्रिवेणीगंज के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने विद्यालय का स्थलीय निरीक्षण किया और पूरे मामले की जांच की।

जांच के दौरान दोनों विशिष्ट शिक्षक स्कूल अवधि में कक्षा के अंदर कुर्सी और बेंच पर सोते हुए पाए गए। जांच रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई कि शिक्षक अपने निर्धारित समय पर बच्चों को पढ़ाने के बजाय आराम कर रहे थे। विभाग ने इसे छात्रों के हितों के खिलाफ मानते हुए कार्रवाई की।

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि विद्यालय अवधि में शिक्षकों का इस तरह लापरवाही बरतना गंभीर मामला है। शिक्षकों की जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराएं और स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत बनाएं। लेकिन कक्षा में सोते पाए जाने से विद्यालय की पढ़ाई व्यवस्था प्रभावित हुई।

विभाग ने इस मामले को सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1976 के प्रावधानों का उल्लंघन माना है। आदेश में कहा गया कि शिक्षकों द्वारा अपने कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरती गई है। इसी आधार पर दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

निलंबन अवधि के दौरान शिक्षक दिनेश कुमार मंडल का मुख्यालय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, सरायगढ़-भपटियाही निर्धारित किया गया है। वहीं, शिक्षक देवेंद्र सरदार का मुख्यालय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, राघोपुर तय किया गया है। दोनों शिक्षकों को विभागीय जांच पूरी होने तक इन कार्यालयों में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

बताया जा रहा है कि यह मामला तब सामने आया जब प्राथमिक विद्यालय खोरिया के कुछ बच्चे शिक्षकों के कक्षा में सोने के कारण वापस घर लौट गए थे। इसके बाद शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू की। विभाग का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई और शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग ने अन्य स्कूलों के शिक्षकों को भी अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर रहने का संदेश दिया है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी है।

स्थानीय स्तर पर भी इस कार्रवाई की चर्चा हो रही है। अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए। वहीं, विभागीय अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी यदि किसी स्कूल में इस तरह की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

सुपौल की यह घटना सरकारी स्कूलों में अनुशासन और शिक्षण व्यवस्था को लेकर एक बड़ा संदेश देती है। शिक्षा विभाग की कार्रवाई से उम्मीद जताई जा रही है कि स्कूलों में शिक्षकों की जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

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