Bihar बिहार: बिहार में गुरुवार को मंत्रिमंडल का बड़ा विस्तार किया गया, जिसमें कुल 32 लोगों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इस विस्तार में JD(U) सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar भी शामिल रहे। निशांत कुमार सहित 31 अन्य विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। यह शपथ ग्रहण समारोह पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित किया गया।

समारोह में राज्यपाल Syed Ata Hasnain ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। कार्यक्रम का माहौल काफी भव्य रहा और बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंचे।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्तर के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री JP Nadda, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah, रक्षा मंत्री Rajnath Singh और प्रधानमंत्री Narendra Modi भी इस शपथ ग्रहण कार्यक्रम में मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।


मंत्रिमंडल में शामिल होने वालों में पूर्व उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha, पूर्व मंत्री Shravan Kumar और Ashok Chaudhary भी शामिल हैं। इन नेताओं को दोबारा या नए विभागों की जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

शपथ ग्रहण समारोह गांधी मैदान में पूरे प्रशासनिक इंतजाम के साथ आयोजित किया गया। सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे और प्रवेश व्यवस्था को पूरी तरह नियंत्रित रखा गया था। कार्यक्रम के दौरान मंच पर एक-एक कर सभी नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई।

सूत्रों के अनुसार, इस बड़े मंत्रिमंडल विस्तार का उद्देश्य राज्य सरकार के कामकाज को तेज करना और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाना है। नए मंत्रियों को विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि विकास योजनाओं को तेजी से लागू किया जा सके।



निशांत कुमार के शामिल होने को लेकर राजनीतिक हलकों में खास चर्चा है। इसे नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। वहीं, अनुभवी नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह देकर संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बताया गया कि यह विस्तार राज्य में विकास कार्यों को गति देने और जनता से जुड़े मुद्दों के समाधान को तेज करने के उद्देश्य से किया गया है। सभी मंत्रियों ने शपथ के बाद कहा कि वे अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे।

इस तरह बिहार का यह मंत्रिमंडल विस्तार राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें अनुभव और नए नेतृत्व का संतुलन साफ दिखाई देता है।

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