पटना। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को स्थानीय शासन व्यवस्था और ग्राम स्तर की संस्थाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि देश के प्रशासनिक ढांचे में जमीनी स्तर पर काम करने वाले जनप्रतिनिधियों और संस्थाओं के पास वास्तविक अनुभव और समस्याओं की सीधी जानकारी होती है। इसलिए नीतियों के निर्माण और विकास योजनाओं में गांव स्तर से मिलने वाले सुझावों को महत्व दिया जाना चाहिए।पटना में आयोजित **‘ग्राम संसद बिहार चैप्टर’** कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पब्लिक पॉलिसी और शासन की रणनीतियों में स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी जरूरी है।उन्होंने कहा कि गांवों से मिलने वाले सुझाव सरकार की योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकते हैं। उनके अनुसार, ग्राम संसद जैसे मंचों के माध्यम से आम लोगों और स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है।
ग्राम संसद से आए सुझावों पर दिया जोर
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की योजनाएं केवल ऊपर से नीचे तक लागू करने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर की जरूरतों को भी ध्यान में रखना चाहिए।उन्होंने कहा कि ग्राम संसद के माध्यम से स्थानीय समस्याओं, जरूरतों और संभावनाओं को समझने में मदद मिलती है। इससे सरकार को योजनाओं की दिशा तय करने में बेहतर फीडबैक मिल सकता है।सम्राट चौधरी ने कहा कि गांवों में रहने वाले लोग अपनी स्थानीय परिस्थितियों को सबसे बेहतर तरीके से समझते हैं, इसलिए उनके सुझाव विकास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होने चाहिए।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ने की बात
उपमुख्यमंत्री ने ग्राम संसद की भूमिका को प्रधानमंत्री के **‘विकसित भारत 2047’** के विजन से जोड़ते हुए कहा कि स्थानीय संस्थाएं इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए केवल बड़े शहरों का विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि गांवों और छोटे क्षेत्रों में भी आर्थिक और सामाजिक प्रगति जरूरी है।उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर बेहतर शासन व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विकास से देश के समग्र विकास को गति मिल सकती है।
2037 तक विकसित बिहार का लक्ष्य
सम्राट चौधरी ने बिहार के विकास को लेकर 2037 को एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2037 में बिहार के गठन के 125 साल पूरे होंगे और इस अवसर तक राज्य को अधिक समृद्ध और विकसित बनाने की दिशा में काम करना होगा।उन्होंने कहा कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी समृद्ध बिहार का सपना देखा था। अब जरूरत है कि राज्य के विकास के लिए लंबी अवधि की योजनाओं पर लगातार काम किया जाए।
विकास के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के विकास के लिए सरकार, स्थानीय निकायों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की भागीदारी जरूरी है। केवल सरकारी योजनाओं से ही विकास संभव नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को इसमें योगदान देना होगा।उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत और स्थानीय संस्थाएं विकास की पहली कड़ी होती हैं। यदि ये संस्थाएं मजबूत होंगी तो राज्य के विकास को भी मजबूती मिलेगी।
स्थानीय शासन को मजबूत करने की आवश्यकता
कार्यक्रम में स्थानीय शासन व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि पंचायत और ग्राम स्तर की संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने से योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव हो सकता है।स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ने से लोगों की समस्याओं का समाधान तेजी से किया जा सकता है।
बिहार के भविष्य को लेकर सरकार का फोकस
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के विकास के लिए नई सोच और बेहतर योजना की जरूरत है। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, उद्योग और आधारभूत संरचना जैसे क्षेत्रों में प्रगति को जरूरी बताया।उन्होंने कहा कि राज्य को आगे बढ़ाने के लिए सभी वर्गों को साथ लेकर चलना होगा और विकास प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।
ग्राम संसद को बनाया जाएगा संवाद का माध्यम
सम्राट चौधरी के अनुसार, ग्राम संसद जैसे मंच सरकार और जनता के बीच संवाद को मजबूत कर सकते हैं। इन मंचों के जरिए स्थानीय समस्याओं और विकास की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।उन्होंने कहा कि बिहार को विकसित बनाने के लिए गांवों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। 2037 तक राज्य को समृद्ध बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब विकास की योजनाओं में आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री का मुख्य संदेश यही रहा कि जमीनी स्तर की संस्थाओं को मजबूत करके ही बड़े विकास लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने ग्राम संसद को लोकतांत्रिक भागीदारी और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
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