पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि राज्य में संसाधनों की कोई कमी नहीं है। बिहार के कई जिलों में खनिज संपदाओं के भंडार मिले हैं, जिनका उपयोग राज्य के विकास और आम जनता के हित में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि खनिज संपदाओं से मिलने वाली रॉयल्टी का इस्तेमाल बिहार में बुनियादी सुविधाओं, विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यों को आगे बढ़ाने में किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने सोमवार को पटना में कोयला एवं खान मंत्रालय की ओर से आयोजित महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी और एनएमईडीटी कार्यशाला के उद्घाटन कार्यक्रम में यह बात कही। इस दौरान उन्होंने कहा कि बिहार में मौजूद खनिज संसाधन राज्य की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

खनिज संपदा से मिलेगा बड़ा राजस्व

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों में खनिज संपदाओं की उपलब्धता सामने आई है। इन संसाधनों के बेहतर उपयोग से बिहार को हर साल लगभग छह से सात हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि यह आय केवल सरकारी खजाने को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका लाभ सीधे तौर पर राज्य की जनता तक पहुंचाया जाएगा। सरकार इस राजस्व का उपयोग विकास कार्यों और जनहित की योजनाओं में करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज संसाधन किसी भी राज्य की आर्थिक मजबूती का आधार बन सकते हैं। बिहार में उपलब्ध इन संसाधनों का वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से उपयोग कर राज्य को विकास की नई दिशा दी जा सकती है।

गया और रोहतास के खनिज ब्लॉक शामिल

कार्यशाला में बिहार के गया और रोहतास जिलों में स्थित तीन खनिज ब्लॉकों समेत देश के कुल 20 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी को लेकर चर्चा की गई।

इन खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से सरकार का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

अधिकारियों ने बताया कि महत्वपूर्ण और सामरिक खनिज देश की आर्थिक और औद्योगिक जरूरतों के लिए बेहद अहम होते हैं। इनका इस्तेमाल ऊर्जा, उद्योग, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में किया जाता है।

बिहार में निवेश के नए अवसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज क्षेत्र के विकास से राज्य में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। खनन गतिविधियों के विस्तार के साथ-साथ इससे जुड़े उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग इस तरह किया जाए जिससे स्थानीय लोगों को फायदा मिले और पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा जाए।

खनिज क्षेत्र में निवेश बढ़ने से आधारभूत संरचना के विकास को भी गति मिल सकती है। सड़क, परिवहन और अन्य सुविधाओं के विस्तार में भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर

कार्यशाला में खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया, तकनीकी पहलुओं और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार का कहना है कि नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जा रहा है ताकि योग्य कंपनियों को अवसर मिल सके और राज्य को अधिकतम लाभ प्राप्त हो।

खनिज संसाधनों के दोहन के दौरान पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना है।

राज्य की अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

बिहार लंबे समय से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाला राज्य रहा है। अब खनिज संसाधनों के विकास से राज्य की अर्थव्यवस्था को नए क्षेत्रों से मजबूती मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है और उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल करके राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि खनिज संपदाओं से मिलने वाली आय का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार और अन्य जरूरी क्षेत्रों में किया जाएगा।

विकास की नई संभावनाएं

खनिज ब्लॉकों की नीलामी और संसाधनों के उपयोग की दिशा में बढ़ते कदम बिहार के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। राज्य सरकार का मानना है कि खनिज क्षेत्र में विकास से न केवल राजस्व बढ़ेगा, बल्कि रोजगार और निवेश के अवसर भी बढ़ेंगे।

गया और रोहतास जैसे जिलों में खनिज संसाधनों के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की संभावना है। सरकार आने वाले समय में इन संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करने की तैयारी कर रही है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भरोसा जताया कि बिहार में उपलब्ध खनिज संपदाएं राज्य के विकास को नई गति देंगी और आने वाले वर्षों में आर्थिक मजबूती का आधार बनेंगी।

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