Bihar : फूली मिश्र के डेरा गांव में कटाव रोधी कार्य धीमा, मानसून के बीच ग्रामीणों की चिंता बढ़ी

Update: 2026-06-22 09:33 GMT

 Bihar बिहार: फूली मिश्र के डेरा गांव के सामने चल रहा कटाव रोधी कार्य इन दिनों स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। मानसून की शुरुआत के बावजूद निर्माण कार्य की धीमी गति को लेकर ग्रामीणों ने चिंता जताई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्य पूरा नहीं हुआ तो क्षेत्र में नदी कटाव का गंभीर खतरा फिर से उत्पन्न हो सकता है।

जानकारी के अनुसार, फूली मिश्र के डेरा के पास लगभग 360 मीटर लंबाई में कटाव रोधी कार्य कराया जाना प्रस्तावित है। इस परियोजना के लिए सरकार द्वारा कुल 3 करोड़ 24 लाख 57 हजार 693 रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। यह कार्य क्षेत्र को नदी के कटाव से बचाने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।

Phuli Mishra dera village के इस इलाके में लंबे समय से नदी कटाव की समस्या बनी हुई है, जिसके कारण हर वर्ष मानसून में ग्रामीणों को भारी नुकसान की आशंका रहती है। इसी कारण इस बार समय पर और मजबूत कटाव रोधी संरचना तैयार करने की योजना बनाई गई थी।

हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी की धीमी कार्यप्रणाली के कारण परियोजना समय पर आगे नहीं बढ़ पा रही है। अभी तक लगभग 100 मीटर लंबा कार्य अधूरा पड़ा हुआ है, जिससे मानसून के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब बारिश तेज होगी, तब अधूरे हिस्से से पानी का दबाव बढ़ सकता है और कटाव का खतरा पहले से अधिक बढ़ जाएगा। इस कारण गांव के लोगों में दहशत का माहौल है और वे जल्द से जल्द कार्य पूरा करने की मांग कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी राशि स्वीकृत होने के बावजूद यदि कार्य समय पर पूरा नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर गांव की सुरक्षा पर पड़ेगा।

वहीं, निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि काम प्रगति पर है, लेकिन कुछ तकनीकी और मौसम संबंधी कारणों से गति प्रभावित हुई है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि शेष कार्य को जल्द पूरा करने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, कटाव रोधी कार्यों में देरी से नदी किनारे बसे गांवों में जोखिम बढ़ जाता है। मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने से कमजोर तटबंध या अधूरी संरचनाएं टूटने का खतरा रहता है, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है।

फिलहाल ग्रामीणों की नजर निर्माण कार्य की प्रगति पर टिकी हुई है। सभी की उम्मीद है कि प्रशासन और निर्माण एजेंसी मिलकर जल्द इस परियोजना को पूरा करेंगे ताकि आने वाले मानसून में किसी भी प्रकार की आपदा से बचा जा सके।

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