सदर अस्पताल में एक सप्ताह से एआरवी खत्म, रोज 150 से 200 मरीज हो रहे परेशान
छपरा। सारण जिले के विभिन्न प्रखंडों से कुत्ता काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने के लिए छपरा सदर अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को इन दिनों निराश होकर लौटना पड़ रहा है। सदर अस्पताल में पिछले करीब एक सप्ताह से एआरवी का स्टॉक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कुत्ता काटने के बाद समय पर वैक्सीन लगवाने की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हो रही है, जो जिले के दूरदराज के प्रखंडों से कई किलोमीटर की यात्रा कर सदर अस्पताल पहुंचते हैं।
मरीजों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने के बाद जब एआरवी उपलब्ध नहीं होने की जानकारी मिलती है तो उनके सामने अचानक दूसरी जगह इलाज कराने की समस्या खड़ी हो जाती है। आने-जाने में खर्च हुए पैसे और समय की बर्बादी अलग होती है। कई मरीज आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। सरकारी अस्पताल में मुफ्त या कम खर्च में वैक्सीन मिलने की उम्मीद में वे सदर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन यहां वैक्सीन नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी अस्पताल या दवा दुकानों का रुख करना पड़ रहा है।
रोज पहुंच रहे 150 से 200 मरीज
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, प्रतिदिन करीब 150 से 200 मरीज कुत्ता काटने के बाद एआरवी लगवाने के लिए सदर अस्पताल पहुंचते हैं। इनमें बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की संख्या भी शामिल है। बड़ी संख्या में मरीज सारण के विभिन्न प्रखंडों से आते हैं। कई मरीजों को अस्पताल पहुंचने के बाद ही पता चलता है कि एआरवी का स्टॉक समाप्त हो चुका है।
कुत्ता काटने के बाद मरीज और उनके परिजन वैक्सीन को लेकर गंभीर रहते हैं। यही वजह है कि घटना के बाद वे जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचने की कोशिश करते हैं। लेकिन अस्पताल में वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है। मरीजों का कहना है कि अगर एआरवी उपलब्ध नहीं है तो इसकी सूचना पहले से सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि दूर के क्षेत्रों से आने वाले लोगों को बेवजह सदर अस्पताल का चक्कर नहीं लगाना पड़े।
दूरदराज के मरीजों की बढ़ी मुश्किल
सारण के विभिन्न प्रखंडों से मरीज सदर अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचते हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों से छपरा आने में मरीजों को घंटों का समय लग जाता है। कुत्ता काटने के बाद परिजन मरीज को लेकर तत्काल अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन यहां एआरवी नहीं मिलने पर उनकी परेशानी बढ़ जाती है।
दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को पहले परिवहन पर खर्च करना पड़ता है। इसके बाद अस्पताल में वैक्सीन नहीं मिलने पर दूसरी जगह जाने के लिए फिर से खर्च करना पड़ता है। इस तरह एक ही मरीज को इलाज के लिए कई स्थानों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से परेशानी वाली है।
निजी अस्पताल में इलाज का बढ़ रहा दबाव
सरकारी अस्पताल में एआरवी उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों के सामने निजी अस्पताल या निजी दवा दुकानों से वैक्सीन लेने का विकल्प रह जाता है। इससे इलाज का खर्च बढ़ जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए अतिरिक्त खर्च करना आसान नहीं है।
मरीजों के परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में एआरवी उपलब्ध रहने से उन्हें काफी राहत मिलती है। कुत्ता काटने के बाद समय पर वैक्सीन लगवाना जरूरी समझते हुए वे सदर अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन स्टॉक नहीं होने के कारण उन्हें निजी स्तर पर वैक्सीन की व्यवस्था करनी पड़ रही है। इससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
सूचना के अभाव में अस्पताल पहुंच रहे मरीज
एआरवी की अनुपलब्धता की जानकारी मरीजों को पहले से नहीं मिल पा रही है। इस वजह से रोज बड़ी संख्या में मरीज सदर अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें पता चलता है कि वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इससे मरीजों और परिजनों में नाराजगी भी देखी जा रही है।
मरीजों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से यदि एआरवी की उपलब्धता के संबंध में नियमित सूचना जारी की जाए तो लोगों को परेशानी से बचाया जा सकता है। प्रखंड स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों को भी इसकी जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है, ताकि वहां से मरीजों को सदर अस्पताल भेजने से पहले स्टॉक की स्थिति बताई जा सके।
एआरवी की नियमित आपूर्ति की मांग
मरीजों और उनके परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग से सदर अस्पताल में एआरवी की जल्द आपूर्ति कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज वैक्सीन के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन का स्टॉक रहना जरूरी है।
लोगों ने मांग की है कि एआरवी की आपूर्ति बाधित नहीं हो और भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार रखी जाए। साथ ही, मरीजों को समय रहते वैक्सीन की उपलब्धता की जानकारी देने की व्यवस्था हो।
सदर अस्पताल में एआरवी की कमी के कारण पिछले एक सप्ताह से मरीजों को हो रही परेशानी ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। प्रतिदिन 150 से 200 मरीजों के पहुंचने के बावजूद वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को वापस लौटना पड़ रहा है। अब मरीजों और उनके परिजनों की नजर स्वास्थ्य विभाग की ओर है कि एआरवी की आपूर्ति कब तक बहाल होती है और उन्हें इस समस्या से कब राहत मिलती है।