पटना: बाइपास थाना क्षेत्र के महादेव स्थान के दक्षिण में टेंट सिटी और सोनम गैस गोदाम के समीप रहने वाले ग्रामीण पिछले करीब एक महीने से जलजमाव की समस्या से जूझ रहे हैं। परमेश्वर नगर और गोकुल नगर जाने वाले रास्ते पर पानी भर जाने से इलाके के दो सौ से अधिक घर प्रभावित हैं। स्थिति यह है कि कई परिवारों के लिए घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शहर के नालों का पानी बहकर इस इलाके में जमा हो गया है, जिससे सड़क और आसपास का पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया है।

लगातार जमा पानी का रंग हरा और काला हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक पानी में गंदगी के साथ जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना हुआ है। सड़क का अधिकांश हिस्सा पानी में डूब जाने के कारण लोगों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। स्थिति से परेशान ग्रामीणों ने सोमवार को विरोध-प्रदर्शन कर प्रशासन और संबंधित विभागों से समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की।

एक महीने से घरों में कैद जैसी स्थिति

ग्रामीणों के अनुसार इलाके में पिछले करीब एक महीने से पानी जमा है। लगातार जलजमाव के कारण कई घरों के आसपास आने-जाने का रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया है। सामान्य दिनों में जिन रास्तों से लोग पैदल या वाहन से आसानी से आवाजाही करते थे, वहां अब पानी भरा हुआ है।

पानी की गहराई और गंदगी के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जरूरी सामान लेने या किसी काम से बाहर निकलने के लिए भी उन्हें पानी से होकर गुजरना पड़ता है।

बारिश रुकने के बाद भी पानी का लंबे समय तक जमा रहना ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।

शहर के नालों का पानी ग्रामीण इलाके में पहुंचने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि शहर के नालों से निकलने वाला गंदा पानी बहकर उनके इलाके में जमा हो रहा है। लंबे समय से पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण जलभराव खत्म नहीं हो पा रहा है।

जमा पानी धीरे-धीरे हरे और काले रंग का हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी से दुर्गंध भी आती है और इसमें कई तरह के जीव-जंतु दिखाई देते हैं। इससे संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि जलजमाव वाले क्षेत्र से गंदे पानी की तत्काल निकासी कराई जाए और भविष्य में दोबारा ऐसी स्थिति न बने इसके लिए स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था विकसित की जाए।

सड़क का नामोनिशान नहीं

जलजमाव की वजह से इलाके की सड़क की स्थिति भी बेहद खराब हो गई है। पानी इतना अधिक जमा है कि कई जगह सड़क दिखाई ही नहीं देती। लोगों को यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि सड़क कहां है और गड्ढे या किनारे कहां हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पानी में पैदल चलना जोखिम भरा है। कई स्थानों पर जमीन की वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं लग पाता। ऐसे में कोई व्यक्ति गहरे हिस्से में गिर सकता है।

वाहनों की आवाजाही भी लगभग ठप जैसी स्थिति में है। इससे स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।

जुगाड़ से बना रहे नाव

आवागमन की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने अपने स्तर पर जुगाड़ का सहारा लिया है। कुछ लोग ट्यूब, बांस और प्लाई की मदद से छोटी नाव जैसी व्यवस्था तैयार कर रहे हैं।

इन्हीं अस्थायी साधनों के जरिए लोग पानी पार करने और जरूरी काम निपटाने का प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई सुरक्षित व्यवस्था नहीं है, लेकिन लंबे समय से जलजमाव के कारण उनके सामने दूसरा विकल्प भी नहीं बचा है।

बच्चों और बुजुर्गों को इस तरह पानी पार कराना विशेष रूप से जोखिम भरा हो सकता है।

जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा

ग्रामीणों ने जमा पानी में जहरीले जीव-जंतुओं के होने की बात भी कही है। लंबे समय से रुके और गंदे पानी के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जीव-जंतुओं के निकलने का खतरा बना हुआ है।

पानी और झाड़ियों के बीच रास्ता साफ दिखाई नहीं देने के कारण ग्रामीणों को हर कदम संभलकर रखना पड़ रहा है। रात के समय स्थिति और अधिक मुश्किल हो जाती है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जलजमाव वाले इलाके में नियमित निगरानी की जाए और खतरनाक जीव-जंतुओं से बचाव के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।

संक्रमण का भी बना खतरा

गंदा और दूषित पानी लंबे समय तक जमा रहने से बीमारी फैलने की आशंका भी बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी में कचरा और गंदगी जमा होने से आसपास का वातावरण प्रभावित हो रहा है।

मच्छरों की संख्या बढ़ने से भी लोगों की परेशानी बढ़ी है। ग्रामीणों को डर है कि यदि जल्द पानी की निकासी नहीं की गई तो मौसमी और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

लोगों ने जलजमाव वाले क्षेत्रों में सफाई, कीटनाशक और दवा का छिड़काव कराने की मांग भी की है।

सोमवार को ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

लगातार परेशानी से नाराज ग्रामीणों ने सोमवार को विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने जलजमाव की समस्या दूर करने और पानी की निकासी की व्यवस्था कराने की मांग उठाई।

ग्रामीणों का कहना है कि वे करीब एक महीने से परेशानी झेल रहे हैं। कई बार समस्या की ओर ध्यान दिलाने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का जायजा लेने और तत्काल राहत कार्य शुरू कराने की मांग की।

रोजमर्रा के काम हुए प्रभावित

जलजमाव का असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ा है। बच्चों की आवाजाही, काम पर जाने वाले लोगों और जरूरी सामान लाने-ले जाने में मुश्किल हो रही है।

बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना या आपात स्थिति में किसी वाहन को घर तक पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर किसी परिवार में रात के समय कोई आपात स्थिति पैदा हो जाए तो उसे पानी से निकालकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना आसान नहीं होगा।

इसी वजह से लोग जल्द से जल्द पानी निकासी की मांग कर रहे हैं।

स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि केवल पानी निकाल देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उनका आरोप है कि शहर के नालों का पानी लगातार इलाके में पहुंचता है। ऐसे में जब तक जल निकासी का उचित रास्ता नहीं बनाया जाएगा, बारिश या नालों का पानी दोबारा जमा होने की आशंका बनी रहेगी।

ग्रामीणों ने नाले की सफाई, जल निकासी की व्यवस्था और सड़क को ऊंचा करने जैसे स्थायी उपाय करने की मांग की है।

फिलहाल परमेश्वर नगर और गोकुल नगर की ओर जाने वाले इस इलाके में दो सौ से अधिक घरों के लोग जलजमाव से परेशान हैं। एक महीने से बनी इस स्थिति ने ग्रामीणों को अपने ही घरों तक सीमित कर दिया है और अब लोग प्रशासन से तत्काल राहत के साथ स्थायी समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।

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