बिहार, जमुई: बरहट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की एंबुलेंस एक बार फिर चर्चा में आ गई है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होने वाली एंबुलेंस में दवाइयों के कार्टन लादे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और मामले की जांच की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार को बरहट पीएचसी परिसर में एक एंबुलेंस में मरीजों की जगह दवाइयों की पेटियां रखी जा रही थीं। इसी दौरान वहां मौजूद एक व्यक्ति ने पूरी घटना को अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं।
वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि एंबुलेंस के अंदर मरीजों के लिए बने स्थान पर दवाइयों के कार्टन रखे हुए हैं। स्थानीय व्यक्ति ने जब एंबुलेंस चालक से इस बारे में सवाल किया तो चालक ने बताया कि दवाइयां स्वास्थ्य प्रबंधक के निर्देश पर रखी जा रही हैं। जब उससे लिखित आदेश के बारे में पूछा गया तो चालक ने कहा कि उन्हें इसके लिए कोई पत्र नहीं दिया गया है और मौखिक निर्देश पर ही दवाइयां रखी गई हैं।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एंबुलेंस का मुख्य उद्देश्य गंभीर मरीजों और जरूरतमंद लोगों को समय पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में अगर एंबुलेंस का उपयोग सामान या दवाइयों की ढुलाई में किया जाएगा तो आपातकालीन स्थिति में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
लोगों का कहना है कि कई बार मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पाती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मरीजों के लिए उपलब्ध कराए गए संसाधनों का इस्तेमाल केवल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ही किया जाए। दवाइयों और अन्य सामग्री के परिवहन के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए।
हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले में अलग जानकारी सामने आई है। बताया गया कि स्वास्थ्य शिविर के लिए दवाइयां भेजी जा रही थीं। अधिकांश दवाइयां ई-रिक्शा के माध्यम से भेज दी गई थीं, लेकिन दो-तीन कार्टन बच गए थे। स्वास्थ्य शिविर में जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल के लिए उन दवाइयों को एंबुलेंस में रख दिया गया था।
विभाग का कहना है कि एंबुलेंस का इस्तेमाल किसी व्यावसायिक काम के लिए नहीं किया गया, बल्कि स्वास्थ्य शिविर की जरूरत को देखते हुए कुछ दवा के कार्टन उसमें रखे गए थे। हालांकि, वायरल वीडियो के बाद लोगों के बीच उठे सवालों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी और संसाधनों के सही उपयोग को लेकर बहस छेड़ दी है।
अब देखने वाली बात होगी कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में कोई औपचारिक जांच करता है या नहीं। फिलहाल वायरल वीडियो के कारण बरहट पीएचसी की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो और मरीजों के लिए उपलब्ध एंबुलेंस का इस्तेमाल केवल आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए ही किया जाए।