बिहार : सिवान जिले में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान AK-47 से फायरिंग करते नजर आए पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन के दौरान हथियारों के इस्तेमाल और पुलिसकर्मियों के आचरण को लेकर जांच की गई, जिसके बाद संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है।

मामला उस समय सामने आया जब रविवार को सिवान में छात्रों का विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हो गई, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए थे और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। इसी दौरान पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद बढ़ गया। पुलिस के अनुसार, भीड़ की ओर से पथराव किया गया, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।

भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया।




प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मी AK-47 राइफल के साथ नजर आए, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी हथियार संभालते दिखाई दिए। इसको लेकर सवाल उठने लगे कि भीड़ नियंत्रण के दौरान हथियारों का इस्तेमाल किस परिस्थिति में किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने जांच शुरू की। पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा ने बताया कि जांच के आधार पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को भी नियमों और मानकों के अनुसार ही कार्रवाई करनी चाहिए।

अधिकारियों का कहना है कि पुलिस का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करना और कानून व्यवस्था बनाए रखना था, लेकिन किसी भी स्थिति में तय प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिसकर्मियों की भूमिका की समीक्षा की गई।

छात्रों का यह प्रदर्शन NEET परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारी परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर नाराज थे। उन्होंने केंद्र सरकार से मामले में सख्त कार्रवाई और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएं। विरोध के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए थे।

प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना लोगों का अधिकार है, लेकिन हिंसा, पथराव या सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसी गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की जांच जारी रखी है। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और यदि किसी व्यक्ति की भूमिका हिंसा में पाई जाती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सिवान की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि बड़े जनसमूह वाले प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था किस तरह संतुलित रखी जाए। पुलिस के सामने जहां कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है, वहीं बल प्रयोग और हथियारों के इस्तेमाल को लेकर तय नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है।

पुलिस विभाग की कार्रवाई को इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस तरह की परिस्थितियों से निपटने के लिए पुलिसकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।

फिलहाल सिवान में स्थिति सामान्य बताई जा रही है। प्रशासन और पुलिस अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, छात्र संगठनों की ओर से NEET विवाद को लेकर आगे भी आंदोलन जारी रखने की बात कही जा रही है।

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