असम: पश्चिम बंगाल के वन और पर्यावरण मंत्री मनोज कुमार ओरांव ने मंगलवार, 3 नवंबर को असम के कोकराझार जिले के गेलागुरी गांव का दौरा किया। उन्होंने वहां पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व से आए एक बाघ को सुरक्षित बचाने के प्रयासों का जायजा लिया, जो पिछले लगभग 10 दिनों से इस इलाके में घूम रहा है।
'डुआर्स किंग' (Duar's King) नाम का यह बाघ मंगलवार सुबह कोकराझार शहर से लगभग 10 किमी दूर गेलागुरी गांव में धान के खेत के पास बांस के झुरमुट में छिपा हुआ देखा गया।
यह बाघ लगभग 10 दिन पहले असम-पश्चिम बंगाल सीमा पार करके रायमोना नेशनल पार्क के रास्ते असम में दाखिल हुआ था। सबसे पहले इसे बोरागरी गांव में देखा गया था, जिसके बाद यह ब्वर्सिजहोरा की तरफ गया और फिर गेलागुरी पहुंच गया।
असम और पश्चिम बंगाल के वन अधिकारी बाघ की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं और उसे सुरक्षित बचाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। साथ ही, इंसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव को रोकने और बाघ के रास्ते में आने वाले गांवों के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
अपने दौरे के दौरान, ओरांव ने कहा कि यह बाघ न केवल पश्चिम बंगाल के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि इस बाघ को बिहार से लाकर पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में रखा गया था, जहां इसका नाम 'डुआर्स किंग' रखा गया।
मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार, असम वन विभाग के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि बाघ को सुरक्षित तरीके से बेहोश (tranquilise) किया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस ऑपरेशन के दौरान उसे कोई चोट न लगे।
ओरांव ने कहा, "हमें उम्मीद है कि जल्द ही बाघ को सुरक्षित तरीके से बेहोश कर लिया जाएगा।"
वन अधिकारी बाघ को पकड़ने और उसे किसी उपयुक्त जगह पर भेजने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। यह पूरा ऑपरेशन इस तरह से चलाया जा रहा है कि बाघ और आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों, दोनों की सुरक्षा बनी रहे।