असम: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 3 नवंबर को कॉलेज के दो दोस्तों की सफलता का जिक्र किया, जिन्होंने बिना कोई रिश्वत दिए या किसी की सिफारिश का सहारा लिए, अपनी योग्यता (मेरिट) के दम पर सरकारी नौकरी हासिल की।
'X' (ट्विटर) पर एक पोस्ट में, सरमा ने विकास डोलोई और दीपज्योति तालुकदार की कहानी साझा की, जिन्होंने कॉलेज के दिनों में एक साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की थी।
जहां डोलोई असम वन सुरक्षा बल (Assam Forest Protection Force) में शामिल हुए हैं, वहीं तालुकदार अब असम पुलिस कमांडो बटालियन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
उनकी इस उपलब्धि की तारीफ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "मुझे इस बात से बहुत गर्व होता है कि असम के युवा पैसे या सिफारिश के बजाय अपनी योग्यता के दम पर अपना भविष्य बना रहे हैं।"
उन्होंने बताया कि दोनों उम्मीदवारों को बिना एक भी रुपया रिश्वत दिए नौकरी मिली। उन्होंने इस सफलता का श्रेय भर्ती की उस पारदर्शी प्रक्रिया को दिया, जिसमें "सिर्फ कड़ी मेहनत ही मायने रखती है"।
सरमा ने यह भी बताया कि ये दोनों युवा अपनी मौजूदा कामयाबी पर ही नहीं रुक रहे हैं, बल्कि उन्होंने असम लोक सेवा आयोग (APSC) की परीक्षाओं की तैयारी भी शुरू कर दी है।
उन्होंने कहा, "ऐसी और भी कई कहानियां सामने आने वाली हैं। दोनों को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं!"
मुख्यमंत्री की इस पोस्ट से यह पता चलता है कि असम में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को अवसर दिलाने में योग्यता-आधारित (मेरिट-बेस्ड) भर्ती प्रक्रिया कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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