असम: कामरूप (M) की स्पेशल फास्ट ट्रैक सेशन कोर्ट ने असम CID को निर्देश दिया है कि वह इस बात की जांच करे कि ज़ुबीन गर्ग की मौत के मामले में गवाह प्रतीम लाहकर का BNSS की धारा 183 के तहत दिया गया बयान दो मीडिया प्लेटफॉर्म को कैसे मिला और उन्होंने उसे कैसे पब्लिश किया।
यह निर्देश जज शर्मिला भुइयां ने 11 सितंबर को तब जारी किया, जब ज़ुबीन गर्ग की पत्नी गरिमा गर्ग सैकिया के वकील ने कोर्ट का ध्यान दो सोशल मीडिया पोस्ट की ओर दिलाया। इन पोस्ट में कथित तौर पर मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज लाहकर के बयान की बातें थीं।
कोर्ट के आदेश के अनुसार, ये पोस्ट दो लोकल मीडिया आउटलेट्स के फेसबुक पेज पर दिखाई दिए थे।
इन पोस्ट में कथित तौर पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के तहत लाहकर के बयान का विवरण और उस मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर और मुहर वाली कॉपी भी शामिल थी, जिन्होंने बयान दर्ज किया था।
ट्रायल में PW-118 के तौर पर दर्ज लाहकर से कोर्ट में जिरह (cross-examination) हो रही थी, तभी यह मामला जज के ध्यान में लाया गया। आरोपी सिद्धार्थ शर्मा द्वारा उनसे जिरह पूरी हो चुकी थी, जबकि समय की कमी के कारण दूसरे आरोपी द्वारा जिरह टाल दी गई थी।
आदेश के अनुसार, स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ज़ेड कमर ने कहा कि इस पब्लिकेशन से न्याय प्रक्रिया में दखल पड़ने की आशंका है और इसे तुरंत रोकने की ज़रूरत है।
दोनों पोस्ट के प्रिंटआउट की जांच करने और पीड़ित के वकील के मोबाइल फोन पर उन्हें देखने के बाद, कोर्ट ने पाया कि दोनों मीडिया प्लेटफॉर्म का व्यवहार पहली नज़र में न्याय प्रक्रिया में सीधे दखल देने जैसा लग रहा था।
इसके बाद कोर्ट ने असम CID को निर्देश दिया कि वह इस बात की जांच करे कि मीडिया प्लेटफॉर्म को लाहकर के बयान की कॉपी कैसे मिली और उन्होंने इसे अपने-अपने प्लेटफॉर्म पर कैसे पब्लिश किया।
CID को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह विस्तृत रिपोर्ट सौंपे और कानून के अनुसार ज़रूरी कार्रवाई करे। दोनों पोस्ट के स्क्रीनशॉट की कॉपी रिकॉर्ड में रखने का आदेश दिया गया है।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि ज़रूरी कार्रवाई के लिए जल्द से जल्द स्पेशल DGP, CID, असम को आदेश की एक कॉपी दी जाए। इस बीच, कोर्ट ने जेलों के इंस्पेक्टर जनरल को बक्सा ज़िला जेल के सुपरिटेंडेंट के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। यह कार्रवाई आरोपी श्यामकानू महंता के हस्ताक्षर वाले उन दस्तावेज़ों के संबंध में की जानी है, जिनके बारे में कोर्ट का कहना है कि वे कोर्ट द्वारा भेजे गए दस्तावेज़ नहीं थे।
सभी सात आरोपियों — सिद्धार्थ शर्मा, श्यामकानू महंता, शेखर ज्योति गोस्वामी, अमृतप्रवा महंता, संदीपोन गर्ग, नदेश्वर बोराह और परेश बैश्य — को 14 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अगली सुनवाई 14 सितंबर को तय की गई है, जिसमें PW-118 से और पूछताछ, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए आरोपियों को पेश करना और याचिका संख्या 66/2026 पर आपत्तियां दाखिल करना शामिल होगा।
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