Amit Shah: 2027 तक पूर्वोत्तर के ज्यादातर हिस्सों से AFSPA हटने की संभावना
Guwahati गुवाहाटी: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि अगले साल तक पूर्वोत्तर के ज़्यादातर हिस्सों से आर्म्ड फोर्सेज़ (स्पेशल पावर्स) एक्ट (AFSPA) हटा लिया जाएगा और यह कानून सिर्फ़ एक या दो राज्यों में ही लागू रहेगा।
विवादित सीमावर्ती इलाके में मिनरल ऑयल की खोज के लिए केंद्र और असम व नागालैंड की सरकारों के बीच हुए तीन-पक्षीय समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर के बाद शाह ने कहा कि इसे हटाने का प्रस्ताव इस क्षेत्र में बेहतर होती शांति और स्थिरता को दिखाता है।
उन्होंने कहा, "मुझे भरोसा है कि एक या दो राज्यों को छोड़कर, हम अगले साल पूरे पूर्वोत्तर से AFSPA हटा लेंगे।"
इस समझौते से असम-नागालैंड सीमा पर विवादित क्षेत्र (DAB) में तेल और खनिजों की खोज का काम फिर से शुरू होने की उम्मीद है, जहाँ सीमा विवाद और सुरक्षा चिंताओं के कारण ऐसी गतिविधियाँ तीन दशकों से ज़्यादा समय से रुकी हुई थीं।
शाह ने इस MoU को क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों की क्षमता का इस्तेमाल करने की दिशा में एक अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में तेल, प्राकृतिक गैस और खनिजों का भारी भंडार है, जिनकी खोज लंबे समय से कानून-व्यवस्था की चुनौतियों के कारण नहीं हो पाई थी।
शाह ने कहा, "इससे पूर्वोत्तर में खनिजों की खोज के नए रास्ते खुलेंगे। इस इलाके में न सिर्फ़ तेल और गैस है, बल्कि खनिजों का भी भारी भंडार है, जिनकी खोज कानून-व्यवस्था की समस्याओं के कारण नहीं हो सकी थी।"
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस इलाके से तेल का उत्पादन मौजूदा स्तर (लगभग 1,000-1,500 बैरल प्रति दिन) से काफी बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि क्षेत्र के एक ही फील्ड में 15,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा मूल्य के निकाले जा सकने वाले संसाधन हो सकते हैं।
शाह ने इस विकास को पूर्वोत्तर में शांति की व्यापक प्रक्रिया से जोड़ा और बताया कि 2019 से अब तक 12 शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उनके अनुसार, इस दौरान क्षेत्र में हिंसक घटनाओं में लगभग 80 प्रतिशत की कमी आई है।
उन्होंने कहा कि यह समझौता असम और नागालैंड दोनों में आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में मदद करेगा और साथ ही विवादित सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों पर दोनों राज्यों के बीच सहयोग को मज़बूत करेगा।