असम को हाई-स्पीड रेल की बड़ी सौगात, CM हिमंत बोले- मोदी कहीं नहीं जाएंगे
गुवाहाटी। असम और पूर्वोत्तर भारत के लिए रेलवे कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक बड़ी खबर सामने आई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार, 1 नवंबर 2026 को जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने प्रस्तावित दिल्ली-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को गुवाहाटी तक विस्तारित करने की मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे पूर्वोत्तर भारत के विकास और आधुनिक परिवहन सुविधाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए विपक्ष पर राजनीतिक निशाना भी साधा।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस परियोजना से संबंधित जानकारी साझा की। उन्होंने केंद्र सरकार के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए लिखा, "इसीलिए, मोदी कहीं नहीं जाएंगे!" मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हालिया बयान के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। इस तरह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के विस्तार की घोषणा के साथ राजनीतिक बयानबाजी भी चर्चा का विषय बन गई है।
दिल्ली से सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को गुवाहाटी तक बढ़ाने की मंजूरी पूर्वोत्तर भारत के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। गुवाहाटी असम का प्रमुख महानगर होने के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों के लिए व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन का बड़ा केंद्र है। ऐसे में इस शहर को भविष्य के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।
वर्तमान में पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों से दिल्ली और देश के अन्य प्रमुख महानगरों तक रेल यात्रा में लंबा समय लगता है। दूरी और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यात्रियों को कई बार लंबी यात्रा करनी पड़ती है। प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के पूरा होने पर यात्रा के समय में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, परियोजना की अधिकतम गति, कुल लागत, निर्माण अवधि और यात्रा समय से संबंधित विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
इस परियोजना का महत्व केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। यदि हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर निर्धारित योजना के अनुसार विकसित होता है, तो इससे असम सहित पूर्वोत्तर भारत में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। बेहतर रेल संपर्क से व्यापारिक गतिविधियों, पर्यटन, सेवा क्षेत्र और निवेश की संभावनाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
गुवाहाटी को पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। यहां से मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और अन्य राज्यों के लिए सड़क तथा परिवहन संपर्क उपलब्ध हैं। ऐसे में राष्ट्रीय राजधानी से गुवाहाटी तक तेज रेल संपर्क विकसित होने से आसपास के राज्यों के यात्रियों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार असम में बुनियादी ढांचे के विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी पर जोर देते रहे हैं। सड़क, रेल, हवाई संपर्क और औद्योगिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं को राज्य की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का गुवाहाटी तक विस्तार इसी व्यापक विकास प्रक्रिया का हिस्सा बन सकता है।
इस घोषणा के बाद राजनीतिक हलकों में मुख्यमंत्री सरमा की टिप्पणी भी चर्चा में है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए अपने संदेश में लिखा, "इसीलिए, मोदी कहीं नहीं जाएंगे!" इस बयान को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हालिया टिप्पणी से जोड़कर देखा जा रहा है।
दरअसल, एक कार्यक्रम के बाद हुई बातचीत के दौरान एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल्द पद छोड़ने की संभावना नहीं होने की बात कही थी। इसी राजनीतिक संदर्भ में मुख्यमंत्री सरमा की टिप्पणी को विपक्ष के लिए जवाब माना जा रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री के बयान में प्रधानमंत्री के राजनीतिक भविष्य को लेकर समर्थन व्यक्त किया गया है, जबकि रेल परियोजना से संबंधित घोषणा विकास और परिवहन व्यवस्था से जुड़ी है।
असम में हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के विस्तार की योजना आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। विशेष रूप से पर्यटन उद्योग को इससे लाभ मिलने की संभावना है। असम का काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, कामाख्या मंदिर और ब्रह्मपुत्र नदी से जुड़े पर्यटन स्थल देश-विदेश के पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हैं। बेहतर परिवहन सुविधाएं विकसित होने पर इन क्षेत्रों तक पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है।
इसके अलावा गुवाहाटी और आसपास के क्षेत्रों में शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं। तेज और सुविधाजनक रेल संपर्क भविष्य में यात्रियों के लिए एक अतिरिक्त परिवहन विकल्प उपलब्ध करा सकता है। हालांकि, वास्तविक लाभ परियोजना के अंतिम मार्ग, स्टेशनों की स्थिति, किराए और संचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
रेलवे की किसी भी बड़ी हाई-स्पीड परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण, तकनीकी अध्ययन, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण संबंधी प्रक्रियाओं और वित्तीय व्यवस्थाओं जैसे कई चरणों से गुजरना पड़ता है। इसलिए कॉरिडोर के विस्तार की मंजूरी को निर्माण कार्य शुरू होने या सेवा आरंभ होने के बराबर नहीं माना जा सकता। परियोजना की वास्तविक समय-सीमा और कार्यान्वयन से जुड़ी स्थिति आगे आने वाली आधिकारिक घोषणाओं से स्पष्ट होगी।
दिल्ली-सिलीगुड़ी कॉरिडोर को गुवाहाटी तक बढ़ाने की योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सिलीगुड़ी देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र को शेष भारत से जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क केंद्र है। पश्चिम बंगाल में स्थित सिलीगुड़ी के रास्ते पूर्वोत्तर राज्यों के लिए महत्वपूर्ण परिवहन मार्ग गुजरते हैं। ऐसे में प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का विस्तार राष्ट्रीय और क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने में भूमिका निभा सकता है।
फिलहाल मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की घोषणा के बाद परियोजना को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। आने वाले समय में केंद्र सरकार और रेलवे की ओर से इसके मार्ग, लागत, तकनीकी स्वरूप और निर्माण कार्यक्रम से संबंधित विस्तृत जानकारी का इंतजार रहेगा। यदि यह परियोजना सफलतापूर्वक पूरी होती है, तो दिल्ली और पूर्वोत्तर भारत के बीच रेल यात्रा की तस्वीर बदल सकती है।