डूमडूमा: गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को अगरवुड (agarwood) चिप्स और अगरवुड तेल के लिए एक अधिकृत निर्यात केंद्र (export point) के रूप में मंजूरी दे दी गई है। इससे असम के निर्यातक अब इस हवाई अड्डे के जरिए इन उत्पादों को भेज सकेंगे।
इस मंजूरी से राज्य में अगरवुड की खेती करने वाले किसानों, उत्पादकों, प्रसंस्करणकर्ताओं और निर्यातकों के लिए परिवहन और निर्यात की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है।
भारत के कुल अगरवुड संसाधनों का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा असम में है, जहाँ अनुमानित 12 करोड़ पेड़ हैं। राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह उद्योग लगभग 50,000 किसानों और श्रमिकों की आजीविका का साधन है।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को 'X' (ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए इस फैसले की घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह मंजूरी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुरोध पर दी गई है। यह इस विशेष उत्पाद से जुड़े किसानों, उत्पादकों और निर्यातकों के लिए एक बड़ी राहत है, जिसका असम एक प्रमुख उत्पादक है। यह न केवल असम के लिए, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर (North East) के लिए लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग है, जिससे संभावित बाजार अब और करीब आ जाएंगे।
असम और पूरे पूर्वोत्तर के हमारे भाइयों-बहनों को बहुत-बहुत बधाई।"
अगरवुड मुख्य रूप से 'एक्विलारिया मैलाकेन्सिस' (Aquilaria malaccensis) के पेड़ों से प्राप्त होता है। पेड़ के अंदर किसी जैविक क्षति या फंगल संक्रमण के कारण एक सुगंधित रेजिन (resin) बनता है, जिससे गहरे रंग की, रेजिन से भरपूर लकड़ी तैयार होती है। इसकी चिप्स का इस्तेमाल अगरबत्ती या धूप के रूप में किया जाता है, जबकि अगरवुड तेल का उपयोग इत्र, सौंदर्य प्रसाधन (cosmetics) और सुगंधित उत्पादों में किया जाता है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के संशोधित निर्यात ढांचे के तहत, जनवरी 2025 में जारी एक अधिसूचना के माध्यम से असम को कृत्रिम रूप से उगाए गए स्रोतों से 1,19,400 किलोग्राम अगरवुड (agarwood) चिप्स और पाउडर, तथा 5,560 किलोग्राम अगरवुड तेल का वार्षिक कोटा आवंटित किया गया।
असम ने 26 अक्टूबर को दुबई निर्यात के लिए 123 किलोग्राम अगरवुड चिप्स की एक खेप भेजी।
अगरवुड के लिए केंद्र की 'एक जिला, एक उत्पाद' (One District One Product) पहल में गोलाघाट जिले को भी शामिल किया गया है।
अगरवुड के निर्यात के लिए कुछ कानूनी आवश्यकताओं का पालन करना जरूरी है। इनमें 'कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एंडेंजर्ड स्पीशीज ऑफ वाइल्ड फौना एंड फ्लोरा' (CITES) के तहत परमिट लेना, और ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत करना शामिल है जो यह प्रमाणित करें कि ये उत्पाद कानूनी रूप से लगाए गए पौधों (प्लांटेशन) से प्राप्त हुए हैं।
गुवाहाटी हवाई अड्डे को निर्यात केंद्र के रूप में मंजूरी मिलने से निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक अगरवुड उत्पादों को भेजने के लिए एक अतिरिक्त मार्ग मिल सकेगा।
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