असम

असम के राज्यपाल का बड़ा संदेश, शिक्षा और उद्योग को साथ लाने पर जोर

Ratna Netam
31 Oct 2026 9:05 PM IST
असम के राज्यपाल का बड़ा संदेश, शिक्षा और उद्योग को साथ लाने पर जोर
x
नागांव। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने शनिवार, 31 अक्टूबर को नागांव विश्वविद्यालय में आयोजित पहली राष्ट्रीय उद्योग-अकादमिक बैठक के समापन सत्र में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालयों और औद्योगिक संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे उद्योगों की वास्तविक जरूरतों, तकनीकी विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने युवाओं को कौशल विकास, नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि देश में तेजी से बदलते औद्योगिक परिवेश के अनुरूप उच्च शिक्षण संस्थानों को अपनी शिक्षा प्रणाली में बदलाव करने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालयों में होने वाले अनुसंधान का उपयोग उद्योगों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए किया जाना चाहिए। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी मिल सकेंगे।
लोक भवन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, राज्यपाल ने कहा कि उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग से व्यावहारिक प्रशिक्षण, संयुक्त अनुसंधान और रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने विश्वविद्यालयों से अपने पाठ्यक्रमों को समय की मांग के अनुसार तैयार करने तथा विद्यार्थियों को उद्योगों में काम करने के लिए आवश्यक कौशल उपलब्ध कराने का आग्रह किया।राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में हो रहे बदलाव भविष्य के रोजगार बाजार को प्रभावित करेंगे। ऐसे में उच्च शिक्षण संस्थानों को नई तकनीकों के अनुरूप पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्राप्त करने के उद्देश्य से शिक्षा नहीं लेनी चाहिए, बल्कि उन्हें अपने ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग करना भी सीखना होगा।
उन्होंने उद्योगों और विश्वविद्यालयों के बीच इंटर्नशिप, औद्योगिक प्रशिक्षण, संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं और स्टार्टअप गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। राज्यपाल के अनुसार, इस प्रकार की पहल से विद्यार्थियों को वास्तविक कार्यस्थलों का अनुभव मिलेगा और उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा।अपने संबोधन में राज्यपाल ने असम में विकसित हो रही औद्योगिक परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने जागीरोड में सेमीकंडक्टर संयंत्र, धुबरी में ताप विद्युत परियोजना और नामरूप में अमोनिया-यूरिया उर्वरक संयंत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।उन्होंने असम एडवांटेज 2.0 पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में निवेश और औद्योगिक विकास की संभावनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे समय में विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को उभरते उद्योगों की जरूरतों के अनुसार तैयार करें। इसके लिए तकनीकी दक्षता, व्यावहारिक ज्ञान और उद्यमशीलता को शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि असम की अर्थव्यवस्था में कृषि, चाय उद्योग, हस्तशिल्प, कुटीर उद्योग, डेयरी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इन पारंपरिक क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार का उपयोग करके उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है। इससे स्थानीय उद्यमों को मजबूती मिलेगी और नए बाजारों तक उनकी पहुंच विकसित हो सकेगी।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को स्थानीय आर्थिक गतिविधियों और सामाजिक आवश्यकताओं से जुड़े अनुसंधान को प्राथमिकता देनी चाहिए। यदि वैज्ञानिक तकनीकों को कृषि और ग्रामीण उद्योगों के साथ जोड़ा जाए तो इससे उत्पादकता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है।राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प का भी उल्लेख किया। उन्होंने मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और कौशल विकास जैसी पहलों को विनिर्माण, नवाचार और रोजगार सृजन से जोड़ते हुए इनके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में औद्योगिक विकास के लिए की जा रही पहलों की सराहना भी की।
कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि बदलते समय में निरंतर सीखने की आदत विकसित करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से विज्ञान, तकनीक, अनुसंधान, उद्योग और उद्यमिता के क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को विकसित करने का आह्वान किया।राज्यपाल ने विद्यार्थियों को नवाचार के माध्यम से नई समस्याओं के समाधान तलाशने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की प्रतिभा और तकनीकी दक्षता राज्य के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। शिक्षण संस्थानों को भी विद्यार्थियों के भीतर रचनात्मक सोच और व्यावहारिक कौशल विकसित करने के लिए उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए।नागांव विश्वविद्यालय असम के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल है। इसकी स्थापना ऐतिहासिक नगांव कॉलेज को विश्वविद्यालय के रूप में उन्नत करके की गई थी। वर्ष 1944 में स्थापित नगांव कॉलेज को 2023 के अधिनियम के माध्यम से विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया। संस्थान वर्तमान में उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रहा है।
पहली राष्ट्रीय उद्योग-अकादमिक बैठक का आयोजन शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत के बीच संवाद तथा सहयोग की संभावनाओं को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस प्रकार के आयोजनों से विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और उद्योग प्रतिनिधियों को एक मंच पर आने का अवसर मिलता है। साथ ही रोजगारपरक शिक्षा और औद्योगिक जरूरतों के बीच मौजूद अंतर को कम करने के उपायों पर चर्चा की जा सकती है।कार्यक्रम में नागांव-बटद्रवा के विधायक रूपक शर्मा, नागांव के जिला आयुक्त अरण्यक सैकिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वी.वी. राकेश रेड्डी, नागांव विश्वविद्यालय के कुलपति हितेश डेका और प्रभारी कुलसचिव नबा प्रसाद नाथ सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।समापन सत्र में राज्यपाल ने उद्योग और शिक्षा जगत के बीच निरंतर संवाद बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि असम के युवा अपनी प्रतिभा, मेहनत और नवाचार के माध्यम से राज्य के औद्योगिक विकास को नई दिशा दे सकते हैं। उनका संदेश था कि शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग के बीच मजबूत तालमेल से युवाओं के लिए नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं और राज्य की आर्थिक प्रगति को गति दी जा सकती है।
Next Story