टैनिंग से बचाव के बावजूद असर क्यों नहीं दिखता? डॉक्टर से समझें वजह

रोजाना सनस्क्रीन लगाने के बावजूद उनकी स्किन टैन क्यों हो जाती है

Update: 2026-06-10 08:52 GMT

Lifestyle लाइफ स्टाइल :  बहुत से लोग इस बात से परेशान रहते हैं कि रोजाना सनस्क्रीन लगाने के बावजूद उनकी त्वचा टैन हो जाती है। आमतौर पर लोग यह मान लेते हैं कि सनस्क्रीन धूप से पूरी तरह बचाने वाला एक ‘कवच’ है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसका काम इससे थोड़ा अलग है। डर्मेटोलॉजिस्ट बताते हैं कि सनस्क्रीन त्वचा को पूरी तरह धूप से रोकता नहीं है, बल्कि यह यूवी किरणों के असर को कम करता है।

त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार टैनिंग मुख्य रूप से सूर्य की अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों के कारण होती है, जो त्वचा में मेलानिन नामक पिगमेंट के उत्पादन को बढ़ाती हैं। मेलानिन जितना अधिक बनता है, त्वचा उतनी ही गहरी दिखने लगती है। सनस्क्रीन इस प्रक्रिया को पूरी तरह रोक नहीं पाता, बल्कि इसे धीमा करता है।

डॉक्टरों का कहना है कि इसका एक बड़ा कारण सनस्क्रीन का गलत तरीके से इस्तेमाल भी है। अक्सर लोग पर्याप्त मात्रा में सनस्क्रीन नहीं लगाते या इसे सही समय पर दोबारा अप्लाई नहीं करते। विशेषज्ञों के अनुसार, सनस्क्रीन को बाहर निकलने से कम से कम 15–20 मिनट पहले लगाना चाहिए और हर 2–3 घंटे में दोबारा लगाना जरूरी होता है, खासकर जब आप धूप में ज्यादा समय बिता रहे हों।

इसके अलावा, कई लोग केवल SPF नंबर देखकर ही सनस्क्रीन चुन लेते हैं। लेकिन SPF केवल UVB किरणों से सुरक्षा देता है, जबकि UVA किरणें भी टैनिंग और स्किन एजिंग का कारण बनती हैं। इसलिए ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का उपयोग करना जरूरी माना जाता है, जो दोनों प्रकार की किरणों से सुरक्षा प्रदान करता है।

डर्मेटोलॉजिस्ट यह भी बताते हैं कि पानी, पसीना और धूल के कारण सनस्क्रीन की परत जल्दी कमजोर हो जाती है, जिससे इसका प्रभाव कम हो जाता है। तैराकी, भारी पसीना या लंबे समय तक धूप में रहने से सनस्क्रीन बार-बार हट सकता है, इसलिए इसे नियमित रूप से दोबारा लगाना आवश्यक है।

एक और महत्वपूर्ण कारण यह है कि कुछ लोग सनस्क्रीन को केवल चेहरे पर लगाते हैं और गर्दन, कान या हाथ-पैर जैसी खुली जगहों को नजरअंदाज कर देते हैं। ये हिस्से भी उतनी ही आसानी से टैन हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सनस्क्रीन पूरी तरह टैनिंग को रोकने का उपाय नहीं है, बल्कि यह एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है जो त्वचा को नुकसान से बचाता है। इसलिए इसके साथ-साथ टोपी पहनना, धूप से बचना और छाया में रहना भी जरूरी है।

अंत में डॉक्टरों की सलाह है कि सही मात्रा में और सही तरीके से सनस्क्रीन का इस्तेमाल किया जाए, तभी इसका पूरा फायदा मिल सकता है। गलत उपयोग के कारण ही अक्सर लोग टैनिंग जैसी समस्याओं का सामना करते हैं, जबकि उन्हें लगता है कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं।

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