Heart Attack के बाद पहले 90 दिन होते हैं बेहद अहम – ऐसे रखें अपना खास ख्याल

Update: 2025-09-27 16:41 GMT
Lifestyle,लाइफस्टाइल : हार्ट अटैक किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे कठिन मोड़ हो सकता है। लेकिन इससे उबरना असंभव नहीं है—बशर्ते सही देखभाल और जीवनशैली में सुधार किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि हार्ट अटैक के बाद के शुरुआती 90 दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि यही समय होता है जब शरीर और दिल धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटने की प्रक्रिया शुरू करता है।
इस दौरान की गई लापरवाही आगे चलकर बड़ी स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बन सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि मरीज इस समय को सतर्कता और अनुशासन के साथ बिताएं।
पहले 90 दिन: क्यों हैं इतने अहम?
एम्स, दिल्ली के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजय मेहरा के अनुसार, “हार्ट अटैक के बाद पहले तीन महीने दिल को दोबारा स्थिर करने, मांसपेशियों की मरम्मत और धमनियों को मजबूत करने का समय होता है। इस दौरान मरीज को न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी खुद को तैयार करना होता है।”
1. दवाओं में कोई लापरवाही न करें
हार्ट अटैक के बाद डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाएं जैसे कि ब्लड थिनर, बीटा-ब्लॉकर, स्टैटिन्स आदि नियमित रूप से लेनी चाहिए। ये दवाएं दोबारा अटैक की संभावना को कम करती हैं और रक्त प्रवाह को सामान्य बनाए रखती हैं। किसी भी दवा को बिना परामर्श के बंद करना जानलेवा हो सकता है।
2. जीवनशैली में करें बदलाव
धूम्रपान और शराब का परित्याग करें – ये दोनों हार्ट की रिकवरी में बाधा डालते हैं।
स्वस्थ भोजन लें – कम वसा, कम नमक और उच्च फाइबर युक्त आहार लेना चाहिए।
नींद पूरी करें – रोज़ाना कम से कम 7-8 घंटे की नींद लेना जरूरी है।
3. धीरे-धीरे शुरू करें शारीरिक गतिविधि
पहले 10-15 दिनों में शरीर को पूरी तरह आराम देना चाहिए। इसके बाद डॉक्टर की सलाह पर हल्की वॉक, स्ट्रेचिंग और सांस की एक्सरसाइज शुरू की जा सकती है। कार्डियक रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम इसमें बहुत सहायक होता है।
4. मानसिक स्वास्थ्य का भी रखें ख्याल
हार्ट अटैक के बाद कई मरीजों में चिंता, तनाव और अवसाद जैसी समस्याएं देखी जाती हैं। इस दौरान परिवार का सहयोग और मनोवैज्ञानिक परामर्श बहुत जरूरी होता है। योग, ध्यान और सकारात्मक सोच से भावनात्मक संतुलन बनाए रखा जा सकता है।
5. नियमित जांच कराना न भूलें
हार्ट अटैक के बाद नियमित रूप से ईसीजी, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर की जांच कराते रहना चाहिए। किसी भी तरह की असामान्यता तुरंत डॉक्टर को बताएं।
6. डॉक्टर से संपर्क बनाए रखें
कई बार मरीज को लगता है कि वह अब ठीक है और डॉक्टर से फॉलोअप बंद कर देते हैं। यह एक बड़ी भूल हो सकती है। हर 15 दिन या महीने में कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह लेते रहना आवश्यक है, ताकि रिकवरी की निगरानी की जा सके।
निष्कर्ष: जीवन का दूसरा मौका
हार्ट अटैक के बाद का जीवन एक दूसरा मौका होता है – एक नई शुरुआत। पहले 90 दिन अगर सावधानी से बिताए जाएं, तो मरीज न केवल सामान्य जीवन जी सकता है बल्कि भविष्य के खतरों से भी बच सकता है। जरूरी है संयम, जागरूकता और आत्मनियंत्रण। दिल के लिए सही फैसले आज ही लें, ताकि कल सेहतमंद और सुरक्षित हो।
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