त्योहार से पहले मिठाई पर महंगाई की मार ओडिशा में बढ़े छेना चीनी के भाव
चीनी महंगी होने से बिगड़ा बजट
भुवनेश्वर : रक्षाबंधन से पहले ओडिशा में मिठाई खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों को महंगाई का झटका लग सकता है। त्योहार से पहले मिठाइयों की मांग बढ़ने के बीच छेना और चीनी जैसी प्रमुख सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी ने मिठाई कारोबारियों की लागत बढ़ा दी है। इसका असर अब बाजार में बिकने वाली कई लोकप्रिय मिठाइयों के दाम पर दिखाई देने लगा है।
रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का खास त्योहार है और इस मौके पर मिठाई का विशेष महत्व रहता है। बहनें भाई को राखी बांधने के बाद मिठाई खिलाती हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग अपने रिश्तेदारों और परिचितों को मिठाई के डिब्बे उपहार में देते हैं। ऐसे में त्योहार से पहले मिठाइयों की बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है।
ओडिशा की मिठाई परंपरा में छेना का खास स्थान है। छेना पोड़ा, रसगुल्ला और छेना से तैयार होने वाली कई दूसरी मिठाइयां लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इन मिठाइयों के उत्पादन में छेना और चीनी मुख्य सामग्री होती हैं। ऐसे में दोनों की कीमत बढ़ने का सीधा असर मिठाई बनाने की लागत पर पड़ता है।
मिठाई कारोबारियों के सामने चुनौती यह है कि कच्चे माल के दाम बढ़ने के बावजूद त्योहार के दौरान ग्राहकों को उचित कीमत पर मिठाई उपलब्ध करानी होती है। दूध और उससे बनने वाले उत्पादों के साथ चीनी की कीमत में बढ़ोतरी होने पर दुकानदारों के पास या तो अपने लाभ का हिस्सा कम करने या मिठाइयों के दाम बढ़ाने का विकल्प बचता है।
रक्षाबंधन के कारण बाजार में पहले से ही चहल-पहल बढ़ने लगी है। मिठाई दुकानों पर अलग-अलग तरह के गिफ्ट पैक तैयार किए जा रहे हैं। पारंपरिक मिठाइयों के अलावा ड्राई फ्रूट्स और दूसरी प्रीमियम मिठाइयों के आकर्षक पैक भी दुकानों में सजाए जा रहे हैं। हालांकि कीमत बढ़ने से ग्राहक खरीदारी की मात्रा को लेकर अधिक सतर्क हो सकते हैं।
छेना से बनने वाली मिठाइयों पर कीमतों में बदलाव का असर ज्यादा दिखाई दे सकता है। ओडिशा में छेना आधारित मिठाइयों की बड़ी मांग रहती है। त्योहार के दौरान उत्पादन बढ़ने से छेना की जरूरत भी बढ़ जाती है। ऐसे समय में इसकी कीमत बढ़ने से दुकानदारों की उत्पादन लागत और बढ़ जाती है।
चीनी की कीमत भी मिठाई कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है। अधिकांश पारंपरिक मिठाइयों में चीनी का इस्तेमाल होता है। एक किलो मिठाई तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के दाम बढ़ने पर बड़े स्तर पर उत्पादन करने वाले कारोबारियों के कुल खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
ग्राहकों के लिए इसका सीधा मतलब त्योहार के बजट पर अतिरिक्त दबाव है। राखी, कपड़े और उपहार खरीदने के साथ मिठाई पर भी परिवारों को खर्च करना पड़ता है। अगर मिठाइयों के दाम बढ़ते हैं तो सीमित बजट में त्योहार की खरीदारी करने वाले परिवारों को अपनी जरूरतों के हिसाब से मात्रा कम करनी पड़ सकती है।
त्योहारी सीजन में मिठाई की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाती है। मांग अचानक बढ़ने के कारण बाजार में मिलावटी या खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों की आशंका को देखते हुए ग्राहकों को विश्वसनीय दुकानों से ही मिठाई खरीदने की सलाह दी जाती है। पैक्ड मिठाई खरीदते समय उसकी निर्माण और उपयोग की तारीख भी देखनी चाहिए।
रक्षाबंधन से पहले बढ़ती मांग कारोबारियों के लिए अच्छी बिक्री का मौका लेकर आती है, लेकिन कच्चे माल की महंगाई उनकी चिंता भी बढ़ा रही है। अब दुकानदारों की कोशिश बढ़ी हुई लागत और ग्राहकों की खरीद क्षमता के बीच संतुलन बनाने की है।
कुल मिलाकर ओडिशा में रक्षाबंधन की तैयारियों के बीच छेना और चीनी की बढ़ती कीमतों ने मिठाई बाजार में महंगाई का स्वाद घोल दिया है। त्योहार नजदीक आने के साथ मिठाइयों की मांग और बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में ग्राहकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि बाजार में कीमतें किस स्तर तक पहुंचती हैं और इसका उनके रक्षाबंधन के बजट पर कितना असर पड़ता है।