लाइफस्टाइल : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना आम समस्या बन गई है। कई बार व्यक्ति चाहकर भी अपने भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाता और बात-बात पर अपना आपा खो देता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित रूप से कुछ आसान योग और प्राणायाम करने से मन को शांत रखने और तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। इन्हीं में से एक है भ्रामरी प्राणायाम, जिसे मानसिक शांति के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है।

भ्रामरी प्राणायाम का नाम भौंरे यानी मधुमक्खी की आवाज से लिया गया है। इस अभ्यास के दौरान सांस छोड़ते समय भौंरे जैसी मधुर ध्वनि निकाली जाती है। माना जाता है कि यह प्रक्रिया मन को स्थिर करने, ध्यान केंद्रित करने और तनाव कम करने में सहायक हो सकती है।
कैसे करें भ्रामरी प्राणायाम?
भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले शांत और साफ जगह पर आरामदायक मुद्रा में बैठ जाएं। आप पद्मासन, सुखासन या किसी भी आरामदायक स्थिति में बैठ सकते हैं।
इसके बाद आंखें बंद करें और शरीर को ढीला छोड़ दें। गहरी सांस अंदर लें। फिर सांस छोड़ते समय हल्की गुनगुनाहट की आवाज निकालें, जैसे भौंरे की आवाज होती है। इस दौरान ध्यान पूरी तरह अपनी सांस और आवाज पर केंद्रित रखें।
शुरुआत में इसे 5 बार किया जा सकता है। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाकर 5 से 10 मिनट तक किया जा सकता है। इसे सुबह के समय करना अधिक लाभकारी माना जाता है।
गुस्सा और तनाव कम करने में मदद
जब व्यक्ति तनाव में होता है तो दिमाग लगातार सक्रिय रहता है। भ्रामरी प्राणायाम के दौरान निकलने वाली कंपन वाली ध्वनि मन को शांत करने में मदद कर सकती है। नियमित अभ्यास से व्यक्ति अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना सीख सकता है।
गुस्से की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय मन को शांत रखने की आदत विकसित हो सकती है। हालांकि किसी भी मानसिक समस्या या गंभीर तनाव की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
एकाग्रता बढ़ाने में सहायक
भ्रामरी प्राणायाम ध्यान लगाने की क्षमता को बेहतर करने में मदद कर सकता है। विद्यार्थियों और ऐसे लोगों के लिए यह उपयोगी हो सकता है जिन्हें काम के दौरान ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है।
इस अभ्यास में सांस और ध्वनि पर ध्यान लगाने से मन भटकाव कम महसूस कर सकता है और मानसिक स्थिरता बढ़ सकती है।
नींद में भी हो सकता है फायदा
कई लोगों को तनाव और ज्यादा सोचने के कारण नींद से जुड़ी परेशानियां होती हैं। सोने से पहले कुछ देर शांत तरीके से भ्रामरी प्राणायाम करने से मन को आराम मिलने में मदद मिल सकती है।
रोजाना 5 मिनट का अभ्यास जरूरी
भ्रामरी प्राणायाम का फायदा नियमित अभ्यास से ही मिलता है। इसे कभी-कभार करने के बजाय रोजाना कुछ मिनट निकालकर करना बेहतर माना जाता है। सुबह खाली पेट या शाम के शांत समय में इसका अभ्यास किया जा सकता है।
हालांकि योग और प्राणायाम हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग प्रभाव डाल सकते हैं। सांस से जुड़ी गंभीर समस्या, चक्कर आने या किसी अन्य स्वास्थ्य परेशानी की स्थिति में इसे करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।
भ्रामरी प्राणायाम कोई जादुई इलाज नहीं है, लेकिन यह तनावपूर्ण जीवनशैली में मन को शांत रखने की एक सरल योग तकनीक हो सकती है। रोजाना केवल 5 मिनट का अभ्यास व्यक्ति को अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है।
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