गैस्ट्रोलॉजिस्ट ने बताया उबला या कच्चा अंडा किसमें होता है ज्यादा पोषक तत्व
Lifestyle लाइफस्टाइल : अंडा दुनिया भर में सबसे लोकप्रिय और पोषक खाद्य पदार्थों में शामिल है। इसे प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है और यही कारण है कि जिम जाने वाले लोगों से लेकर बच्चों और बुजुर्गों तक के भोजन में अंडे को शामिल किया जाता है। लेकिन अंडा खाने को लेकर एक सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है कि इसे कच्चा खाना ज्यादा फायदेमंद है या उबालकर। कई लोग मानते हैं कि कच्चा अंडा खाने से ज्यादा प्रोटीन मिलता है, जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ अच्छी तरह पका हुआ या उबला अंडा खाने को बेहतर विकल्प बताते हैं।
पोषण की बात करें तो कच्चे और उबले दोनों अंडों में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल और हेल्दी फैट मौजूद होते हैं। एक सामान्य बड़े अंडे में लगभग 6 से 7 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। इसके अलावा अंडे में विटामिन बी12, विटामिन डी, विटामिन ए, राइबोफ्लेविन, सेलेनियम, फॉस्फोरस और कोलीन जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि अंडे को पकाने के बाद शरीर इसके प्रोटीन का उपयोग अधिक प्रभावी तरीके से कर सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि किसी खाद्य पदार्थ में कितना प्रोटीन मौजूद है। यह भी महत्वपूर्ण है कि शरीर उस प्रोटीन को कितनी अच्छी तरह पचा और अवशोषित कर पाता है। अंडे को पकाने पर उसके प्रोटीन की संरचना में बदलाव आता है, जिसे डिनैचुरेशन कहा जाता है। इससे पाचन तंत्र के एंजाइमों के लिए प्रोटीन को तोड़ना आसान हो जाता है। यही वजह है कि पके हुए अंडे का प्रोटीन शरीर के लिए ज्यादा आसानी से उपलब्ध हो सकता है।
कच्चा अंडा खाने से प्रोटीन की मात्रा अचानक ज्यादा नहीं हो जाती। इसके विपरीत शरीर कच्चे अंडे के प्रोटीन का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाता। इसलिए बॉडी बनाने या प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए कच्चे अंडे पीना जरूरी नहीं है। उबला अंडा इस मामले में अधिक व्यावहारिक और सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
कच्चे अंडे से जुड़ी दूसरी बड़ी चिंता बैक्टीरियल संक्रमण की है। कच्चे या अधपके अंडे में साल्मोनेला बैक्टीरिया मौजूद होने का जोखिम हो सकता है। इससे फूड पॉइजनिंग हो सकती है और दस्त, पेट दर्द, बुखार, उल्टी तथा मतली जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए यह संक्रमण अधिक गंभीर हो सकता है। इसलिए इन समूहों को कच्चे या अधपके अंडों से विशेष रूप से बचना चाहिए।
कच्चे अंडे के सफेद हिस्से में एविडिन नामक प्रोटीन भी पाया जाता है। यह बायोटिन यानी विटामिन बी7 से जुड़ सकता है और उसके अवशोषण को कम कर सकता है। कभी-कभार कच्चा अंडा खाने से सामान्य तौर पर बड़ी समस्या होने की संभावना कम होती है, लेकिन लंबे समय तक बड़ी मात्रा में कच्चे अंडे का सफेद हिस्सा लेने की आदत उचित नहीं मानी जाती। अंडे को पकाने पर एविडिन की गतिविधि काफी कम हो जाती है।
अब सवाल है कि क्या उबालने से अंडे के पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं? खाना पकाने की प्रक्रिया कुछ गर्मी-संवेदनशील पोषक तत्वों की मात्रा में मामूली बदलाव कर सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उबला अंडा पोषणहीन हो जाता है। उबालने के बाद भी अंडा उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन, कोलीन, सेलेनियम और कई विटामिनों का अच्छा स्रोत बना रहता है। साथ ही इसे पचाना और सुरक्षित तरीके से खाना आसान होता है।
उबले अंडे का एक और फायदा यह है कि इसमें अलग से तेल या मक्खन डालने की जरूरत नहीं होती। अगर कोई व्यक्ति वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है तो उबला अंडा भोजन में शामिल किया जा सकता है। इसमें मौजूद प्रोटीन लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराने में मदद कर सकता है। हालांकि वजन घटाने के लिए केवल अंडा खाना पर्याप्त नहीं है। पूरे दिन की कैलोरी, संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है।
अंडे की जर्दी को लेकर भी कई तरह की गलतफहमियां हैं। कुछ लोग केवल सफेद हिस्सा खाते हैं और जर्दी पूरी तरह छोड़ देते हैं। अंडे का सफेद हिस्सा प्रोटीन से भरपूर होता है, लेकिन जर्दी में कोलीन, विटामिन ए, डी, बी12 और कई दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं। स्वस्थ व्यक्ति के लिए संतुलित आहार के हिस्से के रूप में पूरा अंडा पोषण का अच्छा स्रोत हो सकता है। जिन लोगों को डॉक्टर ने किसी स्वास्थ्य स्थिति के कारण विशेष आहार की सलाह दी है, उन्हें उसी के अनुसार अंडे की मात्रा तय करनी चाहिए।
अंडा उबालते समय भी इसे अच्छी तरह पकाना महत्वपूर्ण है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें संक्रमण का खतरा अधिक है। अंडे को साफ जगह पर रखें, टूटे हुए अंडों का इस्तेमाल सावधानी से करें और कच्चे अंडे के संपर्क में आए हाथ तथा बर्तनों को अच्छी तरह धोएं। लंबे समय तक कमरे के तापमान पर पड़े अंडे खाने से भी बचना चाहिए।
कुल मिलाकर कच्चे और उबले अंडे में मूल पोषक तत्व काफी हद तक समान होते हैं, लेकिन शरीर द्वारा प्रोटीन के बेहतर इस्तेमाल और खाद्य सुरक्षा के लिहाज से अच्छी तरह पका या उबला अंडा बेहतर विकल्प माना जाता है। इसलिए केवल ज्यादा पोषण मिलने की उम्मीद में कच्चा अंडा पीना जरूरी नहीं है। संतुलित भोजन के साथ सही तरीके से पकाया गया अंडा शरीर को उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन और कई आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध करा सकता है।