लाइफ स्टाइल : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। फिट रहने के लिए कोई डाइट प्लान अपना रहा है तो कोई जिम और एक्सरसाइज का सहारा ले रहा है। कई लोग महंगे हेल्थ सप्लीमेंट और प्रोटीन पाउडर पर भी पैसा खर्च करते हैं। हालांकि, अच्छी सेहत का संबंध केवल इस बात से नहीं है कि आप क्या खाते हैं, बल्कि इस बात से भी है कि आप कब और किस तरीके से भोजन करते हैं। मशहूर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और लिवर विशेषज्ञ डॉ. शिव कुमार सरीन ने खानपान और जीवनशैली को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। उनका कहना है कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन की गुणवत्ता के साथ उसकी टाइमिंग, मात्रा और रोजमर्रा की आदतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
डॉ. सरीन के मुताबिक, शरीर की अपनी एक प्राकृतिक जैविक घड़ी होती है, जो पाचन, मेटाबॉलिज्म और नींद जैसी गतिविधियों को नियंत्रित करने में भूमिका निभाती है। जब हमारी खाने-पीने की आदतें इस प्राकृतिक लय के विपरीत होती हैं, तो इसका असर स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इसलिए नियमित दिनचर्या और संतुलित खानपान को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
खाने की टाइमिंग पर दें विशेष ध्यान
डॉ. सरीन का मानना है कि भोजन करने का समय भी अच्छी सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। देर रात भोजन करने की आदत को उन्होंने शरीर के लिए नुकसानदायक बताया है। उनका सुझाव है कि जहां तक संभव हो, रात का खाना जल्दी खाया जाए और सोने से ठीक पहले भारी भोजन करने से बचा जाए।
उनके अनुसार, रात में देर से खाने की आदत नींद और शरीर की मेटाबॉलिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इससे वजन बढ़ने और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। डॉ. सरीन ने सूरज ढलने से पहले भोजन करने और रात के भोजन तथा अगले दिन के पहले भोजन के बीच लगभग 12 घंटे का अंतर रखने की सलाह दी है।
सुबह के नाश्ते को लेकर भी उन्होंने समय का ध्यान रखने की बात कही है। उनके अनुसार, सूर्योदय के बाद और पिछली बार भोजन करने के कम से कम 12 घंटे बाद नाश्ता करना बेहतर दिनचर्या का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, ऐसे नियम व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, दवाओं और कामकाज के अनुसार बदल सकते हैं।
घर का बना खाना सबसे बेहतर
आजकल बाहर का खाना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। ऑफिस, कॉलेज और अन्य कामों के चलते कई लोग नियमित रूप से फास्ट फूड, पैकेज्ड फूड और जंक फूड का सेवन करते हैं। डॉ. सरीन का मानना है कि इस आदत में बदलाव करना जरूरी है।
उन्होंने घर में बने भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। उनके मुताबिक, हरी सब्जियां, छाछ, सत्तू और पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थ संतुलित खानपान का अच्छा हिस्सा हो सकते हैं। घर में बना ताजा खाना आमतौर पर भोजन की गुणवत्ता और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर बेहतर नियंत्रण देता है।
डॉ. सरीन ने कहा है कि बाहर के भोजन को रोजाना की आदत बनाने के बजाय कभी-कभार ही खाना चाहिए। इसके साथ ही बच्चों के खानपान में अतिरिक्त चीनी को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। कम उम्र से ही बच्चों को संतुलित भोजन और स्वस्थ खानपान की आदत सिखाना भविष्य में उनके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।
जरूरत से ज्यादा खाना भी हो सकता है नुकसानदायक
कई लोग स्वाद के चक्कर में जरूरत से ज्यादा खाना खा लेते हैं। खासकर पार्टियों, शादी समारोहों और बाहर भोजन के दौरान खाने की मात्रा पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो जाता है। डॉ. सरीन के अनुसार, भोजन को जरूरत के मुताबिक खाना चाहिए। पेट को पूरी तरह भरने के बजाय संतुलित मात्रा में भोजन करना बेहतर है।
इस संबंध में छोटी प्लेट का इस्तेमाल भी मददगार हो सकता है। छोटी प्लेट में भोजन लेने से व्यक्ति अनजाने में खाने की मात्रा नियंत्रित कर सकता है। इसके अलावा भोजन को धीरे-धीरे खाना और अच्छी तरह चबाना भी जरूरी है।
जल्दी-जल्दी भोजन निगलने से व्यक्ति को पेट भरने का एहसास होने से पहले ही जरूरत से ज्यादा खाने की संभावना रहती है। इसलिए खाने के दौरान जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। भोजन को आराम से चबाकर खाने से पाचन प्रक्रिया को भी मदद मिलती है।
सप्लीमेंट से ज्यादा जरूरी है अच्छा खानपान
आजकल बाजार में कई प्रकार के हेल्थ सप्लीमेंट उपलब्ध हैं। लोग बेहतर शरीर, मजबूत मांसपेशियों और अच्छी सेहत के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, डॉ. सरीन ने स्पष्ट किया है कि खराब खानपान की भरपाई केवल सप्लीमेंट से नहीं की जा सकती।
उनका कहना है कि सबसे पहले भोजन की गुणवत्ता बेहतर बनानी चाहिए। अगर शरीर को किसी पोषक तत्व की कमी है या डॉक्टर ने किसी विशेष सप्लीमेंट की सलाह दी है, तभी जरूरत के अनुसार उसका इस्तेमाल करना चाहिए। बिना जरूरत और विशेषज्ञ की सलाह के सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है।
उन्होंने अखरोट जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को भी खानपान में शामिल करने की बात कही है। अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड के कुछ प्रकार पाए जाते हैं। इसके अलावा हरी सब्जियों और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को नियमित भोजन का हिस्सा बनाना फायदेमंद हो सकता है।
अच्छी नींद और व्यायाम भी हैं जरूरी
अच्छी सेहत के लिए केवल खानपान सुधारना पर्याप्त नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। लगातार बैठे रहने, शारीरिक मेहनत से बचने और देर रात तक जागने की आदत शरीर के मेटाबॉलिज्म पर बुरा प्रभाव डाल सकती है।
डॉ. सरीन ने रोजाना व्यायाम करने और वजन को नियंत्रित रखने पर जोर दिया है। उनके अनुसार, शरीर को सक्रिय रखने से मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और अतिरिक्त कैलोरी के इस्तेमाल में मदद मिलती है। नियमित शारीरिक गतिविधि फैटी लिवर जैसी समस्याओं के जोखिम को कम करने में भी सहायक हो सकती है।इसके साथ ही रोजाना पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद लेना जरूरी है। नींद की कमी भूख, वजन और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है।
छोटी आदतों में बदलाव से मिल सकता है बड़ा फायदा
डॉ. शिव कुमार सरीन की सलाह का मुख्य संदेश यही है कि सेहत को बेहतर बनाने के लिए किसी महंगे डाइट प्लान या सप्लीमेंट पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। घर का ताजा भोजन, खाने का सही समय, सीमित मात्रा, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद जैसी आदतें लंबे समय तक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।
हालांकि, किसी विशेष डाइट या लंबे समय तक उपवास की शुरुआत करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए। डायबिटीज, पाचन संबंधी बीमारी या नियमित दवाएं लेने वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना भोजन के समय में बड़ा बदलाव नहीं करना चाहिए।