लाइफस्टाइल: सर्दियों की शुरुआत होते ही चेहरे पर खिंचाव, रूखापन और पपड़ी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। चेहरा धोने के बाद त्वचा का तना हुआ महसूस होना भी परेशानी का संकेत हो सकता है। ठंड के मौसम में हवा में नमी कम होने और घर के भीतर हीटर के इस्तेमाल से त्वचा की नमी घट सकती है। ऐसे में कई लोग रसोई में रखी चीजों से फेस पैक बनाकर लगाने लगते हैं। हालांकि, ड्राई स्किन की देखभाल में किसी घरेलू नुस्खे से पहले यह समझना जरूरी है कि त्वचा को राहत किससे मिलती है और किन चीजों से जलन बढ़ सकती है। 

सबसे पहले ‘केमिकल फ्री’ शब्द की सच्चाई समझ लें। पानी, फल, दूध और ओट्स सहित सभी पदार्थ रासायनिक तत्वों से बने होते हैं। इसलिए कोई फेस पैक पूरी तरह केमिकल फ्री नहीं होता। आम बोलचाल में इससे अक्सर बिना अतिरिक्त रंग या खुशबू वाले घरेलू मिश्रण का मतलब लिया जाता है। लेकिन प्राकृतिक होना किसी सामग्री के सुरक्षित होने की गारंटी नहीं है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार, प्राकृतिक या ऑर्गेनिक सामग्री भी संवेदनशील त्वचा में एलर्जी बढ़ा सकती है। इसलिए सामग्री का चुनाव उसके दावे के बजाय अपनी त्वचा की जरूरत के अनुसार करें। 
ओट्स त्वचा की देखभाल में इस्तेमाल होने वाली एक परिचित सामग्री है। विशेष रूप से तैयार किया गया ‘कोलॉइडल ओटमील’ बारीक प्रोसेस किए गए ओट्स से बनता है और कई स्किन केयर उत्पादों में मौजूद होता है। ओटमील युक्त तैयार उत्पादों पर हुए एक अध्ययन में त्वचा की नमी में सुधार देखा गया था। हालांकि, इस नतीजे को घर में बनाए गए हर ओट्स फेस पैक पर लागू नहीं किया जा सकता। खाने वाले ओट्स को पीसकर तैयार किया गया मिश्रण और जांचे गए उत्पाद एक जैसे नहीं होते। घरेलू पैक को प्रमाणित उपचार समझना सही नहीं होगा। 
यदि ओटमील वाला फेस मास्क इस्तेमाल करना चाहते हैं तो चेहरे पर उपयोग के लिए बना बिना खुशबू वाला उत्पाद चुनना अधिक व्यावहारिक विकल्प है। पैक पर दिए निर्देशों के अनुसार ही उसे लगाएं और हटाएं। उसमें अपनी ओर से दूध, दही, शहद, गुलाबजल या दूसरी सामग्री मिलाने की जरूरत नहीं है। एक साथ कई चीजें मिलाने पर प्रतिक्रिया होने की स्थिति में उसकी वजह पहचानना कठिन हो सकता है। ओट्स से एलर्जी वाले लोग इसका उपयोग न करें। त्वचा पर ओटमील लगाने से भी कुछ लोगों में कॉन्टैक्ट एलर्जी के मामले दर्ज किए गए हैं। 
नया फेस पैक या मॉइस्चराइजर सीधे पूरे चेहरे पर लगाने के बजाय पहले छोटे हिस्से पर आजमाएं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी नई स्किन केयर सामग्री को बांह के अंदरूनी हिस्से जैसे स्थान पर सात से दस दिन तक जांचने की सलाह देती है। धोकर हटाए जाने वाले उत्पाद को सामान्य इस्तेमाल की अवधि या उसके निर्देशों के अनुसार ही रखें। लालिमा, खुजली, सूजन या जलन होने पर तुरंत धो दें और दोबारा इस्तेमाल न करें। छोटे हिस्से पर प्रतिक्रिया न होना भी भविष्य में एलर्जी न होने की पूर्ण गारंटी नहीं है। 
ड्राई स्किन में फेस पैक से ज्यादा जरूरी नियमित मॉइस्चराइजिंग है। चेहरा धोने के बाद त्वचा को तौलिए से हल्के हाथ से थपथपाएं और थोड़ा नम रहते हुए मॉइस्चराइजर लगाएं। रूखी त्वचा के लिए अक्सर हल्के लोशन की तुलना में क्रीम या ऑइंटमेंट अधिक उपयोगी होता है। ग्लिसरीन, सेरामाइड और हायलूरोनिक एसिड जैसे घटकों वाले विकल्प देखे जा सकते हैं। मुंहासे भी होते हों तो नॉन-कॉमेडोजेनिक उत्पाद चुनें। महंगा उत्पाद ही बेहतर होगा, ऐसा जरूरी नहीं; ऐसा विकल्प उपयोगी है जिसे त्वचा सहन करे और नियमित लगाया जा सके। 
चेहरे की पपड़ी देखकर उसे बार-बार स्क्रब करना या रगड़कर हटाना परेशानी बढ़ा सकता है। सर्दियों में ड्राई स्किन पर एक्सफोलिएशन करने के बजाय नमी बनाए रखने पर ध्यान देना बेहतर है। बहुत गर्म पानी के स्थान पर गुनगुना पानी इस्तेमाल करें और तेज खुशबू वाले साबुन या क्लेंजर से बचें। किसी पैक के लगने पर चुभन को उसके असर करने का संकेत न मानें। त्वचा लगातार खिंच रही हो तो नए उत्पाद जोड़ने के बजाय अपनी दिनचर्या को सरल बनाना और जलन पैदा करने वाली चीज रोकना अधिक उपयोगी कदम है। 
सर्दियों में धूप से सुरक्षा भी जरूरी है। दिन में बाहर निकलते समय ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एसपीएफ 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन लगाएं। यदि रूखेपन के साथ लगातार खुजली, दर्द, दरारें, खून आना या चकत्ते हों तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें। ऐसी स्थिति में घरेलू फेस पैक लगाते रहना उचित नहीं है। सामान्य देखभाल के बाद भी सुधार न हो तो कारण की जांच जरूरी हो सकती है। चेहरे की नमी बनाए रखने का भरोसेमंद आधार कोमल सफाई, नियमित मॉइस्चराइजर और त्वचा के अनुरूप उत्पाद हैं। फेस पैक इस देखभाल का वैकल्पिक हिस्सा हो सकता है।

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