लाइफस्टाइल :  थोड़ा खाली समय मिला और हाथ अपने आप मोबाइल की तरफ बढ़ गया। एक खबर देखने के लिए फोन खोला, लेकिन उसके बाद लगातार परेशान करने वाली खबरें, वीडियो और पोस्ट देखते रहे। कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि सामग्री देखने से बेचैनी बढ़ती है, फिर भी वे स्क्रॉल करना बंद नहीं कर पाते। नकारात्मक या डर पैदा करने वाली जानकारी को लगातार देखते रहने की इस प्रवृत्ति को डूमस्क्रॉलिंग कहा जाता है। हर तरह का मोबाइल इस्तेमाल डूमस्क्रॉलिंग नहीं है और अधिक स्क्रीन टाइम अपने आप में किसी चिकित्सकीय लत का निदान भी नहीं होता। 

हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार, लगातार परेशान करने वाली खबरों का सेवन मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। शोध में डूमस्क्रॉलिंग और खराब मानसिक कुशलता, चिंता तथा जीवन से कम संतुष्टि के बीच संबंध सामने आए हैं। हालांकि, संबंध मिलने से हर व्यक्ति में सीधा कारण साबित नहीं होता। यदि स्क्रॉलिंग के कारण नींद, काम या रिश्तों के लिए समय कम पड़ रहा है, तो अपनी दिनचर्या में बदलाव उपयोगी हो सकता है। पढ़ना, चलना और नई चीजें सीखना जैसे विकल्प मानसिक सक्रियता का समर्थन करते हैं, लेकिन इनसे बुद्धि या याददाश्त निश्चित रूप से बढ़ने का दावा सही नहीं होगा। 
पहली आदत है खाली समय में थोड़ी देर पढ़ना। शुरुआत के लिए अपनी पसंद की कहानी, जीवनी या जानकारीपूर्ण किताब चुनें। उदाहरण के तौर पर रोज दस मिनट पढ़ने का छोटा लक्ष्य रखा जा सकता है। यह कोई निर्धारित चिकित्सकीय मात्रा नहीं, बल्कि नियमितता बनाने का व्यावहारिक तरीका है। किताब को ऐसी जगह रखें, जहां खाली समय में उस तक आसानी से पहुंच सकें। पढ़ने के दौरान बार-बार फोन देखने के बजाय कुछ पन्ने लगातार पढ़ने का प्रयास करें। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग पढ़ने और बुक क्लब जैसी गतिविधियों को सार्थक रुचियों के उदाहरणों में शामिल करता है। 
दूसरी आदत है उठकर चलना या शरीर को सक्रिय करना। फोन देखते हुए लंबे समय तक बैठे रहने के बजाय छोटा चक्कर लगाएं, घर के काम करें या अपनी क्षमता के अनुसार टहलें। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के अनुसार, शारीरिक गतिविधि सोचने, सीखने, समस्या सुलझाने और भावनात्मक संतुलन में मदद कर सकती है। वयस्कों के लिए सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता की गतिविधि का लक्ष्य बताया गया है। इसे छोटे हिस्सों में बांटा जा सकता है। शुरुआत कम समय से करके धीरे-धीरे बढ़ाना भी उपयोगी है। 
तीसरी आदत है कुछ नया सीखना या रचनात्मक काम करना। कोई भाषा सीखना, चित्र बनाना, संगीत का अभ्यास करना, बागवानी या नई रेसिपी तैयार करना विकल्प हो सकते हैं। गतिविधि ऐसी चुनें जिसमें रुचि हो और जिसे नियमित रूप से करना संभव लगे। इसे प्रदर्शन या प्रतियोगिता का दबाव बनाने की जरूरत नहीं है। उदाहरण के लिए, हर दिन एक छोटा चित्र बनाना या किसी धुन का अभ्यास करना शुरुआत हो सकती है। उम्र बढ़ने के साथ पसंद की रचनात्मक और सामाजिक गतिविधियों में शामिल होना मानसिक कुशलता तथा सक्रिय जीवन का समर्थन कर सकता है।  
चौथी आदत है अपनों से बातचीत के लिए समय निकालना। खाली समय में लगातार पोस्ट देखने के बजाय किसी दोस्त या परिवार के सदस्य से बात करें। संभव हो तो साथ टहलें या भोजन के दौरान बातचीत करें। दूर रहने वाले प्रियजन से फोन या वीडियो कॉल पर संपर्क भी उपयोगी हो सकता है। इसलिए उद्देश्य हर स्क्रीन को हटाना नहीं, बल्कि तकनीक का ऐसा इस्तेमाल करना है जो वास्तविक संबंधों को मजबूत करे। अमेरिकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार, स्वस्थ सामाजिक संबंध तनाव से निपटने में सहारा देते हैं और बेहतर मानसिक कुशलता से जुड़े होते हैं। 
पांचवीं आदत है सोने की दिनचर्या और फोन के बीच स्पष्ट सीमा बनाना। रात में बिस्तर पर लगातार खबरें देखते रहने से आराम का समय कम पड़ सकता है। मोबाइल को तकिए के पास रखने के बजाय कुछ दूरी पर रखें और गैरजरूरी नोटिफिकेशन बंद करें। सुबह उठते ही स्क्रीन देखने के स्थान पर तैयार होने और सामान्य गतिविधियों के लिए समय दें। अच्छी नींद मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग सामान्यतः सात से नौ घंटे नींद लेने की बात करता है, हालांकि व्यक्तिगत जरूरत और उम्र के अनुसार अंतर हो सकता है। 
इन आदतों को अपनाने से पहले यह समझना भी उपयोगी है कि स्क्रॉलिंग कब बढ़ती है। क्या आप ऊबने, तनाव में होने या काम टालने के दौरान फोन उठाते हैं? सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से पहले और बाद में अपनी भावनाओं पर ध्यान दें। यदि किसी खाते की पोस्ट लगातार गुस्सा या बेचैनी पैदा करती है तो उसे म्यूट करना एक विकल्प है। खबरों से जुड़े रहने के लिए तय समय रखें और बार-बार वही जानकारी खोजने से बचने का प्रयास करें। सारे बदलाव एक दिन में करने के बजाय एक या दो छोटे कदम चुनें। 
मोबाइल की आदत बदलने का लक्ष्य खाली समय को ऐसी गतिविधियों से भरना है, जो आराम, संबंधों और स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हों। किसी दिन अधिक स्क्रॉलिंग हो जाने पर खुद को दोष देने के बजाय अगली बार के लिए छोटा बदलाव तय करें। यदि फोन इस्तेमाल रोकना बहुत मुश्किल लग रहा हो, उससे लगातार घबराहट हो रही हो या नींद और दैनिक काम गंभीर रूप से प्रभावित हों, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करें। मदद लेना आदत को समझने और उसके पीछे मौजूद तनाव से निपटने का एक व्यावहारिक कदम है। 

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