लाइफ स्टाइल : हमारा लीवर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, जो बिना रुके दिन-रात कई जरूरी काम करता रहता है। यह शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, पाचन में मदद करने, ऊर्जा को नियंत्रित करने और कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से चलाने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन अक्सर लोग लीवर की सेहत पर तब ध्यान देते हैं, जब कोई बड़ी परेशानी सामने आ जाती है। यही वजह है कि हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी कई बार समय रहते पहचान में नहीं आ पाती।
हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें लीवर में सूजन हो जाती है। इसके शुरुआती लक्षण कई बार इतने सामान्य होते हैं कि लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। लगातार थकान, कमजोरी या भूख कम लगने जैसी समस्याओं को लोग सामान्य मान लेते हैं, लेकिन कई मामलों में ये हेपेटाइटिस के संकेत हो सकते हैं। लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने, समय पर जांच कराने और सही इलाज के महत्व को समझाने के उद्देश्य से हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है।
विश्व हेपेटाइटिस दिवस का महत्व
हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को वायरल हेपेटाइटिस के बारे में जानकारी देना और उन्हें समय पर जांच व इलाज के लिए प्रेरित करना है। इस दिवस को मनाने की शुरुआत लोगों में जागरूकता बढ़ाने और दुनिया भर में हेपेटाइटिस से होने वाली मौतों को कम करने के उद्देश्य से की गई।
28 जुलाई की तारीख हेपेटाइटिस बी वायरस की खोज करने वाले वैज्ञानिक डॉ. बारूक सैम्युअल ब्लमबर्ग के जन्मदिन के सम्मान में चुनी गई है। उन्होंने हेपेटाइटिस बी वायरस की खोज की थी और इसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के जरिए लोगों को यह संदेश दिया जाता है कि समय पर बीमारी की पहचान और सही इलाज से गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है।
इस वर्ष विश्व हेपेटाइटिस दिवस की थीम "Hepatitis: Let's break it down" रखी गई है। इसका उद्देश्य हेपेटाइटिस से जुड़ी गलत धारणाओं को दूर करना, बीमारी के बारे में सही जानकारी पहुंचाना और लोगों को जांच व उपचार के लिए जागरूक करना है।
क्या है हेपेटाइटिस बीमारी?
हेपेटाइटिस लीवर में होने वाली सूजन की स्थिति है। यह मुख्य रूप से वायरस के संक्रमण के कारण होता है। हेपेटाइटिस वायरस को पांच प्रमुख प्रकारों में बांटा गया है, जिन्हें हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई कहा जाता है।
हेपेटाइटिस ए और ई आमतौर पर दूषित भोजन और पानी के कारण फैलते हैं। वहीं हेपेटाइटिस बी, सी और डी ज्यादा गंभीर माने जाते हैं क्योंकि ये लंबे समय तक शरीर में रह सकते हैं और धीरे-धीरे लीवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लंबे समय तक संक्रमण रहने पर लीवर सिरोसिस और लीवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
हेपेटाइटिस के सामान्य लक्षण
हेपेटाइटिस के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। कई बार शुरुआती दौर में इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन धीरे-धीरे शरीर में कुछ बदलाव नजर आने लगते हैं।
लगातार थकान महसूस होना हेपेटाइटिस का एक सामान्य संकेत हो सकता है। बिना ज्यादा मेहनत किए भी कमजोरी और ऊर्जा की कमी महसूस होना इस बीमारी की ओर इशारा कर सकता है।
त्वचा और आंखों का पीला पड़ना भी हेपेटाइटिस का प्रमुख लक्षण माना जाता है। जब शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है तो आंखों का सफेद हिस्सा और त्वचा पीली दिखाई देने लगती है।
इसके अलावा भूख कम लगना, पेट में दर्द या भारीपन महसूस होना, उल्टी या मतली आना, गहरे रंग का पेशाब होना और वजन कम होना भी इसके लक्षण हो सकते हैं। कई लोगों में जोड़ों में दर्द और हल्का बुखार भी देखा जा सकता है।
हेपेटाइटिस से बचाव के उपाय
हेपेटाइटिस से बचने के लिए सावधानी और जागरूकता सबसे जरूरी है। हेपेटाइटिस ए और ई से बचने के लिए साफ पानी पीना और स्वच्छ भोजन करना जरूरी है। खाने से पहले हाथ धोने की आदत बीमारी के खतरे को कम कर सकती है।
हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार टीकाकरण करवाना चाहिए। संक्रमित व्यक्ति के खून या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क से बचना भी जरूरी है।
इसके अलावा बिना जांच के किसी भी व्यक्ति का इस्तेमाल किया हुआ इंजेक्शन या सुई इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। टैटू या पियर्सिंग करवाते समय साफ और सुरक्षित उपकरणों का इस्तेमाल सुनिश्चित करना चाहिए।
लीवर को स्वस्थ रखने के लिए शराब से दूरी बनाना, संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना फायदेमंद होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हेपेटाइटिस को लेकर जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। अगर समय पर बीमारी की पहचान हो जाए तो उचित इलाज और सावधानी से लीवर को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है। विश्व हेपेटाइटिस दिवस का उद्देश्य भी यही है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस बीमारी को समझें, जांच करवाएं और स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।