Life Style लाइफ स्टाइल : अचानक सीने में तेज दर्द, बेचैनी, पसीना और कुछ ही मिनटों में हालत गंभीर हो जाना—हार्ट अटैक को कभी मुख्य रूप से बढ़ती उम्र से जुड़ी समस्या माना जाता था, लेकिन कम उम्र में सामने आ रहे मामले अब चिंता बढ़ा रहे हैं। पाली और ब्यावर से सामने आई हालिया पोस्टमॉर्टम रिपोर्टों ने भी लोगों को झकझोर दिया है। 31 साल के हरीश, 40 साल के कपिल और 43 साल के नारायण सिंह की उम्र और शहर अलग-अलग थे, लेकिन बताई गई मौत की वजह मायोकार्डियल इंफार्क्शन यानी हार्ट अटैक रही। काम करते या चलते-फिरते अचानक तबीयत बिगड़ना और अस्पताल पहुंचने से पहले जान चले जाना इस खतरे को गंभीरता से समझने की जरूरत बताता है।
मायोकार्डियल इंफार्क्शन उस स्थिति को कहा जाता है जब हृदय की मांसपेशियों तक रक्त पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनी में रक्त का प्रवाह अचानक बाधित हो जाता है। लंबे समय तक रक्त और ऑक्सीजन नहीं मिलने पर हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचना शुरू हो सकता है। यह मेडिकल इमरजेंसी है और इसमें जल्द इलाज बेहद महत्वपूर्ण होता है।
कम उम्र में क्यों हो सकता है हार्ट अटैक?
हार्ट अटैक के पीछे केवल उम्र जिम्मेदार नहीं होती। धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर,
डायबिटीज
, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और पारिवारिक इतिहास जैसे कई कारक हृदय रोग का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
आज की जीवनशैली में लंबे समय तक बैठकर काम करना, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि न करना, असंतुलित खानपान और नींद की कमी जैसी आदतें भी हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए युवा होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को दिल से जुड़ी बीमारी का कोई खतरा ही नहीं हो सकता।
कुछ लोगों में हृदय रोग के जोखिम वाले कारक लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के मौजूद रह सकते हैं। यही कारण है कि समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी जांच डॉक्टर की सलाह के अनुसार कराना उपयोगी हो सकता है।
शरीर पहले दे सकता है चेतावनी
हार्ट अटैक हमेशा फिल्मी अंदाज में अचानक तेज सीने के दर्द के साथ ही सामने आए, यह जरूरी नहीं है। इसके लक्षण अलग-अलग लोगों में अलग हो सकते हैं।
सीने में दबाव, जकड़न, भारीपन या दर्द इसके प्रमुख संकेतों में शामिल हैं। दर्द हाथ, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैल सकता है। इसके अलावा सांस फूलना, ठंडा पसीना, मतली, चक्कर, असामान्य कमजोरी या अचानक बेचैनी जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं।
कुछ लोगों, विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों में लक्षण सामान्य से अलग या कम स्पष्ट हो सकते हैं। इसलिए असामान्य लक्षणों को केवल गैस या थकान मानकर नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है।
सीने में दर्द को हल्के में न लें
कम उम्र के लोग अक्सर सीने में होने वाली परेशानी को गैस, एसिडिटी या मांसपेशियों के दर्द से जोड़कर देखते हैं। हालांकि हर सीने का दर्द हार्ट अटैक नहीं होता, लेकिन बिना जांच यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि दर्द की असली वजह क्या है।
अगर सीने में नया या तेज दर्द हो, दबाव महसूस हो, सांस लेने में परेशानी हो, बहुत ज्यादा पसीना आए या व्यक्ति बेहोश होने लगे तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। ऐसे मामलों में खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने के बजाय उपलब्ध आपातकालीन चिकित्सा सेवा की मदद लेना बेहतर हो सकता है।
हार्ट अटैक में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। जितनी जल्दी डॉक्टर मरीज का मूल्यांकन और आवश्यक उपचार शुरू कर पाते हैं, उतना ही हृदय की मांसपेशियों को होने वाले नुकसान को कम करने की संभावना बढ़ सकती है।
अचानक गिर जाए व्यक्ति तो क्या करें?
अगर कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए, प्रतिक्रिया न दे और सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा हो तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलानी चाहिए। यदि आसपास कोई व्यक्ति सीपीआर देना जानता है तो चिकित्सा सहायता पहुंचने तक उसे शुरू किया जा सकता है।
ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर यानी AED उपलब्ध हो तो उसके निर्देशों का पालन किया जा सकता है। अचानक कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में समय पर सीपीआर और डिफिब्रिलेशन जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यह समझना भी जरूरी है कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक ही चीज नहीं हैं। हार्ट अटैक में हृदय तक रक्त प्रवाह बाधित होता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में हृदय की प्रभावी धड़कन अचानक बंद हो सकती है। हार्ट अटैक कभी-कभी कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है।
जिम जाने वाले युवा भी रखें ध्यान
फिट दिखने वाला व्यक्ति भी हृदय संबंधी जोखिम से पूरी तरह सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए व्यायाम करना जरूरी है, लेकिन शरीर की क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार करना चाहिए।
अगर एक्सरसाइज के दौरान सीने में दर्द, असामान्य सांस फूलना, चक्कर, धड़कन में असामान्यता या बेहोशी जैसा महसूस हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर जिन लोगों के परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास रहा है या जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्या है, उन्हें डॉक्टर से अपने व्यक्तिगत जोखिम पर चर्चा करनी चाहिए।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
हृदय रोग के जोखिम को कम करने के लिए रोजमर्रा की आदतों में सुधार महत्वपूर्ण है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और स्वस्थ वजन बनाए रखना दिल के लिए फायदेमंद माना जाता है।
धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है। यदि डॉक्टर ने किसी बीमारी के लिए दवा दी है तो उसे अपनी मर्जी से बंद नहीं करना चाहिए।
युवाओं को भी समझना होगा खतरा
पाली और ब्यावर से सामने आए मामले यह याद दिलाते हैं कि दिल से जुड़ी गंभीर समस्या को केवल बुजुर्गों तक सीमित मानना सही नहीं है। किसी व्यक्ति की अचानक मौत का कारण क्या था, यह चिकित्सकीय जांच और पोस्टमॉर्टम से ही स्पष्ट किया जा सकता है, इसलिए हर अचानक मौत को स्वतः हार्ट अटैक मान लेना भी उचित नहीं है।
लेकिन यदि जांच में मायोकार्डियल इंफार्क्शन सामने आए तो यह संकेत जरूर है कि कम उम्र में भी हृदय स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रहना जरूरी है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सीने में दर्द, दबाव, सांस फूलना, ठंडा पसीना या अचानक कमजोरी जैसे चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज न किया जाए। समय पर चिकित्सा सहायता और जोखिम वाले कारकों की पहचान कई मामलों में जान बचाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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