त्योहार केवल जश्न मनाने के लिए नहीं होते, बल्कि ये हमें जीवन की सीख भी देते हैं। दशहरा एक ऐसा ही शुभ त्योहार है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस साल यह 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस खास मौके पर, आइए इसके महत्व, त्योहारों के दौरान होने वाली स्वास्थ्य संबंधी गलतियों, सेहत बनाए रखने के आयुर्वेदिक तरीकों और पतंजलि के उपयोगी उत्पादों के बारे में चर्चा करें।
दशहरे का महत्व
जैसा कि पहले बताया गया है, दशहरा या विजयादशमी बुराई पर अच्छाई और दुष्टता पर सदाचार की जीत का जश्न है। उत्तर भारत में इसे भगवान राम की रावण पर जीत के रूप में मनाया जाता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में इसे राक्षस महिषासुर पर माँ दुर्गा की जीत के रूप में मनाया जाता है।
दशहरा हिंदू कैलेंडर के आश्विन महीने के दसवें दिन आता है और यह नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि उत्सव का आखिरी दिन होता है। उत्तर भारत में रावण, उसके भाई और बेटे के पुतले जलाए जाते हैं, जबकि बंगाल में माँ दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।
यह त्योहार खरीफ और मानसून के मौसम के अंत और सर्दियों की शुरुआत का प्रतीक है। नए मौसम की पहली फसल देवताओं को अर्पित की जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस उत्सव के दौरान शमी के पेड़, आप्टा के पत्ते और गेंदे के फूलों का विशेष महत्व होता है।
त्योहारों के दौरान होने वाली गलतियाँ जो सेहत को नुकसान पहुँचाती हैं
सबसे आम समस्या है - ज़रूरत से ज़्यादा खाना। लोग भले ही व्रत रखते हों, लेकिन वे इस मौके पर बने बहुत सारे तले-भुने (फ्राइड) खाद्य पदार्थ खा लेते हैं। कई बार लोग ज़रूरत से ज़्यादा खा लेते हैं या खाने की मात्रा पर नियंत्रण नहीं रख पाते। कुछ लोग खाना छोड़ देते हैं या व्रत के नियमों का पालन नहीं करते, तो कुछ लोग पर्याप्त पानी नहीं पीते। इससे एसिडिटी, डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और सुस्ती जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। आतिशबाजी और पुतले जलाने से हवा की गुणवत्ता खराब होती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत हो सकती है या अस्थमा की समस्या बढ़ सकती है। आइए अब जानते हैं कि आयुर्वेद और पतंजलि के आयुर्वेदिक उत्पाद आपकी सेहत को बनाए रखने में कैसे मदद कर सकते हैं।
शुभ अवसरों पर सेहत बनाए रखने के आयुर्वेदिक तरीके
खान-पान: ऐसा गर्म और ताज़ा भोजन लें जो आसानी से पच जाए। सूप या खिचड़ी जैसे हल्के भोजन को प्राथमिकता दें। अपने आहार में मूंग दाल, रागी, बाजरा, फूलगोभी, चुकंदर, गाजर, पत्तेदार सब्जियाँ, सेब, नाशपाती और अमरूद जैसी चीज़ें शामिल करें। मिठाइयाँ बनाने के लिए चीनी की जगह गुड़ या शहद का इस्तेमाल करें। पानी या हर्बल ड्रिंक्स पीते रहें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। थोड़ी मात्रा में घी का सेवन शरीर को पोषण देता है और पाचन में मदद करता है।
जड़ी-बूटियाँ और मसाले: जीरा, धनिया, हल्दी, सौंफ, तुलसी, अदरक, त्रिफला, दालचीनी, इलायची, आंवला और गिलोय जैसी जड़ी-बूटियों और मसालों को चुनें। ये पाचन शक्ति को बनाए रखते हैं, ब्लोटिंग (पेट फूलना) और सूजन जैसी समस्याओं को दूर करते हैं, शरीर को ठंडक देते हैं, श्वसन स्वास्थ्य और इम्युनिटी को बेहतर रखते हैं, और मौसम में होने वाले बदलावों से निपटने में मदद करते हैं।
जीवनशैली: स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें। त्योहारों, उपवास या खान-पान के दौरान शरीर पर बहुत अधिक दबाव न डालें। खाने और सोने का एक निश्चित समय रखें। अगर सुस्ती महसूस हो, तो टहलें या योग करें।
त्योहारों को स्वस्थ तरीके से मनाने के लिए पतंजलि के उत्पादों को शामिल करें। पतंजलि गाय के घी (200 मिली, 450 मिली, 500 मिली, 900 मिली, 1 लीटर और 5 लीटर) का इस्तेमाल रोज़मर्रा के खाने, व्रत के भोजन, मिठाइयाँ बनाने या पूजा-पाठ के दौरान किया जा सकता है।
पूजा या अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए पतंजलि के 'आस्था लोबान' (30 ग्राम) का उपयोग करें। इसके अलावा, आप पतंजलि की 'आस्था स्पेशल चंदन धूप' (40 ग्राम), 'आस्था रॉयल कस्तूरी अगरबत्ती' (16 ग्राम) और 'आस्था प्रीमियम अगरबत्ती (रोज़)' (250 ग्राम) का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। पतंजलि की ओर से 'आस्था हवन किट' (1 किलो) और 'आस्था पूजा सामग्री' (608 ग्राम) भी उपलब्ध है।
मिठाइयाँ बनाने के लिए पतंजलि 'मधुरम शुगर' (गुड़ का पाउडर) (1 किलो) का इस्तेमाल करें। यह गुड़ से बना मीठा पाउडर है, जो सेहत के लिए फायदेमंद होता है। आप पतंजलि की 'नवरत्न इलायची सोन पापड़ी' (250 ग्राम और 500 ग्राम), 'काजू कतली' (500 ग्राम) और 'पेड़ा' (500 ग्राम) जैसी मिठाइयों का आनंद ले सकते हैं। या फिर व्रत के लिए खिचड़ी या वड़े बनाने के लिए पतंजलि साबूदाना (500 ग्राम) का इस्तेमाल करें। यह पाचन और हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा है और तुरंत ऊर्जा देता है। स्वाद, क्रंच और ऊर्जा बढ़ाने के लिए इसमें पतंजलि कच्ची मूंगफली (500 ग्राम) भी मिलाएं।
20 अक्टूबर को दशहरा या विजयादशमी का त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाएं। इस दौरान आयुर्वेद की मदद से अपनी सेहत का ख्याल रखें और खान-पान में होने वाली गलतियों से बचें। त्योहारों के लिए पतंजलि के उत्पादों का इस्तेमाल करें।
Tags: