Lifestyle लाइफ स्टाइल :हम सभी जानते हैं कि सनस्क्रीन त्वचा को सूरज की हानिकारक पराबैंगनी किरणों और बढ़ते प्रदूषण से बचाने में अहम भूमिका निभाती है। यह त्वचा को समय से पहले बूढ़ा होने यानी स्किन एजिंग, टैनिंग और यहां तक कि स्किन कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं से बचाने में मदद करती है। लेकिन इसके बावजूद सनस्क्रीन को लेकर लोगों के बीच कई तरह के भ्रम और गलत धारणाएं फैली हुई हैं, जिनकी वजह से लोग इसका सही इस्तेमाल नहीं कर पाते और उनकी त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है।
पहला मिथक यह है कि बादल वाले दिन सनस्क्रीन की जरूरत नहीं होती। हकीकत यह है कि सूरज की यूवी किरणें बादलों के बीच से भी त्वचा तक पहुंच जाती हैं, इसलिए हर मौसम में सनस्क्रीन लगाना जरूरी है।
दूसरा मिथक यह माना जाता है कि केवल धूप में बाहर निकलने पर ही सनस्क्रीन लगानी चाहिए। लेकिन सच यह है कि घर के अंदर रहते हुए भी कंप्यूटर, मोबाइल और खिड़की से आने वाली यूवी किरणें त्वचा को प्रभावित कर सकती हैं।
तीसरा भ्रम यह है कि एक बार सनस्क्रीन लगाने से पूरे दिन सुरक्षा मिल जाती है। जबकि विशेषज्ञों के अनुसार इसे हर 2 से 3 घंटे में दोबारा लगाना चाहिए, खासकर अगर आप बाहर हैं या पसीना आ रहा है।
चौथा मिथक यह है कि डार्क स्किन वालों को सनस्क्रीन की जरूरत नहीं होती। असल में सभी स्किन टोन को यूवी किरणों से नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए हर किसी के लिए सनस्क्रीन जरूरी है।
पांचवां मिथक यह है कि महंगी सनस्क्रीन ही बेहतर होती है। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है, क्योंकि सही SPF और ब्रॉड स्पेक्ट्रम प्रोटेक्शन वाली कोई भी अच्छी सनस्क्रीन त्वचा की रक्षा कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सनस्क्रीन का सही और नियमित इस्तेमाल त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। इसके साथ ही धूप में निकलते समय टोपी, सनग्लासेस और हल्के कपड़ों का इस्तेमाल भी अतिरिक्त सुरक्षा देता है।
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