लाइफ स्टाइल

क्या हमारी थाली बन रही है बीमारी का कारण?

Kanchan Paikara
23 Jun 2026 7:14 PM IST
क्या हमारी थाली बन रही है बीमारी का कारण?
x

Lifestyle लाइफ स्टाइल :आज के समय में लोग अपनी सेहत को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो गए हैं, लेकिन इसके बावजूद खाने-पीने की चीजों में मौजूद रसायन (केमिकल्स) अब भी चिंता का बड़ा विषय बने हुए हैं। हाल ही में सामने आए एक खुलासे में दावा किया गया है कि रोजमर्रा की थाली में इस्तेमाल होने वाली कुछ खाद्य सामग्री में ऐसे केमिकल्स पाए जा सकते हैं, जिनसे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कई ऐसे रासायनिक पदार्थ हैं जिन्हें यूरोपीय देशों में पूरी तरह से बैन कर दिया गया है। यूरोप में इन केमिकल्स के उत्पादन और निर्यात पर भी रोक लगा दी गई है, क्योंकि वैज्ञानिक अध्ययनों में इन्हें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना गया है। इसके बावजूद, भारत में कृषि क्षेत्र और खाद्य उत्पादन में इन रसायनों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि कुछ कृषि उत्पादों में कीटनाशक और अन्य रासायनिक पदार्थों का उपयोग अब भी व्यापक रूप से किया जा रहा है। इनका उद्देश्य फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाना होता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इनका अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है। लंबे समय तक ऐसे रसायनों के संपर्क में रहने से कैंसर, हार्मोन असंतुलन और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में खाद्य सुरक्षा मानकों को और सख्त करने की जरूरत है। साथ ही किसानों को सुरक्षित और जैविक खेती की ओर प्रोत्साहित करना भी बेहद जरूरी है। कई विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि यदि समय रहते जागरूकता और नियंत्रण नहीं बढ़ाया गया, तो आने वाले समय में इसका असर सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बड़ा हो सकता है।

दूसरी ओर, सवाल यह भी उठ रहा है कि जिन केमिकल्स को यूरोप जैसे विकसित देशों ने स्वास्थ्य के लिए खतरनाक मानकर प्रतिबंधित कर दिया है, उनका उपयोग भारत में किस आधार पर जारी है। क्या मौजूदा नियम और निगरानी व्यवस्था पर्याप्त है या इसमें सुधार की आवश्यकता है, इस पर बहस तेज हो गई है।

सरकारी स्तर पर खाद्य सुरक्षा और कृषि रसायनों की निगरानी के लिए कई एजेंसियां काम करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनके प्रभाव को लेकर अलग-अलग राय सामने आती है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि नियम तो मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन ठीक से नहीं हो पाता।

Next Story