भाग्यश्री का खुलासा पेरीमेनोपॉज के दौर में महिलाओं को क्यों होती है परेशानी
महिलाओं की जिंदगी का बड़ा पड़ाव पेरीमेनोपॉज
नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री भाग्यश्री ने महिलाओं की सेहत से जुड़े एक अहम मुद्दे पर बात की है। उन्होंने बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में आने वाले पेरीमेनोपॉज (Perimenopause) के दौर और इससे जुड़ी शारीरिक व मानसिक परेशानियों को लेकर अपना अनुभव साझा किया।
पेरीमेनोपॉज वह समय होता है जब महिला का शरीर मेनोपॉज यानी मासिक धर्म पूरी तरह बंद होने की प्रक्रिया की ओर बढ़ता है। आमतौर पर यह बदलाव 40 साल की उम्र के बाद शुरू हो सकता है, हालांकि हर महिला में इसका समय अलग-अलग हो सकता है।
हार्मोन में बदलाव से बढ़ती हैं मुश्किलें
पेरीमेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव होने लगता है। इसके कारण कई महिलाओं को अलग-अलग तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैं।
इनमें—
पीरियड्स का अनियमित होना
अचानक गर्मी लगना
नींद में परेशानी
मूड में बदलाव
थकान और कमजोरी
वजन बढ़ना
जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर
विशेषज्ञों के अनुसार, पेरीमेनोपॉज सिर्फ शारीरिक बदलाव नहीं बल्कि भावनात्मक बदलाव का दौर भी हो सकता है। कई महिलाओं को चिड़चिड़ापन, चिंता या तनाव जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
इस दौरान परिवार और आसपास के लोगों का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
भाग्यश्री ने क्यों उठाया मुद्दा?
भाग्यश्री ने महिलाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से इस विषय पर बात की। उनका कहना है कि उम्र के इस पड़ाव को लेकर महिलाओं को जानकारी होना जरूरी है, ताकि वे बदलावों को समझ सकें और जरूरत पड़ने पर सही सलाह ले सकें।
स्वस्थ जीवनशैली से मिल सकती है मदद
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पेरीमेनोपॉज के दौरान संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव कम करने वाली गतिविधियां मददगार हो सकती हैं।
कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर आहार हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी माना जाता है, क्योंकि हार्मोनल बदलावों का असर हड्डियों पर पड़ सकता है।
जागरूकता है जरूरी
महिलाओं के जीवन का यह एक प्राकृतिक चरण है, लेकिन जानकारी की कमी के कारण कई महिलाएं परेशानियों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लक्षण ज्यादा परेशान करने वाले हों तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।