लाइफस्टाइल | डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जो शरीर में शर्करा (ग्लूकोज) के स्तर को असंतुलित कर देती है। यदि डायबिटीज़ का सही समय पर इलाज और निगरानी न की जाए तो इससे हृदय रोग, किडनी समस्याएं, और नर्वस सिस्टम पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए, अगर आपको डायबिटीज है, तो आपको अपनी सेहत पर लगातार ध्यान रखना चाहिए और नियमित रूप से कुछ खास टेस्ट कराना चाहिए।
1. HbA1c टेस्ट (ग्लाइकोसिलेटेड हेमोग्लोबिन)
यह टेस्ट यह बताता है कि पिछले तीन महीने में आपके रक्त में शर्करा (ग्लूकोज) का औसत स्तर क्या था। यह टेस्ट ग्लूकोज के दीर्घकालिक स्तर को मापता है और डायबिटीज़ नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। HbA1c का स्तर अगर 6.5% या उससे अधिक है, तो यह डायबिटीज का संकेत देता है। नियमित रूप से इस टेस्ट से आपको यह पता चलता है कि आपके शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में कितना सफलता मिल रही है।
2. रेनल फंक्शन टेस्ट (किडनी टेस्ट)
डायबिटीज़ का एक गंभीर परिणाम किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। उच्च रक्त शर्करा किडनी की नलिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे नेफ्रोपैथी (किडनी की बीमारी) का खतरा बढ़ सकता है। किडनी की स्थिति को जांचने के लिए, क्रिएटिनिन और ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (GFR) टेस्ट करवाने चाहिए। इससे किडनी की कार्यक्षमता का पता चलता है और आप समय रहते उपचार कर सकते हैं।
3. आंखों की जांच (रेटिनोपैथी)
डायबिटीज़ की वजह से आंखों की रोशनी पर भी असर पड़ सकता है। उच्च शुगर का स्तर रेटिना (आंखों के पिछले हिस्से) को प्रभावित कर सकता है, जिससे डायबिटिक रेटिनोपैथी (आंखों की बीमारी) हो सकती है। इसके लिए ऑप्थलमोलॉजिकल जांच करवानी चाहिए, जिससे आंखों में किसी भी प्रकार के नुकसान का पता चल सके।
निष्कर्ष
यदि आपको डायबिटीज़ है, तो इन तीन महत्वपूर्ण टेस्ट को नियमित रूप से कराना चाहिए। यह आपको डायबिटीज़ के कारण होने वाली बड़ी बीमारियों से बचने में मदद करेगा और आपकी सेहत को नियंत्रित रखने में सहायक होगा। साथ ही, उचित खानपान, नियमित व्यायाम और डॉक्टरी सलाह के माध्यम से शुगर लेवल को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।