मां के किरदार में क्यों दिखती हैं Sheeba Chaddha, एक्ट्रेस ने बताई वजह
मां के रोल मिलने पर Sheeba Chaddha ने तोड़ी चुप्पी
मुंबई: बॉलीवुड अभिनेत्री शीबा चड्ढा ने फिल्मों और वेब सीरीज में बार-बार मां या बुआ जैसे किरदार मिलने और टाइपकास्ट होने को लेकर खुलकर बात की है। करीब तीन दशक के अभिनय करियर में अलग-अलग भूमिकाएं निभा चुकीं शीबा ने माना कि उन्हें काफी हद तक एक खास तरह के किरदारों में बांध दिया गया है। हालांकि अभिनेत्री का कहना है कि उन्होंने इस दायरे के भीतर भी अपने किरदारों को अलग और दिलचस्प बनाने की कोशिश की है।
शीबा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि कई बार उन्हें ऐसे अभिनेताओं की मां का किरदार मिला जो उनसे केवल 10-12 साल छोटे थे। शुरुआत में यह उनके लिए हैरान करने वाला था, लेकिन बाद में उन्होंने इसे काम का हिस्सा मानकर स्वीकार किया। उनके मुताबिक लगातार इसका विरोध करने पर कलाकार के पास काम के विकल्प कम हो सकते हैं।
अभिनेत्री का मानना है कि पर्दे पर मां के किरदारों की प्रस्तुति पहले के मुकाबले काफी बदली है। पहले मां को अक्सर रोने वाली या कहानी में निष्क्रिय भूमिका तक सीमित रखा जाता था, लेकिन अब लेखन में बदलाव आया है। आधुनिक फिल्मों और सीरीज में मां को एक स्वतंत्र व्यक्तित्व के रूप में भी दिखाया जा रहा है, जिसकी अपनी सोच, इच्छाएं और संघर्ष हैं।
शीबा चड्ढा ने 'बधाई दो', 'मिर्जापुर', 'बैंडिश बैंडिट्स', 'ताज महल 1989' और 'द ट्रायल' जैसे कई प्रोजेक्ट में अलग-अलग किरदार निभाए हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में उन्हें पहले के मुकाबले अधिक विविध और बारीक भूमिकाएं मिलने लगी हैं, लेकिन मां और बुआ जैसे किरदारों का दायरा अब भी उनके करियर का बड़ा हिस्सा है।
इस बीच शीबा अपनी आगामी फिल्म 'रामायण' को लेकर भी चर्चा में हैं। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही फिल्म में वह मंथरा की भूमिका निभा रही हैं। फिल्म में रणबीर कपूर राम, साई पल्लवी सीता और यश रावण की भूमिका में हैं।
मंथरा के किरदार की तैयारी के बारे में शीबा ने बताया कि उन्होंने इसके लिए कोई लंबी-चौड़ी बैकस्टोरी तैयार नहीं की। उनका मानना है कि रामायण और मंथरा के चरित्र से दर्शक पहले ही परिचित हैं, इसलिए उन्होंने मूल कथा में मौजूद किरदार को आधार बनाकर अभिनय किया। अभिनेत्री ने इतने बड़े सिनेमाई प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने पर खुशी भी जाहिर की है।
शीबा के मुताबिक कलाकार के लिए चुनौती केवल भूमिका का आकार नहीं बल्कि उसके भीतर कुछ अलग तलाशना भी है। यही वजह है कि टाइपकास्ट होने की बात स्वीकार करने के बावजूद वह मां, बुआ या दूसरे सहायक किरदारों में भी अलग-अलग रंग दिखाने की कोशिश करती रही हैं। अब दर्शकों की निगाहें 'रामायण' में उनके मंथरा के किरदार पर टिकी हैं।