2005 में कांग्रेस के मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने मीडिया घराने को राजपुर रोड पर दी थी महंगी ज़मीन
मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने मीडिया घराने को राजपुर रोड पर दी थी महंगी ज़मीन
बात सन 2005 की है , देश के एक बहुत बड़े मीडिया घराने को कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व नारायण दत्त तिवारी ने एक काफी बड़ा जमीन का टुकड़ा शहर की सबसे महंगी राजपुर रोड पर दिया , उसका भूमि पूजन हुआ उसके बाद अब सुनते हैं वो जमीन उस मीडिया घराने ने कुछ कहते हैं बेंच दी कोई कहता है नगर निगम को वापस हो गई या क्या हुआ बहरहाल जिस काम के लिए जमीन दी गई वो आज तक न हुआ , खैर उसी भूमि पूजन में उत्तराखंड के एक संपादक जी की तारीफ तिवारी जी उस ग्रुप के डायरेक्टर से करते हैं और वो संपादक जी अगले दिन उस बड़े ग्रुप का ऑफर लेटर लेकर रेजिडेंट एडिटर बन जाते हैं , अब नए रेजिडेंट एडिटर को अपनी रंगबाजी दिखानी थी ग्रुप में तो वो तिवारी जी के पास एक प्रस्ताव लेकर आए विज्ञापन का ,मैं भी वहीं था ,उस समय स्वर्गीय दीदी इंदिरा हृदयेश जी सूचना प्रसारण मंत्री थी और सूचना विभाग उन्हीं के अधीन था । उस समय उस ग्रुप के आल एडिशन का डी ए वी पी रेट 1 पन्ने का लगभग 2 लाख बनता था, मगर इत्ते में क्या होता , तो कामर्शियल रेट ग्रुप से मंगाया गया , उस पर स्वर्गीय तिवारी जी ने जो नोट लिखा वो शब्दशः लिख रहा हूं।
प्रिय सूचना मंत्री मा इंदिरा जी , दैनिक ……….. देश का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित अखबार है , इस अखबार को 2 पेज का सरकारी विज्ञापन अधिकतम व्यावसायिक रेट पर देना राज्य हित में होगा ।
और वो अधिकतम व्यावसायिक रेट जिसको कमर्शियल रेट कहते हैं उसका 2 पेज का विज्ञापन तकरीबन 48 लाख का बना था ।
ऐसे ही स्वर्गीय दीदी इंदिरा जी ने तब एक नया चैनल को बोला चिंता क्यों करते हो 1 करोड़ का तुम्हारे संस्थान को करवाते हैं , और दीदी कभी किसी मीडिया हाउस को चाहे स्थानीय हो या बाहर का कभी मना नहीं करती थी । हां बस हंसी में कह देती थी यार तुम।लोग लिखवाने आ जाते हो मगर खबर में छील देते हो तो क्या फायदा लिखने का इस बजट के लिए ।
ये बात मैं तब की बता रहा हूँ जब उत्तराखंड का बजट मात्र 20000 करोड़ या थोड़ा सा ऊपर था , आलू 1 रुपए किलो और सरसों का तेल 35 रुपए लीटर था ।
तब भी राज्य का विज्ञापन बजट लगभग कुल बजट का .20 प्रतिशत रहता था , जब क्षेत्रीय चैनल कुल 4 थे और क्षेत्रीय अखबार 3 और नेशनल चैनल भी 3 ही थे आज तक, स्टार न्यूज और एन डी टी वी बाकी अंग्रेजी।अखबार दिल्ली से छप कर आते थे ।
आज जब राज्य का बजट 1लाख करोड़ है , अख़बार बड़े 5 और मंझोले छोटे लगभग 500 से अधिक जो स्थानीय संपादकों के हैं , इसके अलावा क्षेत्रीय चैनल 41 राष्ट्रीय चैनल 14 उत्तराखंड बेस्ड वेबसाइट जो यहीं के स्थानीय लोगों की हैं लगभग 1500 और जिलों से निकलने वाले अखबार जो स्थानीय लोगों के हैं लगभग 1000 ।
तो संख्या इतनी ज्यादा , आलू का भाव कहां है तेल 150 रुपए लीटर है और बच्चों की फीस 300 से 4000 हो गई तब धामी सरकार पुरानी कांग्रेस की सरकार की तरह 1 प्रतिशत की जगह 0.25 यानी चौथाई प्रतिशत खर्चा कर रही , यही वजह है विभिन्न मीडिया संस्थानों में जहां उत्तराखंड के स्थानीय पत्रकार और युवा काम।कर रहे हैं उनकी तनख्वाह बढ़ नहीं पा रही । सरकारिया आयोग लागू नहीं हो पा रहा , संस्थान को पैसा तो विज्ञापन से ही।मिलेगा और उसने सरकारी विज्ञापन का अहम रोल होता है । और विज्ञापन संस्थान के पास बढ़ कर जायेगा तो कर्मचारियों का भी भला होगा जो सब लगभग 99 प्रतिशत उत्तराखंड के निवासी हैं उनका ही भला होगा । तो #PushkarSinghDhami जी और राज्य के सूचना विभाग के डी जी Banshidhar Tiwari जी से अनुरोध है कि राज्य के स्थानीय पत्रकारों युवाओं और मीडिया कर्मियों की भलाई के लिए राज्य का विज्ञापन बजट कुल बजट का 1 प्रतिशत किया जाए कर्नाटक और उत्तर प्रदेश की तरह ।
आज देश की एक वेबसाइट ने उत्तराखंड की धामी सरकार पर एक रिपोर्ट छापी है या छपवाई गई है कि धामी सरकार ने 5 साल में 1000 करोड़ के विज्ञापन दे दिए जो मात्र 0.25 प्रतिशत यानी कुल बजट का 1 फीसदी भी नहीं है ,दे दिया गया तो भाई क्या गजब हो गया ।
अब मेरा कांग्रेस के मित्रों से कहना है कि थोड़ा थोड़ा कर्नाटक और 2018 से 2023 तक का बघेल चाचा के छत्तीसगढ़ के सूचना विभाग का बजट भी देख लें फिर गला साफ करते रहिएगा ,आखिर आप विपक्ष हैं आपको तो सत्ता को हर कीमत पर लपेटना ही है ।