विजय गर्ग : कोलंबिया के कार्टाजेना में गत माह आयोजित वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य पर दूसरे वैश्विक सम्मेलन में 2040 तक वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों को 50 प्रतिशत तक कम करने के साझा लक्ष्य पर सहमति बनी। इस अवसर पर 'स्वच्छ वायु कोष' की ओर से जलवायु और स्वास्थ्य से जुड़े प्रयासों के लिए अगले दो वर्षों में अतिरिक्त 90 मिलियन डालर आवंटित करने की प्रतिबद्धता भी जताई गई। यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वायु प्रदूषण आज वैश्विक स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है।
वायु प्रदूषण बीमारी और असामयिक मृत्यु के लिए दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरणीय जोखिम कारक बन गया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण हर साल लगभग 70 लाख लोगों की मौत हो जाती है, जिसमें मुख्य रूप से श्वसन और हृदय संबंधी बीमारियां जिम्मेदार हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, वैश्विक आबादी का 99 प्रतिशत हिस्सा ऐसे क्षेत्रों में रहता है, जहां वायु गुणवत्ता संस्था द्वारा निर्धारित मानक से नीचे है। प्रदूषित हवा में विद्यमान 2.5 पार्टिकुलेट मैटर कणों के संपर्क में आने से अस्थमा, कैंसर, स्ट्रोक और फेफड़ों की बीमारियों सहित विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियां उत्पन्न होती हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, प्रदूषित वायु बीच गुजर-बसर करने वाला एक व्यक्ति अपनी अनुमानित जीवन प्रत्याशा से 5.2 वर्ष तक कम जीने को विवश होता है। बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। आंकड़े बताते हैं कि 15 साल से कम उम्र के लगभग 93 प्रतिशत बच्चे प्रदूषित हवा में सांस लेने को अभिशप्त हैं। स्टेट आफ ग्लोबल एयर-2024 के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों में कुल सात लाख मौतों के लिए वायु प्रदूषण को जिम्मेदार माना गया। वायु प्रदूषण की चपेट में रहने से बढ़ती उम्र के साथ बच्चों का फेफड़े और मस्तिष्क का पर्याप्त विकास नहीं हो पाता है। इससे श्वसन संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है और रोगों से लड़ने की क्षमता भी कम हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से गर्भवती महिलाएं समय से पूर्व ही अपने बच्चे को जन्म दे सकती हैं। ऐसे बच्चों का वजन सामान्य से कम भी हो सकता है। अतः एक खुशहाल समाज की स्थापना के लिए वायुमंडल को स्वच्छ रखना आवश्यक है।
वायु प्रदूषण से निपटने के लिए ठोस और सतत प्रयासों की आवश्यकता है। स्वच्छ वायु केवल एक पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, मानव जीवन की मूल शर्त भी है। जब सांस ही संकटग्रस्त हो जाए, तो प्रगति के सारे दावे अर्थहीन हो जाते हैं। वायुमंडलीय प्रदूषण को नियंत्रित किए बिना इसके दूरगामी स्वास्थ्य प्रभावों से बचाव मुश्किल ही होगा। आइए इसके लिए सतत प्रयत्न करें।