गूगल इमेज का नस्लवाद
कहा जाता है कि हर तस्वीर में एक संदेश होता है। इसलिए अगर जर्मन प्रसारण संस्था- डॉयरे वेले अपने एक अध्ययन से इस निष्कर्ष पर पहुंचा है
NI एडिटोरियल: कहा जाता है कि हर तस्वीर में एक संदेश होता है। इसलिए अगर जर्मन प्रसारण संस्था- डॉयरे वेले अपने एक अध्ययन से इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि गूगल इमेज पर दिखने वाली किसी तस्वीरें इस कंपनी के नस्लवादी नजरिए को साबित करती हैं, तो इस बात को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। डॉयचे वेले 20,000 से अधिक तस्वीरों और वेबसाइटों का विश्लेषण किया। वह इस नतीजे पर पहुंचा कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी गूगल का एल्गॉरिदम पूर्वाग्रहों पर आधारित हैं। गूगल पर ब्राजील की महिला, थाईलैंड की महिला या यूक्रेन की महिला कीवर्ड के सर्च नतीजे, अमेरिका की महिला कीवर्ड से किए गए सर्च नतीजे की तुलना में ज्यादा नस्लवादी हैं। मसलन, अमेरिका या जर्मनी की महिलाएं यानी विकसित देशों की महिलाओं के बारे में सर्च करने पर राजनेताओं और एथलीट्स की ज्यादा तस्वीरें दिखती हैं।