आगाह के साथ चरम!

हालांकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित क्षेत्रों को पत्र लिखकर आगाह किया है

Update: 2022-01-28 19:14 GMT

हालांकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित क्षेत्रों को पत्र लिखकर आगाह किया है कि अब भी 407 जिलों में कोरोना वायरस की संक्रमण-दर 10 फीसदी या उससे अधिक है। करीब 141 जिलों में, 26 जनवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान, संक्रमण-दर 5-10 फीसदी के बीच रही है। साफ है कि कोरोना अभी नियंत्रित नहीं है। ओमिक्रॉन स्वरूप के प्रति भी सचेत किया गया है। जनवरी में ही ओमिक्रॉन के 9672 मामले दर्ज किए गए हैं। इस स्थिति को चिंताजनक माना गया है, हालांकि कोरोना के संक्रमित मामले बीते 10 दिनों में सबसे कम दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा 2.5 लाख रोज़ाना से भी कम हो गया है। देश में संक्रमित मामलों की कुल संख्या 4 करोड़ को पार कर चुकी है। दूसरी ओर विशेेषज्ञों का मानना है कि तीसरी लहर का 'चरमÓ गुजऱ चुका है। आगामी 2-3 सप्ताह में अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों की संख्या भी 90 फीसदी तक कम हो सकती है। महानगरों के साथ-साथ कस्बों में भी कमोबेश यही रुझान है।

विशेषज्ञ कोरोना संक्रमण की स्थिति को 'स्थिरभी आंक रहे हैं। उनका आकलन है कि कोरोना वायरस किसी अन्य विषाणु और रोग की तरह बदल चुका है। अब हमें अपनी रणनीति भी बदलनी चाहिए और कोरोना के बचे-खुचे संक्रमण के साथ जीने की आदत डालनी चाहिए। किसी भी वायरस की परिणति ऐसी ही होती है। हालांकि कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्रप्रदेश और राजस्थान में संक्रमण के मामले बढ़े हैं, जबकि महाराष्ट्र, दिल्ली, उप्र, हरियाणा, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में संक्रमित मामले लगातार कम हुए हैं। राजधानी दिल्ली में तो सप्ताहांत कफ्र्यू और बाज़ार पर लगी पाबंदियों को हटा लिया गया है अथवा उनमें ढील दी गई है। एक और महत्त्वपूर्ण रुझान देश के स्तर पर सामने आया है कि पहली बार उपचाराधीन सक्रिय मरीजों की संख्या 22.43 लाख से घटकर 21.95 लाख तक लुढ़क आई है। यह गिरावट कम है, लेकिन महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि कोरोना के मरीज अस्पताल छोड़ रहे हैं अथवा घरों पर ही स्वस्थ होकर अपने काम-धंधों में सक्रिय होने लगे हैं। सवाल है कि क्या कोरोना वायरस का मौजूदा दौर भी समापन की ओर है? अथवा आगाह के साथ तीसरी लहर के 'चरम को भी ग्रहण किया जाए? प्रख्यात चिकित्सक, हृदय रोग सर्जन एवं नारायणा हेल्थ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. देवी शेट्टी इसकी व्याख्या यूं करते हैं। उनका मानना है कि स्पेनिश फ्लू को 18 माह के संक्रमण के बाद समाप्त मान लिया गया था। हालांकि आज भी वह 'मौसमी फ्लू के रूप में सक्रिय है, लेकिन अब उसके लिए प्रयोगशाला में टेस्ट नहीं किए जाते। जिस तरह डेंगू, मलेरिया, एचआईवी के लिए सामूहिक टेस्ट कराए जाते हैं, उसी तरह अब कोरोना के लिए नहीं कराए जाने चाहिए। हम कोरोना मरीजों के टेस्ट तब करें, जब डॉक्टर इसकी सलाह दें। भारत ने एक देश के तौर पर कोरोना वैश्विक महामारी का मुकाबला किया है और पश्चिमी देशों से बेहतर किया है। अब करीब 2 साल की महामारी और तालाबंदी-सी स्थितियों के बाद हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिशें की जाएं। अब लॉकडाउन या बाज़ार पर तरह-तरह की पाबंदियां थोपने से रहा-बचा कोरोना काबू नहीं होगा। बहरहाल विशेषज्ञ इस पक्ष में भी नहीं हैं कि पश्चिम की तरह सब कुछ निरंकुश किया जाए। वे मास्क और दो गज की दूरी, भीड़ से बचने की कोरोना व्यवस्थाओं के पक्ष में हैं। उनसे वायरस निष्प्रभावी होगा। इसी संदर्भ में टीकाकरण सबसे महत्त्वपूर्ण और कारगर हथियार है। यह मौत के खिलाफ टीकाकरण है। यह हमारा सौभाग्य है कि सशक्त और व्यापक, नवोन्मेषी फार्मा और टीका निर्माता कंपनियां हमारे देश में हैं।

Divyahimachal

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