स्ट्रिंग थ्योरी के प्रणेता अशोक सेन ने भारत का मान बढ़ाया
स्ट्रिंग थ्योरी के प्रणेता अशोक सेन
भारतीय सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी अशोक सेन को प्रतिष्ठित 'ऑस्कर क्लेन मेडल' मिलना, क्वांटम ग्रेविटी और स्ट्रिंग थ्योरी के क्षेत्र में भारत की शोध उपलब्धियों का एक शानदार प्रमाण है। स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की 'नोबेल कमिटी फॉर फिजिक्स' द्वारा हर साल दिया जाने वाला यह मेडल, स्वीडिश सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी ऑस्कर क्लेन की बौद्धिक विरासत की याद दिलाता है। बेंगलुरु स्थित 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल साइंसेज' (ICTS) के प्रोफेसर अशोक सेन, यह मेडल पाने वाले पहले भारतीय हैं। यह उन वैज्ञानिकों के लिए एक बहुत बड़ा सम्मान है, जिन्होंने सैद्धांतिक भौतिकी (theoretical physics) में बुनियादी योगदान दिया है। उन्हें आधुनिक स्ट्रिंग थ्योरी के मुख्य रचनाकारों में से एक माना जाता है, और उनके काम ने वैज्ञानिकों को ब्लैक होल के रहस्यों को समझने में मदद की है। सेन को इससे पहले 'डिरैक मेडल' और 'ब्रेकथ्रू प्राइज इन फंडामेंटल फिजिक्स' जैसे प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं। स्ट्रिंग थ्योरी, क्वांटम थ्योरी और गुरुत्वाकर्षण (gravitation) के बीच की विसंगतियों को दूर करने का एक प्रमुख प्रयास है। इसका लक्ष्य भौतिकी का एक ऐसा नया 'ग्रैंड यूनिफाइड थ्योरी' (एकजुट सिद्धांत) खोजना है, जो बहुत छोटे उप-परमाणु कणों (subatomic particles) से लेकर विशाल आकाशगंगाओं तक, हर स्तर पर सभी कणों और बलों के व्यवहार को समझा सके। सरल शब्दों में कहें तो, स्ट्रिंग थ्योरी बताती है कि ब्रह्मांड के मूल निर्माण खंड (building blocks) बिंदु जैसे कण नहीं, बल्कि बहुत छोटे, एक-आयामी (one-dimensional) और कंपन करने वाले 'स्ट्रिंग' (तंतु) हैं। इन स्ट्रिंग्स के अलग-अलग कंपन पैटर्न से अलग-अलग गुणों (जैसे द्रव्यमान और आवेश) वाले कण बनते हैं। स्ट्रिंग थ्योरी का मुख्य उद्देश्य क्वांटम मैकेनिक्स को आइंस्टीन के 'जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी' (सामान्य सापेक्षता सिद्धांत) के साथ जोड़ना है। इसका लक्ष्य प्रकृति के चारों मूलभूत बलों — गुरुत्वाकर्षण, विद्युत चुंबकत्व (electromagnetism), प्रबल बल (strong force) और दुर्बल बल (weak force) — तथा सभी प्रकार के पदार्थों को एक ही ढांचे में समाहित करना है।
स्टीफन हॉकिंग, पीटर हिग्स और किप थॉर्न जैसे पूर्व ऑस्कर क्लेन मेडल विजेताओं की श्रेणी में शामिल होने वाले अशोक सेन ने अपना पूरा जीवन इस जटिल और उलझे हुए ब्रह्मांड को समझने, तथा गुरुत्वाकर्षण, क्वांटम मैकेनिक्स और ब्लैक होल के बीच के गहरे संबंधों को खोजने में लगा दिया। उनके काम ने स्ट्रिंग थ्योरी को एक नया रूप दिया है और वैज्ञानिकों को ब्लैक होल, मूलभूत बलों और स्वयं प्रकृति के गहरे तर्क को समझने के नए तरीके दिए हैं। 2012 में, सेन को 'ब्रेकथ्रू प्राइज इन फंडामेंटल फिजिक्स' से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें उनके उस काम के लिए मिला, जिससे यह समझने में मदद मिली कि अलग-अलग स्ट्रिंग थ्योरी असल में एक गहरे और बुनियादी सिद्धांत के ही अलग-अलग रूप (या सीमाएं) हो सकती हैं। विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें 2001 में पद्म श्री और 2013 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। हाल के वर्षों में भारतीय वैज्ञानिकों को मिले भौतिकी के शीर्ष सम्मानों की श्रृंखला में 'ऑस्कर क्लेन मेडल' सबसे नया है। इस साल की शुरुआत में, सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी दीपक धर को 'डिराक मेडल' देने की घोषणा की गई। इस तरह वे सेन के बाद यह सम्मान पाने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं। कुछ साल पहले, धर को भौतिकी का एक और प्रमुख पुरस्कार, 'बोल्ट्ज़मैन मेडल' भी दिया गया था। वे एकमात्र ऐसे भारतीय हैं जिन्हें डिराक मेडल और बोल्ट्ज़मैन मेडल, दोनों मिले हैं।