म्यांमार में सैनिक तख्ता पलट के बाद इस बार वहां की जनता ने गजब का जज्बा दिखाया है। सैनिक शासकों की तमाम ज्यादतियों का विरोध करते हुए लगभग रोज ही दसियों हजार लोग शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग ले रहे हैं। इससे सैनिक शासक परेशान हैं। इसीलिए उन्होंने अब दमन और तेज कर दिया है। अब यंगून की सड़कों पर बख्तरबंद गाड़ियां और सैनिकों के दस्तों को उतार दिया गया है। देश के बाकी हिस्से में भी सेना की तैनाती बढ़ा दी गई है। सोमवार को कई घंटे तक इंटरनेट बंद रहा। ज्यादातर लोगों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करने दिया जा रहा है। ये आशंका मजबूत हो रही है कि सेना विरोध करने वालों पर ज्यादा सख्त कार्रवाई कर सकती है। उत्तरी शहर मितकिना में सैनिकों ने रविवार की रात पहले आंसू गैस के गोले दागे और फिर गोलियां चलाई। हालांकि यह पता नहीं चल सका है कि वो असली गोलियां थीं या फिर रबर बुलेट।
मगर सैन्य प्रशासन की इन सारी कवायदों के बावजूद प्रदर्शन करने वाले लोग डटे हुए हैं। यंगून में इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी के सैकड़ों छात्र भी प्रदर्शन करने सड़कों पर निकले हैं। शहर के दक्षिणी हिस्से में भी सोमवार को हुई एक रैली को फेसबुक पर लाइव स्ट्रीम के जरिए दिखाया गया। इस रैली में सैकड़ों लोग बैंड के साथ मार्च करते नजर आए। राजधानी नेप्यीदॉ और म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले में बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन करने निकले हैं। एक शहर में तो कुछ पुलिस अधिकारी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। तो इस तरह फिलहाल ऐसा लगता है कि इस बार सैनिक शासकों के लिए देश पर अपना शिकंजा पूरी तरह कस देना आसान नहीं होगा। अब बात सिर्फ यह नहीं है कि पश्चिमी देश सैनिक तख्ता पलट की निंदा कर रहे हैं। बल्कि अब देश के अंदर लोग इसे स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं। बेशक चीन और म्यांमार के पड़ोसी देशों का रुख सैनिक शासकों के माफिक है। लेकिन आखिरकार उन्हें देश की जनता पर ही शासन करना है, जो लंबे संघर्ष के बाद हासिल हुए सीमित लोकतंत्र को गंवाने को तैयार नहीं दिख रही है। गौरतलब है कि सेना ने दो हफ्ते उस तख्ता पलट कर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी, जब नव निर्वाचित संसद की पहली बैठक होने वाली थी।