सरकार युवाओं के लिए क्या कर रही पीएम मोदी से अभिजीत दीपके ने मांगा जवाब
नई दिल्ली : स्वतंत्रता दिवस से पहले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से युवाओं के मुद्दों पर सीधा संवाद करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त के अवसर पर प्रधानमंत्री को देश के युवाओं को संबोधित करते हुए यह बताना चाहिए कि केंद्र सरकार शिक्षा, बेरोजगारी और बढ़ती महंगाई जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अब तक क्या कदम उठा चुकी है और आगे की क्या योजना है। दीपके ने इस मांग के समर्थन में एक ऑनलाइन याचिका भी शुरू की है और लोगों से उस पर हस्ताक्षर करने की अपील की है।
अभिजीत दीपके ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि स्वतंत्रता दिवस केवल राष्ट्रीय उपलब्धियों का जश्न मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों का जवाब देने का भी उपयुक्त समय है। उन्होंने कहा कि देश का बड़ा वर्ग शिक्षा, रोजगार और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को लेकर चिंतित है। ऐसे में प्रधानमंत्री को इन मुद्दों पर खुलकर अपनी सरकार का पक्ष रखना चाहिए। उन्होंने पोस्ट में कहा कि यदि लोग इस मांग से सहमत हैं तो वे ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर कर इसे समर्थन दें। इसके साथ उन्होंने याचिका का लिंक भी साझा किया।
दीपके ने अपने बयान में भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने भाजपा से आग्रह किया कि वह आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की हालिया सलाह को गंभीरता से अपनाए। उनका कहना था कि भागवत ने युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों को राष्ट्रविरोधी करार देने की प्रवृत्ति का विरोध किया है और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। दीपके ने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके वैचारिक मार्गदर्शक आरएसएस के बीच कई मुद्दों पर विचारों में अंतर दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि 'जेन-जी' यानी नई पीढ़ी के युवाओं की शिकायतें वास्तविक और जायज हैं। भागवत ने यह भी कहा था कि किसी मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन करने भर से युवाओं को राष्ट्रविरोधी नहीं कहा जा सकता। दीपके का कहना है कि यदि आरएसएस प्रमुख स्वयं यह बात कह रहे हैं तो भाजपा को भी उसी सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए और युवाओं की आवाज सुननी चाहिए।
अभिजीत दीपके ने विशेष रूप से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि लाखों छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अपनी नाराजगी जताई थी। उनके अनुसार युवाओं के आंदोलन को केवल राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय उसकी मूल समस्याओं को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, समय पर भर्ती प्रक्रिया और रोजगार के अवसर आज देश के युवाओं की सबसे बड़ी प्राथमिकताएं हैं।
दीपके ने कहा कि बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी, पेपर लीक और बढ़ती महंगाई जैसी समस्याओं के कारण युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर प्रधानमंत्री यदि इन विषयों पर विस्तार से अपनी सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी देंगे तो इससे युवाओं में विश्वास बढ़ेगा और सरकार तथा जनता के बीच संवाद मजबूत होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सरकार और नागरिकों के बीच खुला संवाद आवश्यक है। उनके अनुसार युवाओं के सवालों का जवाब देना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त के अपने संबोधन में शिक्षा सुधार, रोजगार सृजन, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बात करेंगे।
फिलहाल प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अभिजीत दीपके की इस अपील पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट और ऑनलाइन याचिका को लेकर विभिन्न वर्गों के लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इस पहल का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य इसे राजनीतिक पहल के रूप में देख रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस से पहले यह मांग अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनती नजर आ रही है।