नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने रायसीना रोड से जंतर-मंतर तक मार्च निकाला। यह प्रदर्शन चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच आयोजित किया गया। इसी मुद्दे पर कांग्रेस ने कई राज्यों में भी विरोध प्रदर्शन किए।कांग्रेस ने 25 सितंबर को अपने प्रदेश संगठनों को संबंधित चुनाव कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करने का निर्देश दिया था। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और उनके कार्यकाल में चुनावी प्रक्रिया तथा मतदाता सूची से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग कर रही है। कांग्रेस ने 28 सितंबर को जिला स्तर पर भी प्रदर्शन की योजना बनाई है।
दिल्ली में प्रदर्शन को देखते हुए चुनाव आयोग कार्यालय और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई। पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया और संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई। यूथ कांग्रेस ने 5 रायसीना रोड से जंतर-मंतर तक मार्च का कार्यक्रम रखा था।प्रदर्शन के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यूथ कांग्रेस अपना आंदोलन जारी रखेगी। चिब ने कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई और जेल भेजे जाने की मांग करते हुए बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। ये आरोप और मांगें यूथ कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति हैं; मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आपराधिक दोष का कोई न्यायिक निष्कर्ष इन प्रदर्शनों से स्थापित नहीं होता।
विरोध प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन है। कांग्रेस का आरोप है कि SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े कुछ फैसलों में गंभीर सवाल हैं। पार्टी इन प्रक्रियाओं और मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में हुए मतदाता सूची संबंधी बदलावों की स्वतंत्र जांच की मांग कर रही है।दूसरी ओर चुनाव आयोग ने उसके भीतर संरचनात्मक मतभेद होने की व्याख्या को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि किसी प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले चुनाव आयुक्तों की ओर से सवाल, प्रशासनिक सुझाव और टिप्पणियां देना बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था के सामान्य कामकाज का हिस्सा है। आयोग के अनुसार SIR सहित अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
दिल्ली के साथ देश के अन्य हिस्सों में भी शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। गुवाहाटी में असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई समेत कई नेताओं को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया। चंडीगढ़ और पटना में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। लखनऊ, देहरादून और जम्मू-कश्मीर समेत दूसरे स्थानों पर भी विरोध कार्यक्रम हुए।कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी पार्टी के देशव्यापी कार्यक्रम की घोषणा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने, उनकी गिरफ्तारी और चुनावी सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की थी। पार्टी ने सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को 25 सितंबर को प्रदर्शन आयोजित करने के निर्देश दिए थे।
SIR को लेकर राजनीतिक विवाद पिछले कुछ समय से लगातार तेज हुआ है। कांग्रेस और उसके नेता चुनाव आयोग पर मतदाता सूची के प्रबंधन को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं का बचाव करते हुए कहा है कि मतदाता सूची और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े वैधानिक काम निर्धारित अधिकारियों और सुरक्षित व्यवस्था के माध्यम से किए जाते हैं।दिल्ली में शुक्रवार का यूथ कांग्रेस मार्च इसी व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा रहा। कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। राजधानी में पहले से सुरक्षा बढ़ाए जाने के कारण प्रदर्शन वाले इलाकों में पुलिस की मौजूदगी भी रही।
इससे पहले 23 सितंबर को भी यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रायसीना रोड स्थित अपने कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। उस दौरान पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका था। तब भी प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई थी।अब कांग्रेस ने इस मुद्दे को राज्य और जिला स्तर तक ले जाने की रणनीति बनाई है। पार्टी की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में लिए गए संबंधित फैसलों और मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा हो। चुनाव आयोग की ओर से कांग्रेस के व्यापक राजनीतिक आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है और आयोग अपनी प्रक्रियाओं को नियमों के अनुरूप बताता रहा है।शुक्रवार का प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक टकराव फिलहाल जारी रहने वाला है। एक तरफ कांग्रेस और यूथ कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग अपनी निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूची प्रबंधन का बचाव कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और संस्थागत प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण रहेंगी।
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