हम टेलीग्राफ से डिजिटल युग तक भारत की यात्रा का जश्न मना रहे हैं: सीपी राधाकृष्णन
Delhi दिल्ली: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को विज्ञान भवन में भारतीय दूरसंचार सेवा (आईटीएस) के हीरक जयंती समारोह को संबोधित करते हुए सभी सेवारत और सेवानिवृत्त आईटीएस अधिकारियों को छह दशकों की विशिष्ट सेवा के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह केवल सेवा के साठ वर्ष पूरे करने का अवसर नहीं है, बल्कि टेलीग्राफ के युग से लेकर डिजिटल युग तक भारत की यात्रा का जश्न है।
राधाकृष्णन ने आईटीएस को डिजिटल इंडिया की रीढ़ बताते हुए कहा कि यह सेवा देश के हर हिस्से को जोड़ने और राष्ट्रीय आपात स्थितियों में निरंतरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि जैसे-जैसे भारत 5जी, 6जी, सैटेलाइट इंटरनेट और क्वांटम संचार की ओर बढ़ रहा है, वे नैतिकता, समानता और उत्कृष्टता के मूल मूल्यों को बनाए रखें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी का उद्देश्य मानवता की सेवा होना चाहिए और किसी भी नागरिक को पीछे नहीं छोड़ना चाहिए।
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आईटीएस की परिवर्तनकारी यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि टेलीग्राफी और मैनुअल एक्सचेंजों के युग से लेकर 5जी, एआई-संचालित प्रणालियों और 6जी तकनीक तक, आईटीएस भारत के डिजिटल विकास की रीढ़ रही है। उन्होंने अधिकारियों को निरंतर सीखने, जिज्ञासु रहने, सुधार करने और नवाचार में अग्रणी बनने का मंत्र दिया। संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने कहा कि आईटीएस ने सुरक्षित और सस्ती डिजिटल संरचना बनाई है, जिससे भारत तकनीक का उपभोक्ता नहीं बल्कि टेलीकॉम प्रोडक्ट नेशन बन रहा है। सचिव (दूरसंचार) डॉ. नीरज मित्तल ने आईटीएस की तकनीकी और प्रबंधकीय उत्कृष्टता की सराहना करते हुए इसे देश के डिजिटल विकास का आधार बताया।
उन्होंने कहा कि बीएसएनएल का स्वदेशी 4जी स्टैक और मजबूत टेलीकॉम बैकबोन आईटीएस की विशेषज्ञता का उदाहरण हैं। आईटीएस अधिकारी सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन के असली अगुआ रहे हैं। उपराष्ट्रपति ने आईटीएस को समावेशिता और परिवर्तन के शांत इंजीनियर बताते हुए भविष्य में ज्ञान और समानता के सेतु बनाने की प्रेरणा दी। इस समारोह में आईटीएस के छह दशकों की सेवा और डिजिटल इंडिया की विकास यात्रा का जश्न मनाया गया।