नई दिल्ली। BRICS शिखर सम्मेलन के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) को लेकर बड़ा संदेश दिया। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई देशों के नेताओं की मौजूदगी में पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया को क्रिटिकल मिनरल्स को हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने सभी देशों से पारदर्शी, भरोसेमंद और स्थिर आपूर्ति श्रृंखला बनाने की अपील की।
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया में तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और ऊर्जा क्षेत्र के लिए जरूरी खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इन खनिजों की आपूर्ति कुछ चुनिंदा देशों पर निर्भर होने के कारण वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ी है।
क्रिटिकल मिनरल्स क्यों हैं अहम?
क्रिटिकल मिनरल्स ऐसे खनिज होते हैं, जिनकी आधुनिक तकनीक और उद्योगों में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनमें लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और अन्य खनिज शामिल हैं।
इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, मोबाइल फोन, कंप्यूटर चिप, रक्षा उपकरण, सौर ऊर्जा और कई हाईटेक उत्पादों में किया जाता है। आने वाले समय में स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ इनकी जरूरत और बढ़ने की संभावना है।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
BRICS मंच से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक विकास के लिए जरूरी संसाधनों की उपलब्धता को लेकर देशों के बीच भरोसा और सहयोग होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि किसी भी देश को महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया को ऐसी आपूर्ति श्रृंखला की जरूरत है जो सुरक्षित, स्थिर और सभी देशों के हितों को ध्यान में रखने वाली हो।
चीन की भूमिका पर रहती है नजर
क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में चीन की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। चीन कई दुर्लभ खनिजों के उत्पादन और प्रोसेसिंग में बड़ी हिस्सेदारी रखता है।
यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर कई देश अपनी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और किसी एक देश पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
भारत की रणनीति
भारत भी क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। सरकार का लक्ष्य घरेलू खोज, रिसर्च और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के जरिए जरूरी खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
भारत इलेक्ट्रिक वाहन, रिन्यूएबल एनर्जी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में इन खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति देश की आर्थिक और रणनीतिक जरूरत बन गई है।
BRICS में आर्थिक सहयोग पर चर्चा
BRICS सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, तकनीक और विकास से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। सदस्य देशों ने आपसी सहयोग बढ़ाने और विकासशील देशों की भूमिका मजबूत करने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी BRICS को आर्थिक सहयोग और वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया।
तकनीकी विकास से जुड़ा बड़ा मुद्दा
आज की दुनिया में तकनीकी विकास सीधे तौर पर खनिज संसाधनों से जुड़ा हुआ है। इलेक्ट्रिक कारों से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित उपकरणों तक, कई क्षेत्रों के लिए जरूरी सामग्री की मांग बढ़ रही है।
ऐसे में संसाधनों की उपलब्धता और उनकी सप्लाई चेन को लेकर देशों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है।
भारत का संदेश साफ
प्रधानमंत्री मोदी के बयान को भारत की रणनीतिक सोच के रूप में देखा जा रहा है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सभी देशों को समान अवसर मिलने चाहिए और संसाधनों का इस्तेमाल सहयोग के लिए होना चाहिए, दबाव बनाने के लिए नहीं।
BRICS जैसे मंच पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में पीएम मोदी का यह संदेश वैश्विक स्तर पर भारत के रुख को सामने रखता है।
आने वाले समय में क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर दुनिया के देशों के बीच सहयोग, निवेश और नई साझेदारियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। भारत का जोर है कि संसाधनों की राजनीति के बजाय साझेदारी और भरोसे के आधार पर वैश्विक विकास को आगे बढ़ाया जाए।