नई दिल्ली। देश में जातिगत जनगणना को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि जाति गणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए भी अलग से स्पष्ट कॉलम होना चाहिए। पार्टी का कहना है कि जब अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए अलग श्रेणी मौजूद है तो OBC के लिए अलग विकल्प क्यों नहीं दिया जा रहा।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में OBC की सही संख्या और सामाजिक स्थिति का आंकड़ा सामने नहीं आ पाएगा। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जाति गणना की प्रक्रिया में बदलाव करने और इसे ज्यादा पारदर्शी बनाने की मांग की है।
OBC कॉलम को लेकर कांग्रेस का सवाल
कांग्रेस का कहना है कि देश की बड़ी आबादी अन्य पिछड़ा वर्ग से आती है, लेकिन अगर जनगणना फॉर्म में OBC के लिए अलग पहचान नहीं होगी तो वास्तविक आंकड़े जुटाना मुश्किल होगा।
पार्टी नेताओं का तर्क है कि SC और ST वर्ग के लिए पहले से अलग श्रेणियां मौजूद हैं। ऐसे में OBC समुदाय के लिए भी उसी तरह स्पष्ट विकल्प होना चाहिए, ताकि सामाजिक और आर्थिक योजनाएं सही आंकड़ों के आधार पर बनाई जा सकें।
कांग्रेस का कहना है कि केवल लोगों से उनकी जाति पूछना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने की जरूरत है।
राहुल गांधी और खरगे ने PM मोदी को लिखा पत्र
जाति गणना के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव की मांग की है। कांग्रेस ने मौजूदा प्रश्नावली को वापस लेने और अधिक स्पष्ट व्यवस्था बनाने की अपील की है
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जातिगत आंकड़े सही तरीके से सामने आने चाहिए, ताकि सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियां और योजनाएं बेहतर तरीके से तैयार की जा सकें।
सरकार के फैसले पर विपक्ष का हमला
कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लंबे समय से देशव्यापी जातिगत जनगणना की मांग करते रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि बिना जातिगत आंकड़ों के पिछड़े वर्गों की वास्तविक स्थिति का आकलन करना मुश्किल है।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार ने जाति गणना को स्वीकार तो किया, लेकिन उसकी प्रक्रिया ऐसी रखी जा रही है जिससे OBC समुदाय का पूरा आंकड़ा सामने नहीं आएगा।
हालांकि, सरकार की ओर से जाति आधारित आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग तर्क दिए जाते रहे हैं। केंद्र का कहना रहा है कि जनगणना को व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से पूरा किया जाना जरूरी है।
जातिगत जनगणना क्यों है बड़ा मुद्दा?
भारत में जातिगत जनगणना लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय रही है। समर्थकों का कहना है कि इससे अलग-अलग समुदायों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को समझने में मदद मिलेगी।
जातिगत आंकड़ों के आधार पर शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाओं को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है। वहीं आलोचकों का कहना है कि जाति आधारित आंकड़ों का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए भी हो सकता है।
OBC आरक्षण से जुड़ा है मामला
जातिगत जनगणना की मांग का एक बड़ा संबंध OBC आरक्षण से भी जुड़ा हुआ है। कई राजनीतिक दलों का कहना है कि पिछड़े वर्गों की वास्तविक आबादी और स्थिति सामने आने के बाद नीतियां ज्यादा प्रभावी बनाई जा सकती हैं।
देश में OBC वर्ग को केंद्र सरकार की नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण मिलता है। ऐसे में जातिगत आंकड़ों को लेकर बहस और तेज हो जाती है। ([Navbharat Times][5])
बिहार और तेलंगाना मॉडल का दिया हवाला
कांग्रेस ने जातिगत सर्वे के लिए बिहार और तेलंगाना के मॉडल का उदाहरण दिया है। पार्टी का कहना है कि इन राज्यों में अपनाई गई प्रक्रिया के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर भी जाति गणना कराई जा सकती है।
कांग्रेस नेताओं का दावा है कि पहले से निर्धारित श्रेणियों और व्यवस्थित तरीके से आंकड़े जुटाने पर ज्यादा सटीक जानकारी मिल सकती है।
बीजेपी का क्या रुख?
बीजेपी की ओर से जातिगत जनगणना को लेकर कई बार कहा गया है कि सरकार सभी वर्गों के विकास के लिए काम कर रही है। पार्टी का कहना है कि जनगणना जैसी प्रक्रिया में संतुलन और संवैधानिक व्यवस्था का ध्यान रखना जरूरी है।
सत्तारूढ़ दल विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश बताता रहा है।
आगे क्या होगा?
जाति गणना को लेकर कांग्रेस की मांग के बाद अब यह मुद्दा संसद और राजनीतिक मंचों पर और जोर पकड़ सकता है। विपक्ष सरकार से प्रक्रिया में बदलाव की मांग कर रहा है, जबकि सरकार की ओर से अंतिम व्यवस्था पर नजर बनी हुई है।
जातिगत आंकड़े देश की सामाजिक संरचना, आरक्षण व्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े होने के कारण यह मुद्दा आने वाले समय में भी राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।
फिलहाल कांग्रेस का सवाल साफ है कि जब SC और ST के लिए अलग कॉलम हो सकता है तो OBC के लिए क्यों नहीं। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या कदम उठाती है।