नई दिल्ली: एक परिवार के साहसिक और मानवता से भरे फैसले ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाले 27 वर्षीय युवक की मौत को दो सैनिकों के लिए नई जिंदगी की उम्मीद में बदल दिया। ब्रेन डेड घोषित किए गए युवक के परिजनों ने अंगदान का निर्णय लिया, जिसके बाद उसका लिवर और एक किडनी सेना के दो जवानों में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित की गई। यह अंगदान नई दिल्ली स्थित जेपीएन एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में किया गया। युवक की हालत गंभीर होने के बाद डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित किया था। इसके बाद परिवार ने दुख की घड़ी में बड़ा फैसला लेते हुए उसके अंगों को जरूरतमंद मरीजों को दान करने की सहमति दी। परिवार के इस निर्णय से दो सेना के जवानों को जीवन बचाने का मौका मिला। युवक का लिवर और किडनी निकालकर सुरक्षित तरीके से सेना के अस्पताल रिसर्च एंड रेफरल (R&R) पहुंचाया गया, जहां दोनों अंगों का सफल प्रत्यारोपण किया गया। फिलहाल दोनों जवानों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है और वे स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं।

दुख की घड़ी में लिया मानवता भरा फैसला
किसी अपने को खोना परिवार के लिए बेहद कठिन समय होता है, लेकिन इस परिवार ने अपने दुख को दूसरों की जिंदगी बचाने की वजह बना दिया। अंगदान के इस फैसले ने न सिर्फ दो सैनिकों को नया जीवन दिया, बल्कि समाज के सामने मानवता की बड़ी मिसाल भी पेश की।
डॉक्टरों और सेना के बीच बेहतर तालमेल
अंगों को समय पर पहुंचाने और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए सिविल और सैन्य चिकित्सा टीमों ने मिलकर काम किया। विशेषज्ञों के अनुसार अंग प्रत्यारोपण में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है, इसलिए तेज समन्वय से दोनों मरीजों को फायदा मिला।
अंगदान से मिलती है नई उम्मीद
देश में हर साल बड़ी संख्या में मरीज लिवर, किडनी और अन्य अंगों के प्रत्यारोपण का इंतजार करते हैं। ऐसे में ब्रेन डेड मरीजों के परिजनों द्वारा लिया गया अंगदान का फैसला कई लोगों के जीवन में बदलाव ला सकता है। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि अंगदान किसी व्यक्ति की जिंदगी खत्म होने के बाद भी कई लोगों को नई शुरुआत दे सकता है। एक परिवार की संवेदनशील सोच ने दो सैनिकों को फिर से स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ने का मौका दिया।
Tags: