JMI में दो दशक पुराना गतिरोध खत्म, छात्र संघ चुनाव पर बनी ऐतिहासिक सहमति
नई दिल्ली : 30 अक्टूबर 2026। दिल्ली के प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) में छात्र संघ चुनाव को लेकर करीब 20 वर्षों से चला आ रहा गतिरोध समाप्त होने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच लंबे समय तक चली बातचीत के बाद छात्र संघ चुनाव बहाल करने के लिए समयसीमा निर्धारित कर दी गई है। इस फैसले का विश्वविद्यालय के शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने स्वागत किया है। शुक्रवार को जामिया के अंसारी ऑडिटोरियम के लॉन में आयोजित धन्यवाद कार्यक्रम में 2,000 से अधिक कर्मचारियों ने हिस्सा लिया और विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रयासों की सराहना की। कर्मचारियों ने कहा कि संवाद और आपसी सहमति के माध्यम से लंबे समय से लंबित समस्या का समाधान निकालना संस्थान के लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर करीब 3:30 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। कर्मचारियों ने 29 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने धैर्य और समझदारी के साथ छात्रों की मांगों पर विचार किया। उनका कहना था कि प्रशासन ने विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखने के साथ छात्रों के हितों को भी प्राथमिकता दी।विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने विशेष रूप से इस बात की सराहना की कि लंबे समय से विवाद का विषय बने छात्र संघ चुनाव को लेकर प्रशासन ने स्पष्ट प्रक्रिया और समयसीमा निर्धारित की है। इससे विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधित्व की बहाली का रास्ता खुल गया है। कर्मचारियों ने इसे जामिया की लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।दरअसल, जामिया मिल्लिया इस्लामिया में वर्ष 2006 से केंद्रीय छात्र संघ का चुनाव नहीं हुआ है। लगभग दो दशकों से छात्र संगठन चुनाव बहाल करने की मांग कर रहे थे। इस दौरान कई बार धरना-प्रदर्शन और प्रशासन से बातचीत हुई, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
इस वर्ष अक्टूबर में छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया। विश्वविद्यालय के कई छात्रों ने 12 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। आंदोलन लगातार 18 दिनों तक चला। इस दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने और चुनाव की निश्चित तारीख घोषित करने की मांग की।आंदोलन के दौरान छात्रों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और कई स्थानों पर पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। कुछ छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की गई थी। पढ़ाई प्रभावित होने के कारण कक्षाओं को ऑनलाइन संचालित करना पड़ा।
छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्र संघ नहीं होने के कारण उनकी समस्याओं को प्रभावी तरीके से प्रशासन तक पहुंचाने में कठिनाई होती है। छात्रावास, पुस्तकालय, पेयजल, शिक्षण सुविधाओं और अन्य शैक्षणिक विषयों को लेकर वे एक लोकतांत्रिक प्रतिनिधि संस्था की मांग कर रहे थे।लगातार बातचीत के बाद 29 अक्टूबर की शाम विश्वविद्यालय प्रशासन ने नया आदेश जारी किया। इसके अनुसार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने और लागू करने की प्रक्रिया 15 मई 2027 तक पूरी की जाएगी। इसके बाद अगले शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ होने के छह सप्ताह के भीतर छात्र संघ चुनाव आयोजित किए जाएंगे। इस प्रकार लगभग 20 वर्षों बाद विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्र संघ की वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिजवी ने स्पष्ट किया कि छात्र संघ के संविधान का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में विभिन्न संकायों के छात्र प्रतिनिधियों, शिक्षकों और कानूनी विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। मसौदे की समीक्षा और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे संबंधित विश्वविद्यालय निकायों की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।प्रशासन ने आंदोलन के दौरान छात्रों के खिलाफ जारी अनुशासनात्मक नोटिस, निलंबन और परिसर में प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंधों को वापस लेने का फैसला भी किया है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय में नियमित ऑफलाइन कक्षाएं 2 नवंबर से दोबारा शुरू करने की घोषणा की गई है।
शुक्रवार को आयोजित धन्यवाद कार्यक्रम में शिक्षकों और कर्मचारियों ने बताया कि विवाद के समाधान के लिए प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच लगभग आठ दौर की बैठकें हुई थीं। कर्मचारियों ने कहा कि लगातार संवाद के माध्यम से दोनों पक्षों की चिंताओं पर विचार किया गया और अंततः सहमति बनी।कर्मचारियों ने केंद्र सरकार, विशेष रूप से शिक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय के सहयोग तथा मार्गदर्शन के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उनका कहना था कि पिछले दो सप्ताह के दौरान विश्वविद्यालय में सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयासों में विभिन्न स्तरों पर सहयोग मिला।
हालांकि, धन्यवाद कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और कर्मचारियों ने परिसर में हुई कथित तोड़फोड़ और आपत्तिजनक नारे लिखे जाने की घटनाओं पर चिंता भी जताई। उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इन घटनाओं के संबंध में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर छात्र आंदोलन को लेकर सामने आई विभाजनकारी टिप्पणियों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस समझौते को किसी एक पक्ष की जीत और दूसरे की हार के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह समाधान छात्रों, शिक्षकों और प्रशासन के सामूहिक हित में है।
दूसरी ओर, आंदोलनकारी छात्रों ने इस फैसले को लंबे संघर्ष की सफलता बताया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से समयसीमा घोषित किए जाने के बाद छात्रों ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। छात्र नेता एबिन बेसिल और अन्य प्रदर्शनकारियों ने साथियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। फैसले के बाद परिसर में छात्रों ने जश्न भी मनाया।यह घटनाक्रम जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 106वें स्थापना दिवस के अवसर पर सामने आया। विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1920 में हुई थी। शिक्षा, स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक विचारों के इतिहास में जामिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में स्थापना दिवस के अवसर पर छात्र संघ चुनाव की बहाली की दिशा में सहमति को विश्वविद्यालय समुदाय के विभिन्न वर्गों ने विशेष महत्व दिया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती निर्धारित समयसीमा के अनुसार छात्र संघ के संविधान को अंतिम रूप देना और चुनाव प्रक्रिया पूरी करना होगी। छात्रों की अपेक्षा है कि उन्हें अगले शैक्षणिक सत्र में निर्वाचित प्रतिनिधित्व प्राप्त होगा।करीब 20 वर्षों के लंबे गतिरोध के बाद सामने आया यह समझौता जामिया में छात्र प्रतिनिधित्व की बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, वास्तविक चुनाव अभी होने बाकी हैं। आने वाले महीनों में संविधान की मंजूरी और चुनाव कार्यक्रम के क्रियान्वयन से ही यह स्पष्ट होगा कि लंबे समय से लंबित प्रक्रिया किस प्रकार पूरी होती है।