नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यप्रणाली और न्यायिक व्यवस्था में उसके योगदान की सराहना करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट के बीच विशेष संबंध हैं। यह रिश्ता केवल इसलिए नहीं है कि दोनों अदालतें एक-दूसरे के नजदीक स्थित हैं, बल्कि इसलिए भी है कि दिल्ली हाई कोर्ट सर्वोच्च न्यायालय पर आने वाले मामलों का एक बड़ा बोझ अपने स्तर पर संभालता है। मुख्य न्यायाधीश ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित हीरक जयंती समारोह में यह बात कही। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह न्यायिक संस्थान लगातार बदलती कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहा है।दिल्ली हाई कोर्ट परिसर के एस ब्लॉक सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट देश की न्यायिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि कई बार सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आने वाले अधिवक्ताओं को याद दिलाया जाता है कि दिल्ली हाई कोर्ट नजदीक ही स्थित है और वहां भी संबंधित मामले में प्रभावी कानूनी राहत मिल सकती है।मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट की भूमिका केवल राष्ट्रीय राजधानी तक सीमित नहीं है। यहां ऐसे मामलों की सुनवाई होती है, जिनका प्रभाव देश की प्रशासनिक व्यवस्था, नागरिक स्वतंत्रता, कारोबारी गतिविधियों और सार्वजनिक जवाबदेही पर पड़ता है। इस कारण न्यायालय के सामने बड़ी संख्या में जटिल कानूनी विवाद आते हैं।
60 साल की न्यायिक यात्रा को किया याद
दिल्ली हाई कोर्ट की स्थापना 31 अक्टूबर 1966 को हुई थी। शुरुआत में यहां केवल चार न्यायाधीश थे। इससे पहले दिल्ली के मामलों की सुनवाई पंजाब हाई कोर्ट की सर्किट बेंच के माध्यम से की जाती थी।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि छह दशकों में दिल्ली हाई कोर्ट ने उल्लेखनीय विकास किया है। आज यह अदालत विभिन्न प्रकार के संवैधानिक, दीवानी, वाणिज्यिक और अन्य कानूनी मामलों का निपटारा करती है।उन्होंने कहा कि राजधानी का विस्तार, व्यापारिक गतिविधियों में बढ़ोतरी और मुकदमों की बढ़ती संख्या के कारण दिल्ली हाई कोर्ट की जिम्मेदारियां भी लगातार बढ़ी हैं। इसके बावजूद अदालत ने न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के साथ विशेष संबंध का बताया कारण
CJI सूर्यकांत ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट का सर्वोच्च न्यायालय के साथ विशेष रिश्ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल भौगोलिक निकटता का परिणाम नहीं है।उन्होंने बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट कई ऐसे मामलों में राहत प्रदान करता है, जो अन्यथा सीधे सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुंच सकते हैं। इससे सर्वोच्च न्यायालय पर मुकदमों का दबाव कम करने में सहायता मिलती है।मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायिक क्षमता की सराहना के रूप में सामने आई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यायिक संस्थाओं की प्रभावशीलता केवल मामलों की संख्या से नहीं, बल्कि न्याय उपलब्ध कराने की उनकी क्षमता से भी जुड़ी होती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक पर भी जताई चिंता
मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में आधुनिक तकनीक से जुड़ी कानूनी चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अदालतों के सामने अब ऐसे प्रश्न आ रहे हैं, जिनकी कल्पना कुछ वर्ष पहले तक मुश्किल थी।उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार सामग्री के कॉपीराइट, डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग और व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा जैसे विषयों का उल्लेख किया।CJI ने कहा कि नई तकनीकों के विकास के साथ न्यायपालिका को ऐसे मामलों में निर्णय लेना होगा, जिनके लिए मौजूदा कानूनों में हमेशा स्पष्ट प्रावधान उपलब्ध नहीं होते।उन्होंने कहा कि जहां कानून मौन हो, वहां संविधान न्यायपालिका का मार्गदर्शन करना चाहिए। संविधान में निहित गरिमा, स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांत तकनीकी बदलाव के साथ समाप्त नहीं होते।
दिल्ली हाई कोर्ट की बौद्धिक संपदा पीठ की सराहना
CJI सूर्यकांत ने दिल्ली हाई कोर्ट की विशेष बौद्धिक संपदा पीठ (Intellectual Property Division) की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस पीठ ने अपने निर्णयों और कानूनी विश्लेषण की गुणवत्ता के कारण देश और विदेश में पहचान बनाई है।उन्होंने बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने दीवानी और वाणिज्यिक कानून के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेष रूप से वैकल्पिक विवाद निपटान प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए उठाए गए कदम उल्लेखनीय हैं।मुख्य न्यायाधीश ने वर्ष 2009 में स्थापित दिल्ली हाई कोर्ट से संबद्ध मध्यस्थता केंद्र का उल्लेख किया। यह भारत में किसी हाई कोर्ट से संबद्ध अपनी तरह का पहला मध्यस्थता केंद्र था।उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्थाएं विवादों के समाधान के लिए न्यायिक प्रक्रिया के अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराती हैं।
जस्टिस विक्रम नाथ ने भी की न्यायाधीशों की प्रशंसा
समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के आत्मविश्वास, अनुभव और न्यायिक क्षमता की सराहना की।जस्टिस नाथ ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीशों का व्यक्तित्व और आत्मविश्वास विशेष पहचान रखता है। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि कभी-कभी दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों से भी अधिक प्रभावशाली दिखाई देते हैं।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में महत्वपूर्ण कानूनी मामलों की सुनवाई करने का अनुभव न्यायाधीशों को विशेष आत्मविश्वास देता है। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के अधिवक्ताओं की तैयारी और कानूनी दक्षता की भी प्रशंसा की।
न्याय आम आदमी तक पहुंचना सबसे जरूरी
दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे ने भी समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था की वास्तविक सफलता का आकलन इस बात से होना चाहिए कि कतार में अंतिम व्यक्ति को कितनी जल्दी और पारदर्शिता के साथ न्याय मिलता है।उन्होंने कानून और न्याय के बीच की दूरी कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एन. हरिहरन ने भी न्यायालय की ऐतिहासिक उपलब्धियों को याद किया।हरिहरन ने कहा कि किसी न्यायिक संस्थान की वास्तविक पहचान केवल उसके आकार या आंकड़ों से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में उसके द्वारा निभाई गई भूमिका से होती है। उन्होंने न्यायमूर्ति एच.आर. खन्ना के योगदान का उल्लेख करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायिक विरासत को याद किया।दिल्ली हाई कोर्ट के 60वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित इस समारोह में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के वर्तमान एवं पूर्व न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता तथा न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का संबोधन न्यायपालिका में संस्थागत सहयोग, संवैधानिक मूल्यों और बदलती तकनीकी चुनौतियों के महत्व को रेखांकित करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि दिल्ली हाई कोर्ट भविष्य में भी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हुए आधुनिक कानूनी समस्याओं का प्रभावी समाधान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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