Delhi दिल्ली सरकार अपनी नीतियों को बनाने, उनका मूल्यांकन करने और उनमें तालमेल बिठाने वाले सिस्टम में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार केंद्र के 'नीति आयोग' की तर्ज पर 'दिल्ली इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन एंड इनोवेशन' (DITI) बनाने का प्रस्ताव लाई है। प्लानिंग डिपार्टमेंट ने इस प्रस्तावित संस्थान के लिए मंज़ूरी मांगने के लिए कैबिनेट नोट भेजा है, जिससे यह सिर्फ़ नाम बदलने से कहीं ज़्यादा बड़ा बदलाव बन गया है। DITI को एक ऐसी पॉलिसी और रिसर्च संस्था के तौर पर देखा जा रहा है जो सरकार के फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में डेटा, असर का आकलन और लंबी अवधि की प्लानिंग से जुड़ी जानकारी देगी। यह प्रस्ताव CM रेखा गुप्ता की बजट 2026-27 में की गई घोषणा के बाद आया है, जिसके लिए 59 करोड़ रुपये तय किए गए हैं।
उम्मीद है कि यह प्रस्तावित संस्था पॉलिसी रिसर्च, एनालिटिकल स्टडीज़ और असर का आकलन करेगी। साथ ही, यह विभागों को विकास की रणनीतियां और सेक्टर-वाइज़ लक्ष्य तय करने और मॉनिटरिंग व मूल्यांकन को मज़बूत करने में मदद करेगी। सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने 'द ट्रिब्यून' को बताया, "यह सरकार का अपना थिंक टैंक होगा। यह सीधे तौर पर दिल्ली के बड़े पब्लिक प्रोग्राम्स (जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याण) के मूल्यांकन के तरीके पर असर डालेगा। अब ज़ोर इस बात पर होगा कि क्या किसी स्कीम से मापने लायक नतीजे मिल रहे हैं, न कि सिर्फ़ इस बात पर कि उसे लागू किया गया है या नहीं।"
DITI के दायरे में 8 क्षेत्र शामिल करने का प्रस्ताव है: अर्थव्यवस्था और वित्त; पर्यावरण और पारिस्थितिकी; स्वास्थ्य; सामाजिक क्षेत्र; शिक्षा; शहरी विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर; सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (सतत विकास लक्ष्य); और IT व डेटा एनालिटिक्स। प्रस्ताव के अनुसार, CM DITI के चेयरमैन होंगे, जबकि वाइस-चेयरपर्सन की नियुक्ति CM करेंगे। दिल्ली के सभी मंत्री, मुख्य सचिव, DDA के वाइस-चेयरपर्सन, MCD कमिश्नर और NDMC के चेयरपर्सन इसके सदस्य होंगे।