भारतीय फार्माकोपिया 2026 में 121 नए मोनोग्राफ शामिल

Update: 2026-01-02 17:14 GMT
New Delhi, नई दिल्ली : केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने आज डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में भारतीय औषध संहिता 2026 (आईपी 2026) का विमोचन किया। यह भारत की औषधि मानकों की आधिकारिक पुस्तक का 10वां संस्करण है, जो दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता को मजबूत करने के भारत के निरंतर प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, नए संस्करण का विमोचन करते हुए नड्डा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारतीय फार्माकोपिया देश में दवाओं के लिए आधिकारिक मानक पुस्तक के रूप में कार्य करती है और भारत के फार्मास्यूटिकल्स नियामक ढांचे का आधार है। उन्होंने कहा कि 10वां संस्करण वैज्ञानिक प्रगति, वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और फार्मास्युटिकल विनिर्माण एवं विनियमन में भारत के बढ़ते नेतृत्व को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय फार्माकोपिया 2026 में 121 नए मोनोग्राफ शामिल किए गए हैं, जिससे मोनोग्राफ की कुल संख्या बढ़कर 3,340 हो गई है। उन्होंने आगे कहा कि तपेदिक रोधी, मधुमेह रोधी और कैंसर रोधी दवाओं के साथ-साथ आयरन सप्लीमेंट सहित प्रमुख चिकित्सीय श्रेणियों में कवरेज को काफी मजबूत किया गया है, जिससे विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत उपयोग की जाने वाली दवाओं का अधिक व्यापक मानकीकरण सुनिश्चित होता है।
फार्माकोविजिलेंस का जिक्र करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, 'हाल के वर्षों में, भारतीय फार्माकोपिया के मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकृति मिली है क्योंकि यह भारत सरकार की स्वास्थ्य कूटनीति के अंतर्गत एक प्रमुख एजेंडा बन गया है।' उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय फार्माकोपिया अब वैश्विक दक्षिण के 19 देशों में मान्यता प्राप्त है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, नड्डा ने भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) के अंतर्गत भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपी) की उल्लेखनीय प्रगति पर भी प्रकाश डाला । उन्होंने बताया कि 2009-2014 के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन के फार्माकोविजिलेंस डेटाबेस में योगदान के मामले में भारत वैश्विक स्तर पर 123वें स्थान पर था, लेकिन 2025 में यह 8वें स्थान पर पहुंच गया है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए आईपीसी और पीवीपी टीम की सराहना करते हुए नड्डा ने कहा कि मजबूत फार्माकोविजिलेंस प्रणाली रोगी सुरक्षा, गुणवत्ता आश्वासन और सुदृढ़ नियामक निगरानी के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
महत्वपूर्ण नियामकीय प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, मंत्री ने औषधि और सौंदर्य प्रसाधन (द्वितीय संशोधन) नियम, 2020 के प्रावधानों के अनुसार, भारतीय फार्माकोपिया 2026 में पहली बार रक्त आधान चिकित्सा से संबंधित 20 रक्त घटक मोनोग्राफ को शामिल करने पर जोर दिया।
अपने समापन भाषण में नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत सरकार ने स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों और नियामक संस्थानों को मजबूत करने की दिशा में निरंतर कार्य किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय औषध संहिता 2026 इसी निरंतर प्रयास और गुणवत्ता, पारदर्शिता और जन कल्याण पर सरकार के अटूट ध्यान का प्रतिबिंब है।
केंद्रीय मंत्री ने एक बार फिर भारतीय फार्माकोपिया आयोग और दसवें संस्करण को प्रकाशित करने में शामिल सभी हितधारकों को बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय फार्माकोपिया 2026 दवा गुणवत्ता मानकों को और मजबूत करेगा, भारत के नियामक ढांचे को सुदृढ़ करेगा और वैश्विक दवा क्षेत्र में देश की स्थिति को बढ़ाएगा।
इस अवसर पर बोलते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुन्या सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय फार्माकोपिया 2026 का प्रकाशन भारत के दवा नियामक तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
श्रीवास्तव ने इस बात पर जोर दिया कि देश भर में सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्ता सुनिश्चित दवाओं की उपलब्धता के लिए एक मजबूत, विज्ञान-आधारित औषध संहिता आवश्यक है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि औषध संहिता मानकों का निरंतर अद्यतन और सामंजस्य वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं, रोगी सुरक्षा और नियामक उत्कृष्टता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही वैश्विक दवा आपूर्ति श्रृंखला में देश की बढ़ती भूमिका का समर्थन भी करता है।
भारतीय औषध संहिता (आईपी) का प्रकाशन भारतीय औषध संहिता आयोग (आईपीसी) द्वारा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1940 की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाता है। आईपी भारत में उत्पादित और/या विपणन की जाने वाली दवाओं के लिए आधिकारिक मानक निर्धारित करती है और इस प्रकार दवाओं की गुणवत्ता के नियंत्रण और आश्वासन में योगदान देती है। आईपी के मानक आधिकारिक और कानूनी रूप से लागू करने योग्य हैं। इसका उद्देश्य देश में दवाओं के निर्माण, निरीक्षण और वितरण के लाइसेंसिंग में सहायता करना है।
भारतीय औषधसंधि चर्चा समूह (पीडीजी) के सदस्य के रूप में, भारतीय औषधसंधि मोनोग्राफ और सामान्य अध्यायों के सामंजस्य के लिए यूरोपीय, जापानी और संयुक्त राज्य अमेरिका की औषधसंधि के साथ सक्रिय रूप से सहयोग कर रही है। भारतीय औषधसंधि की सामान्य आवश्यकताओं को अंतर्राष्ट्रीय सामंजस्य परिषद (आईसीएच) के मानकों के अनुरूप बनाया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत औषध गुणवत्ता मानकों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।
इस कार्यक्रम में डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी, औषधि नियंत्रक जनरल (भारत), हर्ष मंगला, संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, डॉ. वी. कलैसेल्वन, सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक, भारतीय औषध संहिता आयोग और अन्य शीर्ष उद्योग विशेषज्ञ भी उपस्थित थे।
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