नई दिल्ली: कावेरी जल विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई को 15 सितंबर तक के लिए टाल दिया गया है। यह मामला तमिलनाडु की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें कर्नाटक को कावेरी नदी का बकाया पानी छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने दोनों राज्यों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की है। इस दौरान कावेरी जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच जारी मतभेद पर आगे चर्चा होगी।

तमिलनाडु ने की पानी छोड़ने की मांग

तमिलनाडु सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील में मांग की गई है कि कर्नाटक को तय मात्रा के अनुसार अतिरिक्त पानी जारी करने का निर्देश दिया जाए।

तमिलनाडु का कहना है कि राज्य में कृषि कार्य काफी हद तक कावेरी नदी के पानी पर निर्भर है और पानी की कमी से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सुनवाई के दौरान तमिलनाडु की ओर से वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने राज्य की स्थिति अदालत के सामने रखी।

कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा असर

वैद्यनाथन ने अदालत को बताया कि तमिलनाडु में करीब 24,700 एकड़ कृषि भूमि कावेरी के पानी पर निर्भर है।

उन्होंने कहा कि पानी की उपलब्धता कम होने से खेती प्रभावित हो रही है और किसानों की चिंता बढ़ रही है।

तमिलनाडु की ओर से यह भी कहा गया कि कर्नाटक की ओर से पर्याप्त पानी नहीं छोड़े जाने के कारण राज्य को निर्धारित हिस्से का पानी नहीं मिल पा रहा है।

बिलिगुंडलू में पानी की कमी का मुद्दा

सुनवाई के दौरान तमिलनाडु के वकील ने बिलिगुंडलू में दर्ज पानी की कमी का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने कहा कि जल प्रवाह में कमी के कारण तमिलनाडु को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाएं ताकि पानी की कमी को ध्यान में रखते हुए तमिलनाडु की मांग पर दोबारा विचार किया जा सके।

कर्नाटक ने रखा अपना पक्ष

वहीं, कर्नाटक की ओर से कहा गया कि वह पहले से तय मात्रा से अधिक पानी छोड़ रहा है।

कर्नाटक का कहना है कि वह वर्तमान में 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ने की निर्धारित सीमा से अधिक पानी जारी कर रहा है।

राज्य सरकार का पक्ष है कि उपलब्ध जल संसाधनों और परिस्थितियों को देखते हुए पानी छोड़ा जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने तय की अगली सुनवाई

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद इसे 15 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया।

अदालत अब अगली सुनवाई में दोनों राज्यों की ओर से रखी गई दलीलों और उपलब्ध आंकड़ों पर विचार करेगी।

लंबे समय से चल रहा है विवाद

कावेरी जल विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चला आ रहा है।

दोनों राज्यों के बीच नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कई बार विवाद सामने आ चुके हैं।

कावेरी नदी दोनों राज्यों के लिए कृषि और पेयजल की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि जल बंटवारे का मुद्दा हर साल मानसून और जल उपलब्धता के समय अधिक संवेदनशील हो जाता है।

किसानों की चिंताएं बढ़ीं

कावेरी जल विवाद का सीधा असर दोनों राज्यों के किसानों पर पड़ता है।

तमिलनाडु के किसान जहां पर्याप्त पानी की मांग कर रहे हैं, वहीं कर्नाटक भी अपने जल संसाधनों और स्थानीय जरूरतों का हवाला देता रहा है।

दोनों राज्यों की सरकारें अपने-अपने पक्ष को लेकर लगातार केंद्र और न्यायपालिका के सामने दलीलें रखती रही हैं।

अब 15 सितंबर को होगी सुनवाई

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

उस दिन अदालत दोनों राज्यों के तर्कों और जल उपलब्धता से जुड़े आंकड़ों पर आगे विचार करेगी।

कावेरी जल विवाद पर आने वाला सुप्रीम कोर्ट का अगला रुख दोनों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, किसानों और आम लोगों की नजरें भी अब 15 सितंबर की सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

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